रोम रोम से तुम्हें पुकारूं
जय श्री राम रोम रोम से तुम्हें पुकारूं ,क्षण भर न करूं आराम ।मान रखो मेरे सुमिरन का, दर्शन मुझको दो श्री राम।बोलो राम राम राम,बोलो राम राम राम।बोलो राम राम राम,बोलो राम राम राम। राह तकूं मैं शबरी बन कर, तुलसी सम मैं रचती छंद।कथा तुम्हारी पढूं, लिखूं, भरूं हृदय अपने आनंद।अतुलनीय अलौकिक छवि […]
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