Shri Rammandir Kavya

आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।

*श्री राम* आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।रामभक्ति बिन मैं बड़ी असहाय सी हो जाती हूं।मेरे मन मंदिर में उनका ही प्रकाश चमकता है।मेरा सम्पूर्ण जीवन उनके प्रभाव से महकता है। बड़ी हुई हूं मैं उन्हीं की कथाएं सुन सुन कर।जीवन डोर बुनी उन्ही के आदर्श चुन चुन कर।मर्यादित रखू अपने […]

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जिव्या पर बस राम हो , “निर्मल” मन में राम ।

जिव्या पर बस राम हो , “निर्मल” मन में राम ।कानों में गूंजे सदा , दो अक्षर का नाम ।।श्री राम आदर्श हैं , समरसता प्रतिमान ।राम मंदिर बन गया ,सजा अयोध्या धाम ।।जन्म सफल सबका हुआ ,प्रभु के दर्शन पाइ ।भक्त सभी स्वागत करें ,देव सुमन बरसाइ ।। हर घर आंगन देहरी ,जलते दीप

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जिनके सुमिरन से खुल जाते स्वयं मुक्ति के सारे धाम।

जिनके सुमिरन से खुल जाते स्वयं मुक्ति के सारे धाम।वो हैं प्राणन प्यारे राम जय श्री राम जय श्री राम। कौशल्या की आंख तारे,दशरथ के हैं राज दुलारे,ताड़का मार अजामिल तारे,सुर नर मुनि जन के रखवारे,पत्थर तैर गए पानी में छूकर जिनका नाम-वो हैं —– मेरी सांसों में धड़कन में,मेरे अंतस के आंगन में,श्रद्धा होम

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हे राम हमारे आ जाओ।

हे राम हमारे आ जाओ।प्रभु राम हमारे आ जाओ। सरयू जी राह निहारे हैगंगा भी तुम्हें पुकारे हैहै साधु संत सब ये कहतेहैं राम नाम रटते रहते। सब भक्त पुकारे आ जाओ।हे राम हमारे आ जाओ । हे अवधपुरी के रघुनंदन हे राम लखन लेने चंदनतुम चित्रकूट में आए थेजब तुलसी तुम्हें बुलाए थे। भव

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* अवध आनंद *

** अवध आनंद ** दशरथ खुश हुएअवध में राम हुए गाजे बाजे बज रहे बनती सुहारी हो। नाच रहे जन-मनअब नहीं कोई ग़मअवध को मिलें हैंअब त्रिपुरारी हो। चारों भाई खेल करेंआपस में प्रेम धरें कैकेयी मां लाड़ करेंसब पर वारी हो। कौशल्या बलाएं करेंसिया राम डोर बंधेचारों भाई ब्याह रचेंसुमित्रा दुलारी हो। राम सिया

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त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌।

त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌।आओ हम सब चले अब अवध धाम को ।नाच गाकर मनायेंगे खुशियां वहीं ,मिल रहा है भवन अब मेरे राम को । सैकड़ों वर्ष बीते रहे घर बिना ।पा रहे थे सजा बिन सबब बिन गुना’ह ।एक तिरपाल में दिन गुजारे फकत ,सर की खातिर था सर पर खुला

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कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गया

कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गयाएक धोबी के कहने पर क्यों सीता को घर से निकाला गयासभी मांग रहे थे उत्तर प्रश्न खुद बने थे रामजानते थे पवित्रता सीता की फिर भी चुप खड़े थे रामआने वाली पीढ़ी को उन्हे राजधर्म सिखलाना थाराम सह गए हर दुखक्योंकि राम को राम का

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राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं।

राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं।राम सबके हैं रचयिता राम को कितना रचूं में।। राम को बाहर तलाशापत्थरों को भी तराशा।वन गमन भी कर लिया है पर हृदय है अब भी प्यासा। हैं गढ़ा जिसने सभी को आपको कितना गढ़ूं मैं।राम सबके हैं रचयिता राम को कितना रचूं में।। भक्ति की

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राम-राजअब लाना होगा

“राम-राजअब लाना होगा” ‌ ***************** प्राण-प्रतिष्ठा हो गई अवध मेंप्रकाश नवल फैलाना होगा। राम – राज्य को पुनर्जन्म दे, जग को स्वर्ग बनाना होगा।। राम-राज अब लाना होगा ।।* * *अधर्म फैल रहा जो निशदिन, जड़ से उसे मिटाना होगा। डगमग-डगमग नाव धर्म की,मिलकर पार लगाना होगा। राम राज अब————-! * * * पाप पनपते

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युगों का काट कर वनवास

*गीत* युगों का काट कर वनवास,आए धाम,वंदन है।प्लावित मन है भावों से,मेरे श्री राम,वंदन है। चरण में शीश धर उनके,हमे निष्पाप होना है।पकड़ लें हाथ वे बढ़कर,हृदय से ऐसे रोना है।हमे करने यहांँ आए,प्रभु निष्काम,वंदन है। सकल ब्रह्मांड हर्षित है,कण-कण जाप करता है।ये पावन नाम है ऐसा,सभी संताप हरता है।त्रेता आया कलयुग में,प्रतापी नाम,वंदन है।

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