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अयोध्या में राम आये हैं

  अयोध्या में राम आये हैं आओ घर घर मनाएं दिवालीअयोध्या में राम आये हैं।ये दिवाली हो त्रेता वालीअयोध्या में राम आये हैं। राम जी आये, लखन जी आये,साथ जगत जननी को लाए,आयी घर घर में नई खुशहाली,अयोध्या में राम आये हैं।आओ घर घर मनाएं दिवालीअयोध्या में राम आये हैं। दुष्ट दलन कर प्रभु जी […]

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कुम्भकर्ण लंका से अब

कुम्भकर्ण लंका से अब,रण मे जाता है यह देखो।डगमग डगमग पर्वत डोले,कि धरा मे कम्पन है देखो,,भगदड़ मचती है सेना मे,अद्भुत यह महासमर देखो,, हरि से मैत्री निभाने को,निज भाई को समझने को,भीषण विध्वंस बचाने कोमेत्र्ति का सनदेशा लाया,भाई के सम्मुख है आया,, दो बन्धु मिले, दो सखा मिले,दो भ्राता मिलते है देखो,,संवाद हुआ क्या

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नहीं मात्र हनुमान केसबके चित में राम हैं

*नहीं मात्र हनुमान केसबके चित में राम हैं* राम रात्रि,राम दिवस,राम भोर शाम हैंराम भाव,राम अनुभूति,राम प्रेम अनुराग हैंराम वचन,राम सोच राम कर्म परिणाम हैं राम भगति,राम शक्ति,राम ज्ञान विज्ञान हैंराम शब्द,राम अर्थ,राम जनकल्याण हैंनहीं मात्र हनुमान के,सबके चित में राम हैं।। राम तीरथ,राम पूजा राम चारों धाम है राम गरिमा,राम महिमा राम गौरव गान

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क्यों भूल रहे हैं आज हमआदर्श हमारे राम हैं।

श्री राम क्यों भूल रहे हैं आज हमआदर्श हमारे राम हैं।लड़ते सदा पापियों से संघर्ष हमारे राम हैं।राम मिले हैं निर्मलता की छांव मेंराम मिले हर शहर गली व गांव में।। राम बसे हैं कण कण मेंसरवन के भी नीर में।राम बसे हैं रामायण मेंलक्ष्मण वाले तीर में।राम बसे हैं मा सती अनुसुइया मेंराम मिले

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शीर्षक-बाबाजी ने झंडी फेरी

शीर्षक-बाबाजी ने झंडी फेरी बाबाजीने झंडी फेरी किस्मत बदलगई। राम गए मन में रावण सिया चुराइलई। सिया सुधिलाने की सौगंध खाइलई।। अंजनी मांने जन्मे उनकीकोख धन्यभईपवन खिलाय गोद उनकीगोद धन्यभई। लंका को पार करके मुदरी गिराइ दईरोती हुई सिया माँ को धीर बँधाइ दई। वन-फल खाए और वाटिका उजाड़ दई कछु रखवाले मारेकछुकोमूर्छाआइगई। रावण खिसिआय

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वैदिक शिक्षा पूर्ण करके

वैदिक शिक्षा पूर्ण करके, जब हुए राम 17 वर्ष के।राज्यभिषक की पूर्व संध्या पर, कैकई की कठोर वाणी से।आदेश हुआ श्री दशरथ जी का, जाना है तुझे राम वनवास।पाकर आज्ञा पिता दशरथ जी की, हुए तैयार जाने को वनवास।माता कोशिल्या से छिपाई सच्चाई, बहाना था जंगल का राज।राज पाट की मोह माया से, हुए दूर

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बाबाजी ने झंडी फेरी

बाबाजी ने झंडी फेरी बाबाजीने झंडी फेरी किस्मत बदलगई। राम गए मन में रावण सिया चुराइ लई। सिया सुधिलाने की सौगंध खाइ लई।। अंजनी मांने जन्मे उनकी कोख धन्य भईपवन खिलाय गोद उनकी गोद धन्य भई। लंका को पार करके मुदरी गिराइ दईरोती हुई सिया माँ को धीर बँधाइ दई। वन-फल खाए और वाटिका उजाड़

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सुर धरनी का पालन करने वाले पालनहार ।

सुर धरनी का पालन करने वाले पालनहार ।हम पर कृपा करो सरकार ।हम पर कृपा करो सरकार । सुरसरि हिमसुता घट-घट वासी ।व्यापक हरि हे अजर अविनाशी ।हम करम न जाने धरम न जाने । कृपानिधाना तुम्हरा मरम न जाने । देव मुनि गन्धर्व सबके पालनहार ।हम पर कृपा करो सरकार …….. हे दीनदयाला श्याम

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