राम सा कोई बन के तो दिखाए
राम सा कोई बन के तो दिखाए मेरे राम पर उँगलियाँ उठीं हैं, कथाएँ मिथ्या कुछ गढ़ी गईं हैं ।उँगलियाँ जिन लोगो नें उठाई हैं,वो धर्मनिरपेक्ष हैं ,साम्यवादी हैं ।कहने को कहलाए बुद्धिजीवी हैं, भीतर से किंतु निरे भोगवादी हैं।निराधार तर्क कुतर्क हैं उनके ,बातों में बहुत अनर्थ हैं उनके ।कहें वो राम नें सीता […]
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