मुक्तक
अगर कुदरत न चाहे तो,समन्दर घट नही सकतासत्य को काटना चाहो,मगर वो कट नही सकताज्ञान की बह रही सरयू ,बुझाती प्यास जन जन कीअयोध्या में कभी बन्धुत्व,दिल से हट नही सकता ।। जहाँ कण कण में अमृत हो,वहाँ पारा नही होगाअयोध्या धाम का पानी,कभी खारा नही होगाये धरती आस्था की है,प्रेम की बह रही सरिताप्रभू […]









