Shri Rammandir Kavya

राम जनम की शुभ घड़ी आयी

“राम जनम की शुभ घड़ी आयी “ आयी देखो आयी , आयी शुभ घड़ी आयी है राम जनम की शुभ घड़ी आयी है नवमी तिथि और शुक्ल पक्ष चैत्र की विष्णु जी के सातवें अवतार की आयी है आयी देखो आयी …राम जनम की … राम जी का जीवन उनके आदर्श दिखाता है सत्य ,नैतिकता […]

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जप ले राम का नाम

महिमा उस अविनाशी की जो बनाए बिगड़े काम घट-घट में क्या ढूंढे भक्तों, जप ले राम का नाम। जो मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये, भगतों वो भगवान देव भी जिनकी पूजा करते फिर भी थे इंसान । वचन के खातिर वैभव त्यागा, रखा पिता का मान जपले उनका नाम रे बन्दे मिटे सभी अज्ञान। जिसके चरण कमल

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राम-राम

हिंदू को, हिंदुत्व में, जीना तो सिखा नहीं पाए हो तुम उनके लिए धरा पर राम ले आए हो । शौक पाल लिया है, जिन्होंने पराधीनता में जीने कातुम कहते हो, उनके लिए धरा पर राम आए हैं । वह गुलाम रहने की, आदत नहीं बदल पाए हैं तुम उनके लिए सुग्रीव के मददगार, राम

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अवध में आए हैं मेरे प्रभु राम रे

सखी दीवाली मनाओ सुबह-शाम रेअवध में आए हैं मेरे प्रभु राम रेढोल मंजीरों की सुनाओ री तान रेअवध में आए हैं मेरे प्रभु राम रे। मैं तो सदियों से देख रही बाट रे खोले बैठी हूं दिल के कपाट रेलला आएंगे तो चूमूंगी ललाट रेफूलों से सजेगा पूरा अयोध्या धाम रेअवध में आए हैं मेरे

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मुक्तक

अगर कुदरत न चाहे तो,समन्दर घट नही सकतासत्य को काटना चाहो,मगर वो कट नही सकताज्ञान की बह रही सरयू ,बुझाती प्यास जन जन कीअयोध्या में कभी बन्धुत्व,दिल से हट नही सकता ।। जहाँ कण कण में अमृत हो,वहाँ पारा नही होगाअयोध्या धाम का पानी,कभी खारा नही होगाये धरती आस्था की है,प्रेम की बह रही सरिताप्रभू

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राम सृष्टि सरकार दोहा छन्द

पावन दर्शन राम का, अवध पुरी शुभ धाम।भव संकट के ताप से, तारे प्रभु का नाम।। सरयू पावन नीर है, मुक्ति मोक्ष मय तीर।सकल अवध है राम मय, तज दूँ यहीं शरीर।। पूरित होती कामना,कटे कष्ट अविराम ।राम नाम अति शोभना, जपिये आठो याम। सीता के आराध्य प्रभु, निर्झर प्रीति अगाध।संचित श्रेष्ठ गुणांक हैं, शुभमय

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कितना सुंदर मिला सौभाग्य

कितना सुंदर मिला सौभाग्य,मानो ये जीवन तर हो गया।केवट को एक दिन जब,रघुवर का दर्शन हो गया।जीवन भर की तपस्या,हो गई आज सफल उसकी।मन हुआ पुलकित प्रसन्न,जीवन धन्य हो गया।केवट को एक दिन जब,रघुवर का दर्शन हो गया।वो नौका भी कितनी पवित्र हो गई,जिस पर राम के कमल चरणों का स्पर्श हो गया।ऐसा सुंदर, मनोरम

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राम विवाह

दो नैन रघुनाथ के दो नैन जानकी के ऐसे समाये चार नैन एक हो गए सखियां भी घूर रही लक्ष्मण जी लखा रहे दुनिया को मोहने वाले आज मोहित हो गए फूलों को चुन टोकरी में डाल रहे दूजे क्षण निकाल रहेविस्मित हुए से खड़े जानकी को निहार रहे नैना सिया में खोए अधर मुस्काए

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श्री राम बनवास

श्री राम रूप मुनि का धरबन निकल रहे हैं। देखो अवध के राजाबन बन भटक रहे हैं।। महलों की राजरानीसीता चली है संग में।पैरों में उनके कांटेपग पग पे चुभ रहे हैं।। लक्ष्मण जी बन के सेवकश्री राम के चले हैं।महलों में उर्मिला केअश्रु छलक रहे हैं।। दशरथ जी होके व्याकुलश्री राम को पुकारें।मेरे राम

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!! अयोध्या पति की सेवा में !!

श्री रामचंद्र रंग भीना मेरा मन हर लीना जी। मेरा मन हर लीना जी मेरा मन हर लीना जी। सिर पर स्वर्ण मुकुट है भारी, शोभा मुख मंडल की न्यारी। तन पर इत्र लगायो है हिना, मेरा मन हर लीना जी।। मूरत श्याम रंग की शोभित, दर्शन कर सब होते मोहित। जामा पीत रंग का

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