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मर्यादा पुरुषोत्तम

मर्यादा पुरुषोत्तम: भगवान श्री राम🙏🙏 श्री रघुवर जग के अति प्यारे, दशरथ जी के राज दुलारे।कौशल्या के नैनन तारे, मात सुमित्रा के सुत न्यारे।भरत कैकयी के मन भाए, लखन शत्रुघ्न संग में आए।चैत्र मास की नवमी आई, सबने मिलकर खुशी मनाई।गुरु वशिष्ठ से विद्या पाई, दुष्ट ताड़का मार गिराई।पद-रज देकर श्राप मिटाया, माँ अहिल्या का […]

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प्रदीप छंद गीत

प्रदीप छंद गीतशीर्षक- मुझको कब इनकार है। अतिशय प्रिय हैं चारों बेटे, मुझको कब इनकार है।राजपाट बस मिले भरत को, उसका भी अधिकार है॥दशरथ नन्दन राम। दशरथ नन्दन राम॥ खूब मंथरा पाठ पढ़ाए, बढ़ा रही मन खार है।कोप भवन में बैठी रानी, किया नहीं श्रृंगार है॥वचन कैकई माँग रही है, दशरथ भी लाचार है।राजपाट बस

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वन-वन भटकते राम खड़े, नयन भरे अश्रु धार

वन-वन भटकते राम खड़े, नयन भरे अश्रु धार,सीता बिन सूना हर क्षण, सूना सारा संसार।हर पेड़ से वो पूछ रहे, “देखी क्या तुमने जानकी को ?”पत्तों की सरसराहट बोली, “हम भी तरसे उस रानी को।”हर डाली से झुककर बोले, हर फूलों से की पुकार,“बतला दो पता मेरी प्राणप्रिया का, कहाँ छुपा है उनका प्यार?”नदियों की

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राम मेरे लौट आओ

राम मेरे लौट आओ-सूनी सूनी तन की नगरी राह तकती मन की शबरीकष्ट पीड़ा सब मिटाओ राम मेरे लौट आओराम मेरे लौट आओ।। देखो अब कितनी अहिल्या मोम से पत्थर बनी हैं।बिन तुम्हारे उनकी पीड़ा कब कहाँ किसने सुनी है।वीतरागी हो रहा मन ज्ञान की गंगा बहाओ ।राम मेरे लौट आओ राम मेरे लौट आओ।।

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राम तुम्हें अब आना होगा

राम तुम्हें अब आना होगाकलयुग की इस घोर रात्रि में,सत्य हुआ लाचार प्रभु।मर्यादा की नींव हिली है,फैला है हाहाकार प्रभु।​धर्म-अधर्म का भेद मिटा अब,स्वार्थ बना है सबका प्रिय!छल और कपट का राज हुआ है,​फिर से धनुष उठाना होगा!दुष्टों को तड़पाना होगा,धर्म की जोत जलाने को प्रभु,राम तुम्हें अब आना होगा।​सूपर्णखा सी नीयत बिखरी,रावण जैसा अहंकार

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जन्म से लेकर मृत्यु तक जो है,

जन्म से लेकर मृत्यु तक जो है,है वो मेरे राम जी ,सत्यनिष्ठा की मूरत है जो ,है वो मेरे राम जी ,है सिया के प्राण जो,है वो मेरे राम जी ,धर्म पालन के लिए छोड़ा सिया को हैवो मेरे राम जीखुद भी जिया वनवास सिया संग,है वो मेरे राम जी।मर्यादा परषोत्तम है जो,है वो मेरे

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🌿✨ कहाँ ढूँढते हो राम? ✨🌿

🌿✨ कहाँ ढूँढते हो राम? ✨🌿 🏹 राम ही हर साँस में हैं, राम ही हर नाम,धड़कनों की ताल में भी, गूँजते श्रीराम।करुणा की हर बूँद में हैं, शांति का विश्राम,मन की हर निर्मलता में, बसते हैं श्रीराम। ✨ मत खोजो उन्हें बाहर, मंदिर या धाम,अंतर के आँगन में ही, करते नित वे विश्राम।त्यागो मन

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राम ही राम बोल

राम ही राम बोल राम ही आदि राम अनंता,राम चिरंतन कौल, मनवा राम ही राम तू बोल। राम ही तारे राम उबारे, राम ही बिगड़ी आन संवारे,नाम बड़ा अनमोल। मनवा राम ही राम तू बोल। राम त्याग है, राम पराक्रम, राम की भक्ति,राम समागम,निर्भय हो जग डोल। मनवा राम ही राम तू बोल। राम धूप

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तुम भी राम बन सकते हो

तुम भी राम बन सकते होमदद का हाथ बढ़ाकर,किसी का काम बन सकते हो,तकलीफों के रावण को मारकर,तुम भी राम बन सकते हो.. आसान नही है, सत्ता का त्याग करना,खुशी खुशी, वनवास स्वीकारना,दान कर अहम अपना, सरल बनो,किसी के मुश्किलों का तुम, हल बनो,उम्मीद और खुशियों का, पैगाम बन सकते हो,कोशिश तो करके देखो एक

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भक्ति रस

भक्ति रस मन दर्पण में राम बसाकरभाव मग्न हो जाऊँ मैं,राम नाम की वीणा बनाकर ख़ुद झंकृत हो जाऊँ मैं। रोम रोम श्री राम समायेजीवन दरिया बहता जायेहनुमंत रस बरस उठे अब हम सबके मन को हर्षायेकण कण में तुमको ढूँढू प्रेम मोती बरसाऊँ मैं,मन दर्पण में राम बसाकरभाव मग्न हो जाऊँ मैं….. राम नाम

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