Shri Rammandir Kavya

राम की महिमा गाएंगे

राम अयोध्या के राजा थे,फिर राजा बन जाएंगे।और राम की पूजा करने,फिर से हम सब जाएंगे।मन्दिर वहीं बनाएंगे,रिपोर्टप्रभु की महिमा गाएंगे।एक बार वनवास दिया था,उनको उनकी माता ने।खुशी-खुशी स्वीकार किया था,जग के भाग्य विधाता ने।पर अबकी जो मिला उन्हें वो,दिया क्लेश निर्माता ने।और उसे अब खत्म किया है,जन-गण-मन के ज्ञाता ने।आज अदालत ने भी माना,राम […]

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🌻दान की महिमा- श्वेत का उद्धार !!🌻

एक बार प्रभु श्रीरामचन्द्र पुष्पक यान से चलकर तपोवनों का दर्शन करते हुए महर्षि अगस्त्य के यहाँ गये। महर्षि ने उनका बड़ा स्वागत किया। अन्त में अगस्त्य जी विश्वकर्मा का बनाया एक दिव्य आभूषण उन्हें देने लगे। इस पर भगवान् श्रीराम ने आपत्ति की और कहा- ब्रह्मन् !! आपसे मैं कुछ लूँ,यह बड़ी निन्दनीय बात

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दशरथ जी के जन्म की कथा

महाराज दशरथ का जन्म एक बहुत ही अद्भुत घटना है पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया जाता है कि एक बार राजा अज दोपहर की वंदना कर रहे थे।उस समय लंकापति रावण उनसे युद्ध करने के लिए आया।वह दूर से उनकी वंदना करना देख रहा था। राजा अज ने भगवान शिव की वंदना की

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राम नरोत्तम, राम नारायण, राम ही प्राणाधार है

राम नरोत्तम, राम नारायण, राम ही प्राणाधार है _मेरा राम करे वैतरणी से पार हैप्रेम पुण्य का राम मर्म है,पुण्य कर्म ही राम धर्म है,राम आत्म सुख की परिभाषा,राम ही जीवन की अभिलाषा,राम तत्व का मूल बीज है, जीवन का आधार है _मेरा राम करे वैतरणी से पार है…..राम परम पावन अवतारी,वेद पुराणों का अधिकारी,जीवन

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एक बार फिर से आ जाओ!

हे रघुनंदन! दानव भंजक! कहाँ छुपे हो राम? एक बार फिर से आ जाओ, छोड़ स्वर्ग का धाम। त्राहिमाम करें सभी प्राणी, मचता हाहाकार। फिर से हो अवतरित धरा पर, कर जाओ उद्धार।। तुम्हीं बना सकते हो अब तो, सारे बिगड़े काम। एक बार फिर से आ जाओ, छोड़ स्वर्ग का धाम।। त्रेता में अवतार

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जय रघुकुल भूषण रामभद्र

जय रघुकुल भूषण रामभद्रलोकाभिराम श्री राम नमन।हे हंस-वंश अवतंस श्रेष्ठअखिलेश्वर, पूरणकाम नमन।। शरणागत वत्सल, दीनबंधुपुरुषार्थ,प्रेम के परम धाम।सायुज्य मुक्ति करता प्रदानऐसा पावन श्री राम-नाम।। हे पुरुषोत्तम करुणा-निधानआजानुबाहु अभिराम नमन।हे हंस-वंश अवतंस श्रेष्ठअखिलेश्वर, पूरणकाम नमन।। त्यागी, अनुरागी, तपोनिष्ठश्री राम एकता के प्रतीक।जिनके अंतर्मन में रहते अविराम अहर्निश मर्मरीक।। शुचिता,सहिष्णुता,सत्व,शीलमर्यादा के सुखधाम नमन।हे हंस-वंश अवतंस श्रेष्ठअखिलेश्वर, पूरणकाम

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जय श्री राम

🙏🙏 जय श्री राम🙏🙏 मास-दिवस पथ तकते बीते, राम! कहो कब आओगे?दर्शन के व्याकुल नैनों को, कबतक यूँ तरसाओगे? प्राण-पखेरू उड़ जाएँगे, फिर भी आँखों को मेरीअपलक अपनी राहें तकते, राम! हमेशा पाओगे भाग्य न पाया केवट जैसा, श्रद्धा भी शबरी जैसीफिर भी मन कहता है राघव! तुम मुझको अपनाओगे चरणों की रज छूने भर

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लक्ष्मण उर्मिल संवाद

🌷-:लक्ष्मण उर्मिल संवाद:- 🌷शोक का मन से अपने हरण कीजिए।हे प्रभु!धर्म का अनुसरण कीजिए।।मैं निभाऊंगी प्राणों से बढ़कर वचन।आप श्री राम का अनुकरण कीजिए।।🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹 ये परीक्षा का व्रत अब हमें दीजिए।पूरण आप अपना संकल्प कीजिए।।मैं प्रतीक्षा की घड़ियों की संबल बनूं।ऐसा स्वामी मुझे एक वर दीजिए।।🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷सशंय सारे ही अपने तज दीजिए जिए।अपने चरणों की मुझको

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रामदूत ने भान कराया

जीवन का अनुबंध जानने, प्रियजन रामायण पढ़ना ।त्रेता युग की राम कथा पढ़, मानव तुम चिंतन करना ।। मर्यादित जीवन जीने को, करो कथा का पारायण ।भ्रात सरीखे सम्बन्धों की, कथा बताती रामायण ।।शासन के अधिकारी अग्रज, बोल भरत ने सुख त्यागा ।केवट जैसी रहे भावना, करते वे ही भव तारण ।।लक्ष्मण रेखा कभी न

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भरत

राज महल के सुख को त्यागाभ्राता की चरण पादुका पूजा।इस धरती पर भरत समानजन्मा नहीं कोई भाई दूजा।। चौदह वर्षों तक किया भूषितवस्त्रों वा मुकुट का परित्याग।चरण पादुका की पूजा करकेधारण किया सदा वैराग्य।। धरती पर ही सोये सदाबिस्तर का भी किया था त्याग।कंदमूल फल खाये हरदमअन्न का भी किया था त्याग।। राम लौट जब

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