Shri Rammandir Kavya

ग़ज़ल – है सहर राम की और शब राम का

है सहर राम की और शब राम का। राम पश्चिम के भी ये पुरब राम का। विश्व है राम से राम ही विश्व हैं, कौन समझे यहाँ पर सबब राम का। सुख मिले या मिले दुःख नहीं फर्क हो, भक्त के सर पे हो हाथ जब राम का। सामना कर सके युद्ध में कौन है, […]

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मैंने राम को देखा है

कौन हैं राम कैसे थे राम,कब थे राम कहाँ है राम? अक्सर ऐसे प्रश्न उठाते,लोगों को मैंने देखा है। श्रद्धा-सूर्य पर संशय-बादल,मंडराते मैंने देखा है। है उनको बस इतना बतलाना,मैंने राम को देखा है। पितृ वचन कहीं टूट ना जाये,सौतेली माँ भी रूठ ना जाये।राजसिंहासन को ठुकराकर,परिजनों को भी बहलाकर।एक क्षण में वैभव सारा छोड़,रिश्ते

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मैंने क्या अपराध किए हे प्रभू

मैंने क्या अपराध किए हे प्रभू जो मुझको ये परित्याग मिला क्यों मुझे शरण में लिया नहीं क्यों मुझको यह वैराग मिला मैंने प्रीत की रीत निभाई सदा तन मन सब तुमको सौंप दियामैंने कौन से ऐसे कर्म किए मेरे मर्म को ये हतभाग मिलामैंने क्या अपराध किए हैं प्रभू कर्तव्य परायण बनकरके ,सारे आदेशों

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सुंदर सुखद प्रभात सुहानी

सुंदर सुखद प्रभात सुहानी मन वन उपवन मधुरम धानीदेखा राम नयन सुख सीतादोनों दृष्टि हुई उनमाँनी खिले रूप नैनन मधु छलकेसंग पैजनी पद पथ महकेदेख राम मादक सम्मोहन श्री सीता उर शत दल चहके द्वय हिय उठा प्रेम स्पंदन मूँद नयन भये दूनो ध्यानी जन जन को यह प्रीत सुहाईअतिशय मधुर सिया मुस्काई मन ही

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राम जब जब मन में होगें

राम जब जब मन में होगें, मनदीप जलते ही रहेगेंविचार सुरभित होगें तब तब, पुष्प खिलते ही रहेगें अनिमष स्वीकार कर ली, आज्ञा अपने मात पिता कीसहर्ष त्यागा वैभव राजमहल का, राह पकड़ी संघर्षों कीजीता जिसने जब भी मन को, विजय मलहार उसी को मिलेगेंविचार सुरभित होगें तब तब, पुष्प खिलते ही रहेगें प्रभु राम

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जय श्रीराम

सबसे मीठा राम का नाम सबसे मीठे जय सिया राम। आज्ञाकारी पुत्र श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम माता कौशल्या पिता दशरथ दोनों के दुलारे प्यारे राम । पति -धर्म निभाते रामपुत्र -धर्म निभाते राम राज- धर्म निभायालव -कुश के पिता राम । प्रिय भक्त हैं हनुमानछाती चीर बैठाए श्रीराम लक्ष्मण की जान बचाने को द्रोणागिरी

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रामनाम के दोहे-

अवधपुरी में आज है, उत्सव का माहौल।रामलला के गूँजते,धरा गगन में बोल।। पुरुषोत्तम बस एक है, दशरथ नंदन राम।उसके सुमिरन से सभी, पूरण होते काम।। मुखमंडल पर तेज है, हर्षित सब नर-नार।आज अयोध्या का हुआ, दुल्हन सा शृंगार।। भूमि पूजन राम सखे, निज गौरव पहचान।मंदिर के निर्माण से, और बढ़ेगी शान।। चिर-प्रतीक्षित इंतज़ार, ख़त्म हुआ

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जय हनुमान

आज का दिन वीर हनूमान के लिए.तेज के निधान, ज्ञानवान के लिए. रोम रोम जिसका, राम राम हो गया,राम बन गया ! जो सियाराम के लिए. अंजनी का लाल या कि पूत पवन का,अहसान बन गया,स्वयं भगवान के लिए. आजन्म ब्रह्मचारी था,दुनियां का नूर था,भक्ति में डूबा मगर, पहचान के लिए. सागर भी पार कर

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12 रामनामी दोहे

राम नाम ही बोलिये, हित सबका ही होय राम नाम है वो सुधा, जिसका तोड़ न कोय लोग जहाँ प्रसन्न नहीं, वहाँ न जाओ आप जिया रमाओ राम में, मिटें सभी सन्ताप देह जाय तक थाम ले, राम नाम की डोर फैले तीनों लोक तक, इस डोरी के छोर तन की आभा वस्त्र है, मन

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श्री राम आप फिर आना

कलयुग वाली नई सदी हैसंकट में है जमाना इस धरती में कष्ट बहुत हैंश्री राम आप फिर आना।भाई-भाई बने हैं दुश्मनमित्रों में भी प्यार कहाँअँधों की नगरी में होतादर्पण का व्यापार यहाँइस सूखी बंजर भूमि परप्रेम के पुष्प खिलानाइस जगती में कष्ट बहुत हैंश्री राम आप फिर आना । पिता पुत्र को कंधे देतेक्या ये

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