क्यूँ थका बटोही राम डगर पर
क्यूँ थका बटोही राम डगर पर, पग-पग मोती मिलते हैं राम चिरंतन भजन श्रवण से आत्म दीप नित खिलते हैं। 1.अंबर के आंचल में प्रतिपल वरद-वरद घन पलते हैं. पृथक, सतत, नित सत्य कर्म से अनुभव सेतु बनते हैं, क्यूँ थका बटोही राम डगर पर, पग-पग मोती मिलते हैं। 2.ज्ञान रतन धन पावन जल […]
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