Shri Rammandir Kavya

जिस धरा पर हुवे अवतरित राम हैं

जिस धरा पर हुवे अवतरित राम हैं, उस धरा को ही कहते अवध धाम हैं।।इससे पावन नहीं कुछ हमारे लिए, जो भी हैं बस हमारे प्रभु राम हैं।। १कितने वर्षों बिताए हैं तिरपाल में, राम को हमनें रक्खा था किस हाल में।कुछ असुर सुर में सुर को मिलाए तभी, ठोक दी देव ने ताल को […]

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शबरी के राम

रघुवर तुम आओगे कब तकअब मुझे रुलाओगे कब तकअंखियां दर्शन को तरस रहींऐ अश्रु बहाएंगी कब तकरघुवर तुम आओगे कब तक मां शबरी तेरी राह निहारेपलक पांवड़े बिछे हैं द्वारेनयनों से अविरल झरना बहतासिसक-सिसक कर दिल है कहतारघुवर तुम आओगे कब तक मैं राम दरश अभिलाषी हूंतेरे दर्शन की प्यासी हूंमैं ना मथुरा,ना काशी हूंप्रभु

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अयोध्या

अवधपुरी मनभावन अतिशय , पावन सरयु धार ।कण-कण सिंचित भक्ति सुधा से, महिमा अमित अपार ।।सूर्यवंश का शौर्य समाहित वेद ऋचाओं से आवाहित।प्राण जाय पर वचन नं जाये,बूंद बूंद मरजाद प्रवाहित सदाजयी यह सदाशयी भू , रघुकुल यश विस्तार।कण-कण सिंचित भक्ति सुधा से, महिमा अमित अपार।।लक्ष्य सदा जिनका परमारथ इक्ष्वाकु ,रघु ,सगर ,भगीरथकीर्ति पताका उच्च

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राम सहारा जन जन का

है राम सहारा जन-जन का। है नाम सहारा तन- मन का। हम भाव जगत के प्राणी हैं। थोड़े अल्हड़, नादानी हैं।।बस राम- नाम को भजते हैं।निंदा चुगली को तजते हैं।।हमें प्राणों से जो प्यारा है।वह सार जानता कण- कण का।। है राम सहारा जन- जन का। है नाम सहारा तन मन का।। चिंता- चिंतन में

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रामजी की महिमा अपार

हम उनको नमन और वंदन करते, कोटि कोटि अभिनंदन करते, जो लाए अयोध्या में बहार, राम जी की महिमा अपार _ध्यान नही उन पर था किसी का, न ही ठिकाना था प्रभु राम का, भक्तों को दिखाया चमत्कार,राम जी की महिमा अपार __कितने बरस तंबू में गुजारे, अच्छे दिवस की राह निहारे, रामजी जब पहुंचे

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सबके अपने अपने राम

(आल्हा छंद) मुल्ला पंडित सिक्ख मसीहा, नाना पंथ अनेकों नाम। सभी धर्म का मूल एक है, किंतु सभी के अपने राम॥ हर रजकण में राम व्याप्त हैं, राम नाम सुन्दर सुखधाम।सदा विराजें अंतस् तल में, करते हैं मंगल अविराम॥ सृष्टि नियामक रघुपति राघव, पूज्यमान जो हैं हर ग्राम॥निशाचरों को मार गिराये, किये राम भीषण संग्राम॥

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जानकी की करुण व्यथा

जानकी सोचती वाटिका में खड़ी।नाथ तुमको पता क्या कहां मैं खड़ी? ढूंढते ढूंढते थक न जाना प्रभो।राह तकते नयन रात दिन, हर घड़ी।। भूख लगती नहीं, प्यास बुझती नहीं।आज़ अंतस लगे फांस जैसे गड़ी।। साथ रघुनाथ के शूल भी पुष्प हैं।काल लंका बनी है रत्न से जड़ी।। खेल विधना रचाई फंसी मीन सी।कर रही थी

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सीता

चुप चाप बैठी थी मैं कोसी के किनारेसीता मैया के द्वारेमन सोचने लगा कुछ कहानियाँ सी बुनने लगा,नन्ही नन्ही सी कलियों को चुनने लगा,डाल को थोड़ा हटाया तो कुछ अद्भुत सा मुझे नज़र आया ,पहुँच गई जैसे अतीत में सीता राम के मधुर प्रीत में !! सीता खेलती होगी सखियों संग पानी के किनारे ,सीता

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राम नाम की सम्पदा

राम नाम की सम्पदा, बड़े भाग का खेल।राम नाम जप ते भया, राम चरण में मेल।। सोवत जागत नाम जप, सुलभ कृपा श्रीराम।निश-दिन जापूँ नाम हरि, राम करें मम् काम।। मैं मेरे राम का लाडला, रहूँ राम के धाम।राम कृपा श्रीनाम् , रामहिं चरण प्रणाम।। बिना नाम जप राम के, मन नहिं होत हुलास।रामहिं पूरण

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श्री राम कलियुग मे

श्री राम कलियुग मे श्री राम का धरती पर आना कब सफल होगा ? श्री राम के आने पर भी गर ,हमको दर्पण दिख जाएगा ।श्री राम का धरती पर आना,मानो सफल हो जाएगा कलयुग मे देखो दीन बहुत है, मेक बहुत हैँ मीन बहुत है । जिस दिन मीन मेक का ये देखो ,खेल

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