ग़ज़ल – है सहर राम की और शब राम का
है सहर राम की और शब राम का। राम पश्चिम के भी ये पुरब राम का। विश्व है राम से राम ही विश्व हैं, कौन समझे यहाँ पर सबब राम का। सुख मिले या मिले दुःख नहीं फर्क हो, भक्त के सर पे हो हाथ जब राम का। सामना कर सके युद्ध में कौन है, […]
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