Shri Rammandir Kavya

हे राम।।

हे राम ये पूजा बहुत हुई,कानों को सुना टंकार ज़रा।तू तान प्रत्यंचा धनुष चढा,रावण है बढा, ललकार ज़रा। दुनिया सारी सोती जो रही,सीता अब तक रोती जो रही।शस्त्रों से सुसज्जित कदम बढ़ा,जगे दुनिया सुन झंकार ज़रा। हर पाँव क्यूँ ठिठका लगता है,मानव क्यूँ ईश ही तकता है।नहीं डर दानव मन आज रहा,चल दे तो बता […]

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राम

राम रमे हैं इस ब्रह्माण्ड में जानो तोअद्भुत सृष्टि नजारों को पहचानो तोराम प्रकृति की छाए हुए फिजाओं में पंच तत्व से निर्मित जग लीलाओं मेंराम साधना है भक्तों की सांसों की जपी तपी ज्ञानी ध्यानी विश्वासों कीराम विशुद्ध ज्ञान विज्ञान प्रदाता हैंइस संपूर्ण सृष्टि के भाग्य विधाता हैराम श्रेष्ठतम उपलब्धि के नायक हैंप्राणिमात्र के

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मेरे मन में बिराजो

मेरे मन में बिराजो आ कर राम मेरे तन में बिराजो आ कर राम।। मेरी सेवा तुम स्वीकार करो मेरी पूजा तुम स्वीकार करो हृदय में बिराजो आ कर राम।। तुमने ऐसा संसार रचासुख-दु:ख के मेले में उलझाकण-कण में बिराजो आकर राम।। पल-पल हर पल तेरा नाम जपूँ आजीवन नाम तेरा सिमरूँ साँसों में बिराजो

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भजन- मेरे श्री राम

भजन- मेरे श्री राम वचन निभाते मेरे श्री राम।वनवास भी जाते मेरे श्री राम। जन-जन को भाते मेरे श्री राम। गुरु मान बढ़ाते मेरे श्री राम। विष्णु अवतारी मेरे श्री राम। महिमा भी न्यारी मेरे श्री राम। ताड़का भी मारी मेरे श्री राम। दुश्मन पर भारी मेरे श्री राम। शबरी उद्धारक मेरे श्री राम।रावण संहारक

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भरत मिलाप

भरत मिलाप प्रभु श्री राम कीयाद में काट तो लियाभरत ने चौदह वर्ष का वनवास । आने की खबर सुनभरत को अब एक-एक पल लगें चौदह वर्ष समान । लिया प्रण भरत ने कित्याग दूंगा प्राण अगरप्रभु ने देर की अब। तभी हनुमंत प्रकट हुए और बोले ….जिनके विरह में तडपते है दिन-रात आपवो प्रभु

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सुर-ताल

सुर-ताल साध अनुपम हनुमान गा रहे हैं।सजी’ दीपमय अयोध्या श्री राम आ रहे हैं।। जो निषंग चाप सायक हैं दिनेश वंश मण्डन।सिय वाम सँग शोभा अभिराम पा रहे हैं।‌। महिमा अमित विशाला भुजबल अतुल कराला।लछमण जी पीछे-पीछे सम शेष भा रहे हैं।। अविराम अश्रुपूरित करबद्ध हैं भरत जी।श्री राम की चरण रज मस्तक लगा रहे

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दुर्मिल सवैया

दुर्मिल सवैया सिय पूज रही गिरिजा मन से,वर आज मिले रघुनंदन का।लख के छवि शीतल नैन हुए,उर लेप लगा जस चंदन का। प्रण घोर किया पितु ने जननी,फिर कौन सुने स्वर क्रंदन का।बस आस रही तुम से अब तो,शुभ आज मिले फल वंदन का। सुन्दरी सवैया थक बैठ गये धनु छूकर के,तिल भी न हटा

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम (१).मात-पिता का श्राप, अधूरा रह जाता।देवों का संताप, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे कहलाते?ऋषि मुनियों का जाप, अधूरा रह जाता। (२).समय-सत्य का बोध, अधूरा रह जाता।केवट से अनुरोध, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे कहलाते?रावण का प्रतिशोध, अधूरा रह जाता। (३).भ्रात – प्रेम, अनुराग, अधूरा रह जाता।गीध जटायु त्याग, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम

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कितने प्रश्न उठाओगे तुम

कितने प्रश्न उठाओगे तुम, बोलो मेरे राम परबिन मुझको जाने पहचाने, पहुँच गए परिणाम पर चला रहे हो, बिन जाने ही कटु प्रश्नों की आरी को लेकर वन में साथ गए क्योंमुझ कोमल सुकुमारी को चौदह बरस राम वन जाये माँगा था वर माता ने मगर किया था आग्रह मैने वही शेष अनु-भ्राता ने विनय

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चलो अयोध्या धाम

चलो अयोध्या धाम अवध में फिर आएंगे राम!!-२सीता लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न और वीर हनुमान!दशरथ के प्रभु राजदुलारेकौशल्या की आँखों के तारेप्रजा वत्सल शबरी के प्यारे हे जगत निधान! ख़ूब सजी है अवध नगरियालगती जैसे कोई दुल्हनियाबरसों का सपना पूरा होगा बनेगा तीर्थ धाम! पूरी हुई है अब जाके परीक्षाहमने की अब तक बहुत प्रतीक्षाअब तक

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