Shri Rammandir Kavya

मुक्तक

अगर कुदरत न चाहे तो,समन्दर घट नही सकतासत्य को काटना चाहो,मगर वो कट नही सकताज्ञान की बह रही सरयू ,बुझाती प्यास जन जन कीअयोध्या में कभी बन्धुत्व,दिल से हट नही सकता ।। जहाँ कण कण में अमृत हो,वहाँ पारा नही होगाअयोध्या धाम का पानी,कभी खारा नही होगाये धरती आस्था की है,प्रेम की बह रही सरिताप्रभू […]

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राम सृष्टि सरकार दोहा छन्द

पावन दर्शन राम का, अवध पुरी शुभ धाम।भव संकट के ताप से, तारे प्रभु का नाम।। सरयू पावन नीर है, मुक्ति मोक्ष मय तीर।सकल अवध है राम मय, तज दूँ यहीं शरीर।। पूरित होती कामना,कटे कष्ट अविराम ।राम नाम अति शोभना, जपिये आठो याम। सीता के आराध्य प्रभु, निर्झर प्रीति अगाध।संचित श्रेष्ठ गुणांक हैं, शुभमय

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करुणा का जहां भी नाम आया, प्रभु राम का वहां नाम आय

( करुणा राम की) करुणा का जहां भी नाम आया,प्रभु राम का वहां नाम आया।ऐसे करुणाधारी पर आज,मेरा मन खोज उपहार लाया। पीड़ा निर्वासन की सह सहकर,तन मन कभी न हुए विचलित,कर्म से कभी न हुए विरत ,याद रहे सदा अपने वचन। चमकता सूर्य का तेज अंग अंग,करुणा प्रेम वीरता का संगम,शुद्ध विचारों से है

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राम नाम की सम्पदा

राम नाम की सम्पदा, बड़े भाग का खेल।राम नाम जप ते भया, राम चरण में मेल।। सोवत जागत नाम जप, सुलभ कृपा श्रीराम।निश-दिन जापूँ नाम हरि, राम करें मम् काम।। मैं मेरे राम का लाडला, रहूँ राम के धाम।राम कृपा श्रीनाम् , रामहिं चरण प्रणाम।। बिना नाम जप राम के, मन नहिं होत हुलास।रामहिं पूरण

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श्री राम कलियुग मे

श्री राम कलियुग मे श्री राम का धरती पर आना कब सफल होगा ? श्री राम के आने पर भी गर ,हमको दर्पण दिख जाएगा ।श्री राम का धरती पर आना,मानो सफल हो जाएगा कलयुग मे देखो दीन बहुत है, मेक बहुत हैँ मीन बहुत है । जिस दिन मीन मेक का ये देखो ,खेल

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दिव्य अयोध्या धाम(गीत)

दिव्य अयोध्या धाम(गीत)————————सारी दुनिया चकित हुई है ,देख अयोध्या धाम।धाम की बात निराली,लला की सूरत प्यारी । अभिनन्दन में रघुनन्दन के,अद्भुत रौनक़ छाई है ।देख लला की प्यारी मूरत ,ऑंखें भर भर ऑई है ।जन जन पुलकित ,तन मन पुलकित,ह्रदय हिलोरे खाए।लला की सूरत प्यारी,धाम की बात निराली ।सारी दुनिया चकित—— एक राग है एक

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नयन अश्रु से पद मैं पखारूं

।।नयन अश्रु से पद मैं पखारूं ।। छवि प्यारी तुम्हारी निहारू प्रभु।नयन जल से पद मैं पखारू प्रभु।। बिंदु से सिंधु तक तुम हो समाए हुए,सारी सृष्टि को खुद से लुभाए हुए। पग पग पर सभी को संभाले हुए,फिर मैं कैसे तुमको बिसारू प्रभु।।छवि प्यारी तुम्हारी निहारू प्रभु। आप भक्तो के दिल में समाए हुए,चांद

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गुंजाया है सब भक्तों ने नारा

जय श्री राम गुंजाया है सब भक्तों ने नारा “जय श्री राम” का ।सुखद स्वप्न साकार हुआ है आज अयोध्या धाम का ।। आज दिवंगत हुतात्माओं को भी शांति मिली होगी,स्वर्ग लोक में सभी देवताओं की दृष्टि खिली होगी ।हुआ समाप्त सुनो रे भाई झगड़ा आठो याम का ।।गुंजाया है सब भक्तों ने नारा “जय

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कर्मों का फल

कर्मों का फल——————–उम्मीद नहीं थी राजा दशरथ को रानी कैकेई ऐसा वर भी मांगेगी। अपने ही लाडले राम को वह वन में भेजना चाहेंगी। होनहार यह कैसी राजा दशरथ का मंन डोला।अरे रानी फिर से तो सोचो भला यह तुमने क्या बोला ? राजा गिडगिडाते रहे पर रानी तो चुप खड़ी थी।अपनी एक ही बात

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र’’आ’ ‘म’ के शब्द तीन हैं सुन्दर

र’’आ’ ‘म’ के शब्द तीन हैं सुन्दर ,ब्रह्मा विष्णु शिवरूप से बनकर ।दशरथ कौशल्या अंक आए रघुराई, अवध कुंवर से रघुकुल शोभा बढ़ आयी।” खल दुष्ट जब अति बढ़ते जाते ,चोर लम्पट न रुक पाते ,मातपिता देव तुल्य न रहते ,साधु भी न आदर पाते । अधर्म का जब वर्चस्व होता ,धर्म का ह्रास था

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