सीता-गाथा
सीता-गाथा सीतामही से विश्व पटल तक तेरे ही कारण है कीर्ति हमारी, कहती है दुनिया की देखो ये आई सीतामही से सीता कुमारी, लव-कुश जैसे ही घूम-घूम के गायेंगे गुण तेरे जनक दुलारी, सब को बतायेंगे धर्म की बातें, सब को सुनायेंगे बातें तुम्हारी। सीतामही की भूमि से निकली, जनक ने पुत्री मान लिया था, शिव का धनुष जब तुमने उठाया, […]









