Shri Rammandir Kavya

रोम रोम से तुम्हें पुकारूं

जय ‌श्री राम रोम रोम से तुम्हें पुकारूं ,क्षण भर न करूं आराम ।मान रखो मेरे सुमिरन का, दर्शन मुझको दो श्री राम।बोलो राम राम राम,बोलो राम राम राम।बोलो राम राम राम,बोलो राम राम राम। राह तकूं मैं शबरी बन कर, तुलसी सम मैं रचती छंद।कथा तुम्हारी पढूं, लिखूं, भरूं हृदय अपने आनंद।अतुलनीय अलौकिक छवि […]

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राम बसते हैं

“श्री राम” राम बसते हैं,भारत के जन -जन में।राम रमते हैं मानस सरोवर में।राम चित्त की निश्छलता है।राम कर्म की पावनता है।राम संबन्धों की शुचि सुगन्ध,राम मुक्ति का सहज अनुबंध।राम मर्यादा पुरुषोत्तम,राम का चरित्र उत्तमोत्तम।राम आदर्शों का ज्वलन्त रूप,राम धर्म का मूर्त स्वरूप।कुसुम से कोमल हृदय,वज्र से कठोर निर्णय।जटायु पर करुणा बरसाई,सुग्रीव से मित्रता निभाई।सम्मान

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लीला राम की

राम मंदिर हेतु सितंबर माह की रचना।“लीला राम की” धरा धाम पर जब बढ़ा,अतिशय अत्याचार।तब जन्में श्री राम जी,आये पालन हार।। राजा अवध लुटा रहे,मोती भर-भर थाल।अवधपुरी में धूम है,जन्मे दशरथ लाल। रानी रूठी भूप से, मांगें दो वरदान।पुत्र भरत को राज्य दो,वन को राम पयान।। राजा व्याकुल रात से, रटें राम भगवान।प्रात:जाते राम वन,दशरथ

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आ बसो मेरे हृदय हे राम मेरे

जय श्री राम 🙏 आ बसो मेरे हृदय हे राम मेरे, दो सहारा हाथ को फिर थाम मेरे कर लिया जब से भरोसा नाथ तुम पर-बन रहे तब से यहाँ सब काम मेरे। जय करूँ मैं राम जी तेरी सदा ही, नाम बिन ज्यों रात अंधेरी सदा ही, दो जगह हे नाथ चरणों में तुम्हारे

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अयोध्या के राजा राम।

कविता – अयोध्या के राजा राम। अयोध्या के राजा राम,धर्म का पालन, जीवन का क्रम।धन्य धरती पर उनका आगमन,भक्तों के दिलों में विराजमान। सीता के संग वनवास में,उनका त्याग, बलिदान और महिमा।लक्ष्मण, संग वन में किया निवास,राम के प्रेम की यह अद्भुत कहानी। रावण के अहंकार पर विजय प्राप्त,लंका के राजा रावण को हराया,सीता को

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सीता स्वयंवर

शीर्षक- सीता स्वयंवर स्वयंवर रचा रहे जनक राजा जानकी विवाह को ।राजकुमार आये अनेक जानकी विवाह को ।।सीता स्वयंवर में उठाना था शिव जी के धनुष को।आए अनेक राजा हिला ना पाए धनुष को ।चिंता की रेखाएं विदेह के चेहरे पर कैसे विवाह हो ।। 1स्वयंवर रचा रहे जनक राजा जानकी विवाह को ।।गुरु विश्वामित्र

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जो राम का नहीं वो काम का नही ।।

राम राम जो राम का नहीं वो काम का नही ।।जो राम का नहीं वो काम का नहीं ।। जन जन की साँस में राम राम है ,आपसी विश्वास में राम राम है ,राम मिल जाएंँगे पुकार के तो देख भक्तों की आस में राम राम है ।डर राम के संग परिणाम का नहीं ,जो

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रामायण में सबसे उपेक्षित स्त्री पात्र

कैकेयी …रामायण का एक ऐसा पात्र… जिससे सभी नफरत करते हैं। कोई अपनी पुत्री का नाम कैकेयी नाम पर नहीं रखना चाहता। कैकेयी… जो बेहद बुद्धिमान थी… युद्ध कला में निपुण थी…. राम को अपने पुत्र से अधिक प्यार करती थी। राम में उसकी जान बसती थी। फिर ऐसा क्या हुआ कि उसने राज्याभिषेक वाले

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किया है भारत ने आह्वान, कर रहे हम मंदिर निर्माण।

किया है भारत ने आह्वान, कर रहे हम मंदिर निर्माण।टाट से मुक्त हुए श्री राम,लगा दो तन,मन,धन औ प्राण।। राम हमारे घट घट वासी,राम रूप ही है अविनाशी।यज्ञ में आ जाओ हनुमान,कर रहे हम मंदिर निर्माण।।किया है भारत ने आह्वान********* आज अयोध्या राह बुहारे,राम मिलें तो रूप निहारें,खुशी से पागल भक्त महान,कर रहे हम मंदिर

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रामायण महात्म्य

रामायण महात्म्यप्रथम चरण-वंदन करूँ, नत शिर बारम्बार। रोम-रोम बसे राम को, ह्रदय मनमंदिर द्वार।। मस्तक पर चन्दन तिलक,अक्षत देउँ चढ़ाय। ह्रदय करो निर्मल प्रभु,सदबुद्धि शांति अंबार।। जय सियाराम जय जय सियाराम १/रामायण महात्म्य है, राम महिमा का गुणगान। सुरतरू की छाया सम, करती दूर दुःख मान।। जय सियाराम जय जय सियाराम २/कलयुग में भव तरने

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