मंदिर राम विराजित होंगे
जो आँखों में अभिलाषा थी, उसको पंख मिलेंगे अब।मंदिर राम विराजित होंगें,मन के पुष्प खिलेंगे अब। वसुधा स्वागत को तत्पर है,ईंट नींव को पाने को।बाँध पैजनियाँ नर्तन करके, प्रभु को खूब रिझाने को।अन्तस तक है लहर खुशी की,मंगल गायन करने को।अपने आँचल में प्रभु भक्ति, पूर्ण रूप से भरने को।जन-जन के चरणों की रज ही,उसका […]
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