प्रदीप छंद गीत
प्रदीप छंद गीतशीर्षक- मुझको कब इनकार है। अतिशय प्रिय हैं चारों बेटे, मुझको कब इनकार है।राजपाट बस मिले भरत को, उसका भी अधिकार है॥दशरथ नन्दन राम। दशरथ नन्दन राम॥ खूब मंथरा पाठ पढ़ाए, बढ़ा रही मन खार है।कोप भवन में बैठी रानी, किया नहीं श्रृंगार है॥वचन कैकई माँग रही है, दशरथ भी लाचार है।राजपाट बस […]









