Shri Rammandir Kavya

धरती की गोद में खिली सीता

गीत : धरती की गोद में खिली सीता धरती की गोद में जब हँसी उतर आई,हल की नोक से निकली कन्या मुस्काई।जनक नंदिनी, करुणा की पहली रेखा,मिथिला की माटी ने बेटी को पहचाना।। कंचन-सी काया, कोमल-सा स्वभाव,नेह भरी आँखों में करुणा का अभाव।चिड़ियों से बतियाती, उपवन में खेली,हर कण में बसती थी ममता की सहेली।। […]

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राम नाम का दीपक

राम नाम का दीपक अयोध्या की गलियों से उठी जो इक आवाज़ थी, वो दशरथ-नंदन नहीं, धर्म की परवाज़ थी। कौशल्या की कोख से जन्मा वो इक राजकुमार नहीं, सदियों की तपस्या का मिला हुआ आगाज़ था। पिता के वचन पर राजपाट त्याग दिया, भरत के प्रेम पर सिंहासन वार दिया। वन-वन भटका, काँटों पर

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राम ही सर्वत्र है

“राम ही सर्वत्र है”==============राम की है नगरी सारी,राम से ही काम है।राम मेरे दिल में विराजे,राम शक्तिमान हैं।। राम जी के नाम से,गूँजती हर एक दिशा।राम से आरंभ है,और राम में हर अन्त है।। राम से धरती गगन,जल हवा सब राम से।राम है कण-कण समाए,राम ही विश्वास है।। राम अपने हैं सखा एक,राम पालनहार हैं।राम

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माता सीता केप्राकट्य दिवस पर:-

माता सीता केप्राकट्य दिवस पर:- धरती की कोख से प्रकट हुई, पावन ज्योति सी आई,जनक के आंगन में जैसे, खुद खुशियाँ मुस्काई।सादगी में छिपा था वैभव, आंखों में था धाम,सीता नाम अमर हुआ, संग जुड़ गया श्रीराम। राजमहल की रानी बनकर, सुख सब उनके पास,पर धर्म की राह चुनी, छोड़ दिया राज पाट वन की

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सियाराम ब्याह गीत

सियाराम ब्याह गीत चला सखी ब्याह देखि आयी जनकपुरी ….. चला सखी ब्याह देखि आयी हर्षित मन पुलकित सुखदायक, द्वारे द्वारे तोरड़ लागा हो चला सखी ब्याह देखि आयी तनि चला सखि ब्याह देखि आयी जनकपुरी ….. बहना औ भाभी तेल चढ़ावे, झुकी झुकी मड़वा सजावें हो भइया तनिहो चला सखी ब्याह देखि आयी हो

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प्रकटे राम अवधपुर फिर से

*प्रकटे राम अवधपुर फिर से,*(मापनी 32,यति 16,16पर) हर्षित आज सभी नर-नारी।काल-पुरुष की है बलिहारी।।सरयू भी आह्लादित भारी।धन्य राम की सब महतारी।।स्वस्ति-वचन गूँजें हर गिरि से।प्रकटे राम अवधपुर फिर से।। अहंकार का रावण आया।असुर-भाव का तंत्र रचाया।।जन्म-भूमि का मन हर्षाया।पूर्ण मिटी बाबर की छाया।।हर्ष-निनाद गूँजता स्वर से।प्रकटे राम अवधपुर फिर से।। फिर साकार हुआ युग त्रेता।नौका

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वन-गमन

वन-गमन चले राम, सीता, लखन आज वन को भरत के लिए त्याग कर ताज वन को निरख वेश-भूषा कुमारों का वल्कलनहीं आ रही आज है लाज वन को बड़ा क़र्ज़ है भूमि का राम पर भी चुकाने चले उसका हैं ब्याज वन को भले ही है साकेत जन्नत से बढ़कर मगर मानते वो बड़ा राज

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राम नाम प्रिय है सबको

राम नाम प्रिय है सबको,है ये जग में सबसे प्यारा नाम।बिना राम के जग ये सूना,राम नाम जपु में सुबह और शाम।त्रेता युग में जन्मे राम,प्रेम से बोलो जय श्री राम।कितना सुंदर विह्वल रुप राम का,मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए ।कर अंहकारी रावण का वध,लौट अयोध्या वापस आये।राम ने चौदह वर्ष वनवास किया ,वन में शबरी पर

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राम राम जय राजा राम

श्री राम भजन 🙏🙏 राम राम जय राजा राम राम राम जय राजा राम रघुपति राघव राजा रामपतित पावन सीताराम (1) राम की नगरी में बैठी हूं राम का भजन सुनती हूं, भजन सुनने से पहले मैं ,श्री राम चरणों में अपना शीश झुकती हूं। (2) मेरे रोम – रोम में राम बसे तन-मन में

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शिला

शिला गौतम ऋषि का आश्रम आज भी मौन है।मौन… वैसा ही मौन, जैसा सदियों पहले अहिल्या पर उतारा गया था। अहिल्या! एक अति सुन्दर स्त्री, निर्मल, प्रतिभाशाली पर जब छल हुआ, तो दोष उसका नहीं थाफिर भी श्राप उसी को मिलाउसने एक क्षण में सब कुछ खो दियाअपना स्वर, अपना सम्मान, अपना अस्तित्व।वह जीवित थी,

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