Shri Rammandir Kavya

श्री राम वंदना!

श्री राम वंदना! श्री राम तिहारे चरणों की मैं वंदना करूँ ,अपनी शरण में लीजिए मैं वंदना करूँ। जप तप नहीं किया, न कभी पूजा-पाठ ही,विश्वास, प्रेम-भाव ले आई हूँ साथ ही ।प्रभु कृपा कर दीजिए मैं वंदना करूँ। भूल कितनी ही हुईं , कितने हुए हैं मुझसे पाप , क्या मुख लेकर आऊँ मैं, […]

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अवध में आज आएंगे रघुराई

अवध में आज आएंगे रघुराईभरत जी कर रहे अगुवाई।पीछे आती तीनों माताएं, औरखुशी से उनकी आंखें भर आई।अवध में आएंगे —— प्रजाजन सब पीछे आए।सुहागिनों ने मंगल गाए।घरों में बंदनवार सजाए।सबके मन मुदित हो आए।अवध में आएंगे ——- जाने क्या सोचेंगे रामजी,क्या सोचेंगे लक्ष्मण भाई।जब देखेंगे उर्मिला मां कीफीका चेहरा और आंखें पथराई।अवध में आएंगे

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आ गये देखो श्री राम आ गये

आ गये देखो श्री राम आ गये राममय हुआ जग साराअवध में हर और हुआ उजियाराभीग रही थी पलकें कबसेआज लगा लो मिल जयकारा आ गये देखो श्री राम आ गये हो रहें सब नाम में लीनछंट गया मौसम सब गमगीनहौले-हौले जब श्री राम पधारेंदेखो रुप कितना है शालीन आ गये देखो श्री राम आ

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राम का सुमिरन करो (हरि गीतिका छंद)

राम का सुमिरन करो (हरि गीतिका छंद) मन हो रहा व्याकुल कभी जो, राम का सुमिरन करो।हरते सभी वे कष्ट जन के, तुम किसी से मत डरो।।हनुमान जैसे भक्त बन कर, छवि हृदय में तुम धरो।फिर दरश श्री रघुनाथ के हों, जन्म मनु सार्थक करो।। मन हो रहा व्याकुल कभी जो, राम का सुमिरन करो….

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क्यूँ थका बटोही राम डगर पर

  क्यूँ थका बटोही राम डगर पर, पग-पग मोती मिलते हैं राम चिरंतन भजन श्रवण से आत्म दीप नित खिलते हैं। 1.अंबर के आंचल में प्रतिपल वरद-वरद घन पलते हैं. पृथक, सतत, नित सत्य कर्म से अनुभव सेतु बनते हैं, क्यूँ थका बटोही राम डगर पर, पग-पग मोती मिलते हैं। 2.ज्ञान रतन धन पावन जल

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अयोध्या की छवि निराली है

इस कविता में देखिए कैसे अयोध्या वासियों के साथ-साथ देवता और प्रकृति भी *रामलला के जन्म* की खुशियां मना रहे हैं. इस कविता की विशेषता है कि इसमें हिंदी के सभी वर्ण- स्वर और व्यंजन क्रम से तो आए ही हैं, पांचो वर्ग (कचटतप) भी अलग-अलग, एक दृश्य का वर्णन करते हैं *अ* योध्या की

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रघुनंदन के रघुराई

अवध में राम पधारे थे,लहर खुशियों की छाई थी।सलोना देख कर मुखड़ा,आंख मां की भर आईं थी।।स्वर्ग से खुश हो देवों ने,पुष्प उन पर बरसाए थे।सभी के मन हर्षाए थे,पिता फूले ना समाए थे।।ना रघुवर सा हुआ बेटा,ना उन जैसा है अब भाई।नहीं ढूंढे मिले तुमको,रघुनंदन सा रघुराई।।बने वो त्याग की प्रतिमा,हर कर्तव्य निभाएं थे।वचन

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है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है

है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है,सूरज की किरणे शांत हो रही, उफ़न समंदर आता है,पलकों पे ठहरे दो अश्रु, बहने की आज्ञा मांग रहे,सिया विरह का राम प्रभु, खुद को ही दोषी जान रहे, कैसे शत्रु का नाश करें, प्रसन्न करें कैसे शिव को,ना सामग्री सब पूजा की, पुरोहित

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राम का आगमन

राम का आगमन“””””””””””””””” अयोध्या नगरी गूंझ उठीराम के जयकारों सेपुलकित हुई सारी जनताढोल ताशे नगारों से विजय पताका लहरायेभारत के हर प्रांगन मेंराम-राज्य की कल्पनाजाग उठी गलियारों में देवताओं की लीला से पुनःमन कंवल खिल आया प्रभु की लीला न्यारीजन जन को हरशाया अंकित मानस पटल परतारे आकाश मे जैसे धरोहर सदियों की पुनः प्राप्त

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ग़ज़ल 🌹

ग़ज़ल 🌹 चलो त्योहार मिलकर रामनवमी का मनाते हैं जगत ख़ुशहाल होगा आस भगवन से लगाते हैं नज़र आने लगे रावन ही रावन आज धरती पर चलो मिलकर सभी हम राम को वापस बुलाते हैं करे ये रूह पावन आज हम अच्छे विचारों सेचलो अभियान अब तो राम होने का चलाते हैं धरा पर फिर

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