Shri Rammandir Kavya

भरत मिलाप

भरत मिलाप प्रभु श्री राम कीयाद में काट तो लियाभरत ने चौदह वर्ष का वनवास । आने की खबर सुनभरत को अब एक-एक पल लगें चौदह वर्ष समान । लिया प्रण भरत ने कित्याग दूंगा प्राण अगरप्रभु ने देर की अब। तभी हनुमंत प्रकट हुए और बोले ….जिनके विरह में तडपते है दिन-रात आपवो प्रभु […]

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सुर-ताल

सुर-ताल साध अनुपम हनुमान गा रहे हैं।सजी’ दीपमय अयोध्या श्री राम आ रहे हैं।। जो निषंग चाप सायक हैं दिनेश वंश मण्डन।सिय वाम सँग शोभा अभिराम पा रहे हैं।‌। महिमा अमित विशाला भुजबल अतुल कराला।लछमण जी पीछे-पीछे सम शेष भा रहे हैं।। अविराम अश्रुपूरित करबद्ध हैं भरत जी।श्री राम की चरण रज मस्तक लगा रहे

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दुर्मिल सवैया

दुर्मिल सवैया सिय पूज रही गिरिजा मन से,वर आज मिले रघुनंदन का।लख के छवि शीतल नैन हुए,उर लेप लगा जस चंदन का। प्रण घोर किया पितु ने जननी,फिर कौन सुने स्वर क्रंदन का।बस आस रही तुम से अब तो,शुभ आज मिले फल वंदन का। सुन्दरी सवैया थक बैठ गये धनु छूकर के,तिल भी न हटा

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम (१).मात-पिता का श्राप, अधूरा रह जाता।देवों का संताप, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे कहलाते?ऋषि मुनियों का जाप, अधूरा रह जाता। (२).समय-सत्य का बोध, अधूरा रह जाता।केवट से अनुरोध, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे कहलाते?रावण का प्रतिशोध, अधूरा रह जाता। (३).भ्रात – प्रेम, अनुराग, अधूरा रह जाता।गीध जटायु त्याग, अधूरा रह जाता।मर्यादा पुरुषोत्तम

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कितने प्रश्न उठाओगे तुम

कितने प्रश्न उठाओगे तुम, बोलो मेरे राम परबिन मुझको जाने पहचाने, पहुँच गए परिणाम पर चला रहे हो, बिन जाने ही कटु प्रश्नों की आरी को लेकर वन में साथ गए क्योंमुझ कोमल सुकुमारी को चौदह बरस राम वन जाये माँगा था वर माता ने मगर किया था आग्रह मैने वही शेष अनु-भ्राता ने विनय

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चलो अयोध्या धाम

चलो अयोध्या धाम अवध में फिर आएंगे राम!!-२सीता लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न और वीर हनुमान!दशरथ के प्रभु राजदुलारेकौशल्या की आँखों के तारेप्रजा वत्सल शबरी के प्यारे हे जगत निधान! ख़ूब सजी है अवध नगरियालगती जैसे कोई दुल्हनियाबरसों का सपना पूरा होगा बनेगा तीर्थ धाम! पूरी हुई है अब जाके परीक्षाहमने की अब तक बहुत प्रतीक्षाअब तक

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*कजली भजन *

* कजली भजन * हरे रामा वनको चले रघुराई सिया सुकुमारी रे हारी।।हरे रामा नाशत असुरहिँ संतो के भय हारी रे हारी।। केकई ने वर मांगा सुनके दशरथ हुए अधीरा रामा।वन में न भेजो मेरे राम को कहते भर भर नीरा रामा। कि हरे रामा दे दो राज भरत को चाहे सारी रे सारी ।हरे

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शबरी

शबरी भील कुमारी ,नव यौवना, श्रमनामतंग ऋषि से मिले ज्ञान को सहेजा तुमने अपने मन मेंअपने चक्षु द्वय बिछा आंगन में सुकुमार धनुर्धारी अयोध्यापति श्रीरामअपनी मृगनयनी ढूंढते पहुंचे तुम्हारे धाम एक – एक बेर तुम तोड़ती रही उम्र भर जिह्वा से रसवादन कर तृप्त होपुलकित मन भरती रही दामन अश्रुपूरित नैनों से प्रतीक्षा हुई परिपूर्ण

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रघुवर तुमको आना होगा

स्वरचित मौलिक रचना –शीर्षक-रघुवर तुमको आना होगा तुलसी बाबा ने दिया दुनियां को सन्देश,सीता का संग चाहिए तो धरो राम का वेष। रमापति राम जी को सर्वप्रथम प्रणाम करते हैं,पुरुषोत्तम राम की महिमा का हम गुणगान करते हैं।। लिया जो नाम रघुवर का,उजाला दिल में भरता है,धधकते मन के शोलों पर, जो शीतल धार बनता

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विधा – भजन

हमको बना दो सेवक किसी काम के लिए।शबरी बना दो हमको श्री राम के लिए।। तुलसी कभी सूर की आंखों के जाल में,तुलसी कभी सूर की आंखों के जाल में ।करते नहीं भेद हम राघव-गोपाल में,करते नहीं भेद हम राघव-गोपाल में।रख लो प्रभु चरणों में अपनेरख लो प्रभु चरणों में अपने आराम के लिए ।।

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