Shri Rammandir Kavya

कैकेयी ने फूल दिये कांटों की डगर नहीं

कैकेयी ने फूल दिये कांटों की डगर नहींकब राम हो गये राम, राम को खुद भी खबर नहीं राजतिलक की सुन तैय्यारी कैकेयी घबराईकहीं भटक ना जाये निज उद्देश्य से रघुराईअगर हो गया राजतिलक रघुवर बंध जायेगेधरती को कैसे दुष्टों से मुक्त करायेंगेदुनिया देगी ताना पर उद्देश्य ना जानेगीराम हमें हैं जान से प्यारा वो […]

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राम ही हैं

🚩”राम भक्त अधिक से अधिक भक्तों तक यह कविता पहुंचाएं”🚩🚩🚩जय श्री राम🚩🚩राम ही हैं आधार हमारे राम सभी के प्यारे हैंभवसागर जो पार कराकर करते हमें किनारे हैं शौर्य ऊर्जा के परिचायक राम ही असली नायक हैंमर्यादा पुरुषोत्तम वो इस संस्कृति के अधिनायक हैं राम के ऊपर कोई टीप्पणी करने वाला पापी हैजीने का अधिकार

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!! राम श्वांस श्वांस है !!

!! राम श्वांस श्वांस है !! राम सबके साथ है, राम ही की आस है।राम सबके प्राण है, राम श्वांस श्वांस है।। श्वास में प्रश्वास में, राम ही प्रभास है,राम के भजन बिना, मेरा मन उदास है।तेरे मेरे राम है, राम ही से काम है।धूप छांव में है राम, नाम गाम राम है।राम बिना जग

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मैंने तुझको सुमिरा रामअलका सिन्हा

  जब भी कोई विपदा आई, मैंने तुझको सुमिरा राम। जो तुम मेरी जगह पे होते, कैसे राघव लोहा लेतेकैसे मर्यादा को रचते, कैसे करते पूरे काम। वन-वन भटके राजभवन से, राज प्रतिज्ञा की खातिरछोड़ राजसी ठाठ-बाट सब, बने नागरिक आम। शबरी के जूठे बेरों में, थी मिठास तूने बतलायाहै कितना अनमोल भाव यह और

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अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा

‘अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा ‘——- रामलला हैं लौटे अपने ही घर में,पांच सौ वर्षों की लंबी ये लड़ाई थी।बलिदान दिया था जितने भी वीरों ने,टेंट में प्रभु देख आंख भर आई थी।खुश हो रहे होंगे वो वीर भी आज,संघर्ष जो अभी तक बनाए रखा गया।सनातन की ही होती जीत हरदम है,समय ये फिर से सबको

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राम बसे हैं मन में

राम बसे हैं मन में भारत के जन जन में राम बसे हैं हर मन में केवट के भावों में रामशबरी के बेरों में रामतिरते पत्थरों में रामयहाँ के कण -कण में राम बसे हैं हर मन में। पवन सुत की भक्ति में रामभातृ -प्रेम में बसे हैं राम पितृ- आज्ञा में रमे हैं रामकाल

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राम सा कोई बन के तो दिखाए

राम सा कोई बन के तो दिखाए मेरे राम पर उँगलियाँ उठीं हैं, कथाएँ मिथ्या कुछ गढ़ी गईं हैं ।उँगलियाँ जिन लोगो नें उठाई हैं,वो धर्मनिरपेक्ष हैं ,साम्यवादी हैं ।कहने को कहलाए बुद्धिजीवी हैं, भीतर से किंतु निरे भोगवादी हैं।निराधार तर्क कुतर्क हैं उनके ,बातों में बहुत अनर्थ हैं उनके ।कहें वो राम नें सीता

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राम अवध में पधारे

शीर्षक – राम अवध में पधारे राम भवन में पधारे ,आओ दीपक जलाएंगे।।आए दिन ये सुखारे, आओ दीपक जलाएंगे।। जन्म तुम्हारा हुआ अवध मेंनर नारी सब नाचे अवध में ढोल मंजीरा बाजन लगे खबर यह सबको सुनायेंगे।। आओ दीपक जलाएंगे।।राम भवन में पधारे ,आओ दीपक जलाएंगे।। 1 राम लला भैयन संग खेलें ।कागभुशुण्डि भी संग

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम लगाए बैठी आस, मुझे मेरे राम मिलेंगे।ढूंढती चारों धाम, मुझे मेरे राम मिलेंगे।लगा बैठी हूं धुन ,मुझे मेरे राम मिलेंगे।बिछाए बैठी नयन,मुझे मेरे राम मिलेंगे।। लाखों दुखों को झेल ,मुझे मेरे राम मिलेंगे।सखियां करें उपवास ,मुझे मेरे राम मिलेंगे।सुनाऊं तेरी बात ,मुझे मेरे राम मिलेंगे ।रट रही तेरा नाम ,मुझे मेरे नाम

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