Shri Rammandir Kavya

रामनवमी विशेष

रामनवमी विशेष सगर कुल दशरथ व्यथित, कैसे कुल चल पायेगा, तीन शादियाँ करके भी, दशरथ निःसंतान रह जायेगा? मन की पीड़ा निस्तारण हित, गुरू वशिष्ठ को बतलाया, गुरूजनों ने यज्ञ विकल्प, सन्तान सुख हित बतलाया। उचित समय पर चार पुत्र, दशरथ के घर में आये, अयोध्या में उत्सव भारी, जन जन जिससे हर्षाये। राम लखन […]

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राम राम तो किया बहुत है

राम राम तो किया बहुत है, राम मगर क्या बन पाए हो चलते चलते थक जाते हो, राम के पथ क्या चल पाए हो कंटक भरे हैँ पथ पर किन्तु,,, सहर्ष राम चल देते हैँ राम ही तो हैँ, स्वयं ही जो बस ,श्री राम को बल देते हैँ क्या सागर पर सेतु बन कर

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पीडा राम की

” पीडा राम की “ रावण विजय का उल्लास ,भर गया आर्त नाद में वानर भालू का आह्लाद ,कर दिया भंग राम के एक वाक्य ने । रुक जाओ सिया ,पहले दो अग्नि परीक्षाफिर पाओ बाम भाग । अनेको उल्कापात ,आन पड़े धरती पर।जो धरती भारहीन ,हुई रावण वध से डूब गई धरातल में ।

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राम जनम की शुभ घड़ी आयी

“राम जनम की शुभ घड़ी आयी “ आयी देखो आयी , आयी शुभ घड़ी आयी है राम जनम की शुभ घड़ी आयी है नवमी तिथि और शुक्ल पक्ष चैत्र की विष्णु जी के सातवें अवतार की आयी है आयी देखो आयी …राम जनम की … राम जी का जीवन उनके आदर्श दिखाता है सत्य ,नैतिकता

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जप ले राम का नाम

महिमा उस अविनाशी की जो बनाए बिगड़े काम घट-घट में क्या ढूंढे भक्तों, जप ले राम का नाम। जो मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये, भगतों वो भगवान देव भी जिनकी पूजा करते फिर भी थे इंसान । वचन के खातिर वैभव त्यागा, रखा पिता का मान जपले उनका नाम रे बन्दे मिटे सभी अज्ञान। जिसके चरण कमल

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राम-राम

हिंदू को, हिंदुत्व में, जीना तो सिखा नहीं पाए हो तुम उनके लिए धरा पर राम ले आए हो । शौक पाल लिया है, जिन्होंने पराधीनता में जीने कातुम कहते हो, उनके लिए धरा पर राम आए हैं । वह गुलाम रहने की, आदत नहीं बदल पाए हैं तुम उनके लिए सुग्रीव के मददगार, राम

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अवध में आए हैं मेरे प्रभु राम रे

सखी दीवाली मनाओ सुबह-शाम रेअवध में आए हैं मेरे प्रभु राम रेढोल मंजीरों की सुनाओ री तान रेअवध में आए हैं मेरे प्रभु राम रे। मैं तो सदियों से देख रही बाट रे खोले बैठी हूं दिल के कपाट रेलला आएंगे तो चूमूंगी ललाट रेफूलों से सजेगा पूरा अयोध्या धाम रेअवध में आए हैं मेरे

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मुक्तक

अगर कुदरत न चाहे तो,समन्दर घट नही सकतासत्य को काटना चाहो,मगर वो कट नही सकताज्ञान की बह रही सरयू ,बुझाती प्यास जन जन कीअयोध्या में कभी बन्धुत्व,दिल से हट नही सकता ।। जहाँ कण कण में अमृत हो,वहाँ पारा नही होगाअयोध्या धाम का पानी,कभी खारा नही होगाये धरती आस्था की है,प्रेम की बह रही सरिताप्रभू

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राम सृष्टि सरकार दोहा छन्द

पावन दर्शन राम का, अवध पुरी शुभ धाम।भव संकट के ताप से, तारे प्रभु का नाम।। सरयू पावन नीर है, मुक्ति मोक्ष मय तीर।सकल अवध है राम मय, तज दूँ यहीं शरीर।। पूरित होती कामना,कटे कष्ट अविराम ।राम नाम अति शोभना, जपिये आठो याम। सीता के आराध्य प्रभु, निर्झर प्रीति अगाध।संचित श्रेष्ठ गुणांक हैं, शुभमय

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कितना सुंदर मिला सौभाग्य

कितना सुंदर मिला सौभाग्य,मानो ये जीवन तर हो गया।केवट को एक दिन जब,रघुवर का दर्शन हो गया।जीवन भर की तपस्या,हो गई आज सफल उसकी।मन हुआ पुलकित प्रसन्न,जीवन धन्य हो गया।केवट को एक दिन जब,रघुवर का दर्शन हो गया।वो नौका भी कितनी पवित्र हो गई,जिस पर राम के कमल चरणों का स्पर्श हो गया।ऐसा सुंदर, मनोरम

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