Shri Rammandir Kavya

पावन बेला

आई है पावन बेला, मंगल है यह घड़ी, चहुँ ओर से सज गई ,देखो अयोध्या नगरी । गर्भ गुफा मे विराजेंगे, इसी माह प्यारे राम लला, प्रभु के मनोहर बाल स्वरूप के, दर्शन की ललक है सबको लगी। होगा मंगलगान ,बजेंगे डोल खड़़ताल, आरती, धूप, दीप ,शंखनाद की लगेगी छड़ी। प्रभु राम की कृपा, बरसेगी […]

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राधिका छंद में एक कृति माँ शारदे को समर्पित

(लय–दुख हरो द्वारिका नाथ, शरण मै तेरी) ********प्रभु राम लीन्ह अवतार , कोशला धामा।हरि रखा चतुर्भुज रूप,सोह अभिरामा।।ब्रम्हाण्ड कोटि प्रति रोम , कहे श्रुति वेदा। साधक सम साधन साध्य, न कोई भेदा।। जब लखा अलौकिक रूप, मात अनुमाना। है झूँठ रहे मम गर्भ , राज सब जाना ।।यह हरि इच्छा मन मानि ,सहज सुखु माना।प्रभु

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प्रभु सियाराम वन से अवध आगमन पर

सियाराम लखन घर आई रे,अवध में बंटत बधाई रे।जनम जनम के पुण्य उदित भए,पूरण हुई सकलाई रे।हर्ष निनाद चहुं दिश गुंजित,जीव जगत हर्षाई रे।। मंगल चौक पुरावो री सजनी,जगर मगर दीपावली रजनी।वंदनवार पताका लड़ियां,झालर दीप जलें फुलझडियां।मुक्ता कलश रंगोली घर घर,अंगना दीप जलाई रे।।सियाराम लखन घर आई रे। ढ़पली ढ़ोल मृदंगा बाजें,मंगल कीर्तन गायन गाजें।ढ़ोलक

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करुणा का जहां भी नाम आया, प्रभु राम का वहां नाम आय

( करुणा राम की) करुणा का जहां भी नाम आया,प्रभु राम का वहां नाम आया।ऐसे करुणाधारी पर आज,मेरा मन खोज उपहार लाया। पीड़ा निर्वासन की सह सहकर,तन मन कभी न हुए विचलित,कर्म से कभी न हुए विरत ,याद रहे सदा अपने वचन। चमकता सूर्य का तेज अंग अंग,करुणा प्रेम वीरता का संगम,शुद्ध विचारों से है

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हम सब ने मन के मन्दिर में दीप जलाए हैं

हम सब ने मन के मन्दिर में दीप जलाए हैं आज अयोध्या नाथ अयोध्या वापस आए हैं हम——- कितने हर्षित नादिया , सूरज, चाँद, सितारे हैं फूलों ने खुद परम पूज्य के पाओं पखारे हैं कलियों ने भी मधुरिम मधुरिम गीत सुनाए हैं आज —— कौशल्या के दशरथ के वो राज दुलारे हैं भक्त जनों

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बरसों बाद राम बिराजे

बरसों बाद राम बिराजे,बाजत ढोल,मृदंग और बाजे। सारी अवध में भया उजियारा,बैठा सिंहासन दशरथ प्यारा। मथुरा,पुरी,उज्जैन और काशी,देत बधाई सब भारतवासी। बरसों बरस जो तक रही आँखें,आज पुलकित हों भर आई आँखें। आज अवध में कोलाहल भारी,देस-बिदेस से पधारे नर-नारी। सफल हुआ ये उसका जीवन,करे इक बार जो राम के दर्सन। बहुत तरस ली अब

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स्वागत में

राम आपके स्वागत में अनेकों दीप जलाऊ द्वारे खीर पूड़ी बनाऊं रुचि रुचि भोग लगाऊं।। लक्ष्मण आपके स्वागत में अनेकों रंगोली बनाऊं द्वारे दीपों से अंगना सजाऊं रोशनी से दीवारें सजाऊं।। सिते आपके स्वागत में मिठाइयां अनेकों बनाऊं दीपमाला से घर सजाऊं मिटे मिटे मालपूए बनाऊं।। प्रिय वर आपके स्वागत मेंकोई चांद अमावस मेंगिरे नयनों

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राम की महिमा

राम तुम्हारे ह्रदय में, सारा जगत समाया।सत्य, धर्म, और त्याग का तुम्हीं ने, जीवन का पथ दिखाया। मर्यादा की मूरत तुम, आदर्शों के दीप हो।दुख में भी मुस्कान रचते, मिसाल में अनुपम हो। वन-वन में तुमने कष्ट सहे, पर धर्म न छोड़ा।प्रजा के खातिर राज तजा, हर बंधन को तोड़ा। शबरी के जूठे बेर चखे,

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मनोकामना

हे राम कृपा करना ,मुझे मोक्ष कभी नहीं देना,जन्म जन्म में वास प्रभु जी, अवधपुरी में देना।हे राम——‐नभ में जल में या थल में,जिस योनी में जन्म मिले,अवधपुरी की पावन रज का,सुखद स्पर्श मिले,श्रद्धा का मान रख लेना, मुझे मोक्ष कभी नहीं देना।हे राम——–हे रघुनंदन सरयु के शुभ तीर्थ सलिल में, मछली मैं बन जाऊँ

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श्री राम का अयोध्या आगमन

आगमन है अयोध्या में, राम का भव्य मन्दिर में। दिवाली हम मनायेंगे, करेंगे दर्श कण कण में। हवाएं गीत गायेंगी, हृदय में हार्दिक बंदन। मेरे घर राम आयेंगे, लगेगा माथे पे चंदन। राम सरयू की धारा में, राम जीवों की हलचल में। जलेंगे द्वीप हर घर में, तो दर्शन की लौ में। विरह की आग

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