Shri Rammandir Kavya

स्वरचित, गीत/भजन

स्वरचित, गीत/भजन काम क्रोध लोभ मोह, व्याधियां तमाम हैं।इनसे डर का काम क्या है, साथ में जो राम है।। राजपाठ छोड़ दिया, था पिता के वास्ते,सुख की सेज त्याग चुने, कण्टकीर्ण रास्ते,धैर्य धर्म वीरता का दूसरा ये नाम है।इनसे डर का काम क्या है,,,,,, रिश्तों का स्वरूप क्या हो, ये सिखाया राम ने,न्याय धर्म सत्य […]

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गीत

गीत** ऐसे हैं श्री राम ..। ऐसे हैं श्री राम ..। मेरे ऐसे हैं श्री राम…। ऊँच नीच का भेद मिटाकर ,सबको गले लगाते हैं।पितु के आज्ञाकारी पुत्तर ,पितु का वचन निभाते हैं।छोड़ छाड़ कर राज-पाट सब,वन में जा बस जाते हैं।ऐसे हैं श्री राम ..।मेरे ऐसे हैं श्री राम…! विश्वामित्र के ख़ातिर रघुवर,राक्षस से

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मुक्तक

मुक्तक जलो, जल सको दीप बनकर वहाँ।अंधेरा हो फैला धरा पर जहाँ।बनो बेसहारों की बैसाखियाँ –जियो ,हो सके राम बनकर यहाँ।   छोड़ फूलों के गलीचे शूल पर चलना पड़ा।दर्द में भी मुस्कुराकर दर्द को छलना पड़ा।था नहीं आसान कहलाना स्वयं को राम यूँ –कष्ट के साँचों में था प्रभु राम को ढलना पड़ा दुल्हन

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प्रभु श्री राम विषयक रचना(गीत)

प्रभु श्री राम विषयक रचना(गीत) स्वागत, वंदन, अभिनंदन————————————हैं निज धाम पधार रहे कौशल्या सुत रघुकुल नंदन ।आओ सब मिल करें राम का स्वागत, वंदन-अभिनंदन ।। पलक पाँवड़े बिछा-बिछा कितने ही वर्षों पथ देखा ।शीघ्र संवरने वाली है हम सबकी किस्मत की रेखा ।।अपने प्रभु को करें समर्पित अक्षत, रोली और चंदन ।आओ सब मिल करें

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जय श्रीराम

जय श्रीराम****राम से बड़ा राम का नाम ।जैसा चाहो वैसा जप लो, भली करेंगे राम ।।०दो अक्षर में शक्ति भरी है , देखो तो अजमाकर ,चाहे लिखकर पढ़कर देखो , चाहे देखो गाकर ,मन बन जायेगा पल भर में, उनका पावन धाम ।राम से बड़ा राम का नाम ।।1०जिसने थामी डोर नाम की, पार गया

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!! राम श्वांस श्वांस है !!

!! राम श्वांस श्वांस है !! राम सबके साथ है, राम ही की आस है।राम सबके प्राण है, राम श्वांस श्वांस है।। श्वास में प्रश्वास में, राम ही प्रभास है,राम के भजन बिना, मेरा मन उदास है।तेरे मेरे राम है, राम ही से काम है।धूप छांव में है राम, नाम गाम राम है।राम बिना जग

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मैंने तुझको सुमिरा रामअलका सिन्हा

  जब भी कोई विपदा आई, मैंने तुझको सुमिरा राम। जो तुम मेरी जगह पे होते, कैसे राघव लोहा लेतेकैसे मर्यादा को रचते, कैसे करते पूरे काम। वन-वन भटके राजभवन से, राज प्रतिज्ञा की खातिरछोड़ राजसी ठाठ-बाट सब, बने नागरिक आम। शबरी के जूठे बेरों में, थी मिठास तूने बतलायाहै कितना अनमोल भाव यह और

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अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा

‘अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा ‘——- रामलला हैं लौटे अपने ही घर में,पांच सौ वर्षों की लंबी ये लड़ाई थी।बलिदान दिया था जितने भी वीरों ने,टेंट में प्रभु देख आंख भर आई थी।खुश हो रहे होंगे वो वीर भी आज,संघर्ष जो अभी तक बनाए रखा गया।सनातन की ही होती जीत हरदम है,समय ये फिर से सबको

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राम बसे हैं मन में

राम बसे हैं मन में भारत के जन जन में राम बसे हैं हर मन में केवट के भावों में रामशबरी के बेरों में रामतिरते पत्थरों में रामयहाँ के कण -कण में राम बसे हैं हर मन में। पवन सुत की भक्ति में रामभातृ -प्रेम में बसे हैं राम पितृ- आज्ञा में रमे हैं रामकाल

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