Shri Rammandir Kavya

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम (१).मात-पिता का श्राप, अधूरा रह जाता।देवों का संताप, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे कहलाते?ऋषि मुनियों का जाप, अधूरा रह जाता। (२).समय-सत्य का बोध, अधूरा रह जाता।केवट से अनुरोध, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे कहलाते?रावण का प्रतिशोध, अधूरा रह जाता। (३).भ्रात – प्रेम, अनुराग, अधूरा रह जाता।गीध जटायु त्याग, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम […]

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कितने प्रश्न उठाओगे तुम

कितने प्रश्न उठाओगे तुम, बोलो मेरे राम परबिन मुझको जाने पहचाने, पहुँच गए परिणाम पर चला रहे हो, बिन जाने ही कटु प्रश्नों की आरी को लेकर वन में साथ गए क्योंमुझ कोमल सुकुमारी को चौदह बरस राम वन जाये माँगा था वर माता ने मगर किया था आग्रह मैने वही शेष अनु-भ्राता ने विनय

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चलो अयोध्या धाम

चलो अयोध्या धाम अवध में फिर आएंगे राम!!-२सीता लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न और वीर हनुमान!दशरथ के प्रभु राजदुलारेकौशल्या की आँखों के तारेप्रजा वत्सल शबरी के प्यारे हे जगत निधान! ख़ूब सजी है अवध नगरियालगती जैसे कोई दुल्हनियाबरसों का सपना पूरा होगा बनेगा तीर्थ धाम! पूरी हुई है अब जाके परीक्षाहमने की अब तक बहुत प्रतीक्षाअब तक

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*कजली भजन *

* कजली भजन * हरे रामा वनको चले रघुराई सिया सुकुमारी रे हारी।।हरे रामा नाशत असुरहिँ संतो के भय हारी रे हारी।। केकई ने वर मांगा सुनके दशरथ हुए अधीरा रामा।वन में न भेजो मेरे राम को कहते भर भर नीरा रामा। कि हरे रामा दे दो राज भरत को चाहे सारी रे सारी ।हरे

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शबरी

शबरी भील कुमारी ,नव यौवना, श्रमनामतंग ऋषि से मिले ज्ञान को सहेजा तुमने अपने मन मेंअपने चक्षु द्वय बिछा आंगन में सुकुमार धनुर्धारी अयोध्यापति श्रीरामअपनी मृगनयनी ढूंढते पहुंचे तुम्हारे धाम एक – एक बेर तुम तोड़ती रही उम्र भर जिह्वा से रसवादन कर तृप्त होपुलकित मन भरती रही दामन अश्रुपूरित नैनों से प्रतीक्षा हुई परिपूर्ण

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रघुवर तुमको आना होगा

स्वरचित मौलिक रचना –शीर्षक-रघुवर तुमको आना होगा तुलसी बाबा ने दिया दुनियां को सन्देश,सीता का संग चाहिए तो धरो राम का वेष। रमापति राम जी को सर्वप्रथम प्रणाम करते हैं,पुरुषोत्तम राम की महिमा का हम गुणगान करते हैं।। लिया जो नाम रघुवर का,उजाला दिल में भरता है,धधकते मन के शोलों पर, जो शीतल धार बनता

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विधा – भजन

हमको बना दो सेवक किसी काम के लिए।शबरी बना दो हमको श्री राम के लिए।। तुलसी कभी सूर की आंखों के जाल में,तुलसी कभी सूर की आंखों के जाल में ।करते नहीं भेद हम राघव-गोपाल में,करते नहीं भेद हम राघव-गोपाल में।रख लो प्रभु चरणों में अपनेरख लो प्रभु चरणों में अपने आराम के लिए ।।

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महिमा राम की

राम-राम सिया जय सिया राम राम राम सिया जय सिया राम । भारत के कण-कण में राम, जन – जन के हृदय में राम। राम – राम की धुनि लगी है, दिन और रात सुबह और शाम। राम-राम सिया जय सिया राम, राम राम सिया जय सिया राम। राम नाम भव तारण हारा, जो सुमिरे

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रामचरितमानस

पावन ग्रंथ रचित रामायण, गुणगान इनका कीजिए।शुचितम वंश सुखद रघुनंदन, यशगान इनका कीजिए।।जय बोलो रामायण की, जय बोलो रघुनंदन की।। सच्ची भक्ति प्रभु चरणों में , नैया पार लगाती है ।निष्ठा मात पिता गुरुवर की , गंगा ज्ञान बहाती है।।अनुशासन और मर्यादा की , सीमा निश्चित कीजिए ।।पावन ग्रंथ रामायण…… विजय सदा हो अच्छाई की

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दोहों में श्री हनुमान

हनुमत काया स्वर्ण सी, पहने कुंडल कान ।कुंचित केश घने दिखें , कर लो दर्शन ध्यान ॥ अंजनी पुत्र महाबली, महावीर हनुमान।कष्ट हरें शंकर सुवन, रखें भक्त का मान ॥ बुद्धि ज्ञान बल से प्रबल , तीनो लोक प्रताप।महाबली हनुमान हैं, दूर करें संताप ॥ नभ जल थल पाताल तक, असुर रहे भयभीत ।क्रूर कपट

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