आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।
*श्री राम* आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।रामभक्ति बिन मैं बड़ी असहाय सी हो जाती हूं।मेरे मन मंदिर में उनका ही प्रकाश चमकता है।मेरा सम्पूर्ण जीवन उनके प्रभाव से महकता है। बड़ी हुई हूं मैं उन्हीं की कथाएं सुन सुन कर।जीवन डोर बुनी उन्ही के आदर्श चुन चुन कर।मर्यादित रखू अपने […]
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