जिस धरा पर हुवे अवतरित राम हैं
जिस धरा पर हुवे अवतरित राम हैं, उस धरा को ही कहते अवध धाम हैं।।इससे पावन नहीं कुछ हमारे लिए, जो भी हैं बस हमारे प्रभु राम हैं।। १कितने वर्षों बिताए हैं तिरपाल में, राम को हमनें रक्खा था किस हाल में।कुछ असुर सुर में सुर को मिलाए तभी, ठोक दी देव ने ताल को […]
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