राम तुम्हारी सतत खोज है
राम तुम्हारी सतत खोज है वेदना के विशाल व्योम में राम तुम्हारी सतत खोज है। हम शापित हैं दशरथ जैसेकैकेयी हुईं हैं इच्छाएँ वनवास सरीखा है जीवनहैं भरत प्रतीक्षा सी आशाएँ मृग मारीचिका के विलोम में राम तुम्हारी सतत खोज है। प्रणय प्रताड़ित हुआ सदा हीसूपर्णखा का भाग्य लिएहुआ जटायु मन का पाखीप्रेम प्रदीप्त वैराग्य […]
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