Shri Rammandir Kavya

भरत राम लक्ष्मण दिया तेल बाती

भरत राम लक्ष्मण दिया तेल बातीइन्हीं से प्रखर शत्रुहन्ता प्रभाती ये कुल सूर्य के संग्रहित तेज का हैये ब्रह्माण्ड में सत् अखिल ओज का हैयहाँ सृष्टि के नत सभी हैं प्रभारीयहाँ दण्डवत हैं पुरारि सुखारी यहाँ पितृ सत्ता में माता हैं शक्तिसभी के हृदय में है वात्सल्य भक्तियहाँ लोकहित का ही बस ध्यान होगायहाँ विश्व […]

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राम बनना आसान नहीं है।

राम बनना आसान नहीं है। विधि ने था ज़ब रंग दिखाया महलों से वनवास दिलाया।सिंहासन को त्याग उसी पल वनगमन आसान नहीं है।राम बनना आसान नहीं है । पिता का वचन निभाने कोवल्कल पहन चला वन को पितृभक्त ऐसा बनना इतना भी आसान नहीं है ।राम बनना आसान नहीं है । माँ की ममता छोड़ी

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राम नाम की ओढी चादर

🙏🏻🌹 जय श्री राम🌹🙏🏻 राम नाम की ओढी चादर, हृदय सिंघासन बना दिया, बैठाया है प्रभु श्री राम को, जीवन सफल बनाया है। हुईं अकेली मैं जीवन में, प्रभु को मित्र बना लिया, बातें करतीं हरदम उनसे, उनकों सब कुछ मान लिया। पाठ करूँ हनुमान चालीसा, करूँ प्रार्थना बजरंग बली से, जैसे हृदय प्रभु श्री

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श्री राम भक्त श्री हनुमान

श्री राम भक्त श्री हनुमान———————————————————— अंजनि पुत्र पवनसुत हैं वो रामायण के प्रमुख पात्र ,दोस्ती ख़ूब निभाई आपने रामचन्द्र जी के सुमित्र, सुपात्र। आपने ही तो रामचंद्र को वीर सुग्रीव से मिलवाया,शक्ति लगी जब लक्ष्मण जी को राम जी का‌ दिल‌ भर आया। पर वैद्यराज ने हिमालय पर्वत से संजीवनी की जरूरत बतलाई,सूर्योदय से पहले

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क्या है कोई मेरे प्रभु जैसा जहान में

क्या है कोई मेरे प्रभु जैसा जहान में,हैं सर्वोपरि वह तो महनों में महान हैं। कहलाते मर्यादा पुरुषोत्तम,प्रतीक प्रेम के वो अति उत्तम ,धर्म-कर्म है कौन सा जिसमें मेरे राम नहीं है सर्वोत्तम ।क्या कोई तीनो लोक में उनके समान है।हैं वो सर्वोपरि वह तो महानों में महान हैं। सीता सुकुमारी कोमल सी कली ,जनक

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गीत

मेरे दिल में बसे रघुवर तुम्हे कैसे मनाऊँ मैं।कुछ भी छुपा नहीं तुमसेतुम्हे क्या बताऊँ मैं। तुम्ही कण कण में बसते होअवध में तुमको पाया है।जब भी आँसू मेरे आएबन गए मेरा साया है।तुम्हे क्या आजमाऊँ मैं।मेरे दिल———————- मेरी धड़कन कहे रघुवरदिल से आवाज आती है।तेरे दर्शन को अब मेरीअखियाँ तरस सी जाती है।तुझे कैसे

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सनातन के श्री राम

माता शारदे को नमनसनातन के श्री राम सारे शिशु रघुकुल के, दशरथ के घर किलकारी भरें।बलिहारी जातीं तीनों माता, दशरथ के मन आनंद भरें।मोहक मुस्कान, नयनाभिराम घुंघराले केश हैं।जोर से रोएँ,खुलकर हंँसे कभी, दिव्य वेश है। दूध पिलाने मात कौशल्या, दौड़ीं राम के पीछे।खेलत लुकाछिपी ,राम जी पहुंँचे, तभी पलंग के नीचे।करधनी सोहे कमर में,

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कैकेयी की व्यथा!

कटु तंज, सहे ना अब जाते,ये तीक्ष्ण वचन ना उर भाते,जग ने माँ का अपमान किया,माँ ममता को बदनाम किया, हे राम ! उचित कथ्य दे दो,मातृत्व बचें, सत्य कह दो। हर ओर निराशा ने घेरा,अपराध बतादो तुम मेरा,मैंने अपराध किया था क्या?तुमको वनवास दिया था क्या? हे राम ! उचित तथ्य दे दोमातृत्व बचें,

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सीता हरण

स्वर्णिम मृग को देख सिया ने,कहा राम से जाओ नाथ।करो शीघ्र आखेट हिरण का,लाओ इसको अपने साथ। मन तो नहीं था चल दीन्हे पर,चाह सिया की पूरी करने।प्राणप्रिया के सुख की खातिर,राम लगे लंबे डग भरने। नाथ नहीं जब लौट के आए,समय बहुत जब बीता।लक्ष्मण-रेखा खींच लखन भी,चले छोड़कर सीता। तभी दशानन पंचवटी में,साधु का

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पुरुषोत्तम राम

पुरुषोत्तम तुम जब भी आनाहर आंगन में खुशियां लानाकिसी आंख में ना हो आंसूहर मुखड़े पर हंसी सजाना कोई अपनों से ना रूठेजो बिछुड़े हैं उन्हें मिलानापतझड़ तो आना जाना हैहर बगिया में फूल खिलाना सांझ सकारे तुम रखवारेप्रभु दे दो तुम वह सुरतालअमृत रस से भर दो घट-घट अंतस्तल तक भर दो ताल ऐसा

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