Shri Rammandir Kavya

आया दीपों का त्योहार

आया दीपों का त्योहार*******************आया दीपों का त्यौहार।,मन में खुशियां अपरंपार। । जगमग जगमग दीप जलाओ।, मिट जाए अंधियार आया दीपों का त्यौहार।🌹🌹🌹🌹🌹🌹अवध पुरी में राम पधारे ।,चौदह वर्ष वनों में गुजारे ।लक्षमण,हनुमत मीत सखा सब ।संग खड़े कौशल के द्वारे।।फूलों की मालाएं लेकर ।करें सभी सत्कार ।। आया दीपों का त्यौहार।🌹🌹🌹🌹🌹🌹चुन्नू आओ मुन्नू आओ।,खेल खिलौने […]

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भू_सुता जगजननी सिया जी

*भू_सुता जगजननी सिया जी* प्राण प्रिया श्री राम सिया की, हम यह कथा सुनाने आए हैं।जगजननी की करुण कथा सेनयनों ने अश्रु छलकाए है।। विदेहराज नृप जनक कुमारी,सीता सीत (हल)से जन्मी थी।मां सुनयना की भरने सूनी गोदी,भू कन्या बन अवतरित हुईं थी।। दिव्य रूपिणी, दिव्य परम ये,थी पूर्ण दिव्यता का अवतार।पांच वर्ष की बाल आयु

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गौतम ऋषि का आश्रम आज भी मौन है।

शिला गौतम ऋषि का आश्रम आज भी मौन है।मौन… वैसा ही मौन, जैसा सदियों पहले अहिल्या पर उतारा गया था। अहिल्या! एक अति सुन्दर स्त्री, निर्मल, प्रतिभाशाली पर जब छल हुआ, तो दोष उसका नहीं थाफिर भी श्राप उसी को मिलाउसने एक क्षण में सब कुछ खो दियाअपना स्वर, अपना सम्मान, अपना अस्तित्व।वह जीवित थी,

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सूर्य का प्रकाश, चंद्र सी शीतलता, असीम जैसे आकाश

**प्रभु श्री राम**सूर्य का प्रकाश, चंद्र सी शीतलता, असीम जैसे आकाश,जल सी निर्मलता, वर्ण श्यामल, नयन कमल।चरण चमत्कारी, स्पर्श हितकारी,सर्वशक्तिमान शस्त्रधारी, रूप सहजता जिनकी अनूप।सौम्यता से स्वीकार किया हर कटुता का परिहार,क्षण में वनवासी बने अयोध्या के राजकुमार।विनम्रता से शिथिल किया सागर का अभिमान,साधा असाध्य लहरों को, रचा प्रेम का बांध (सेतु)।जीवन जिनका एक उदाहरण,

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राम नाम जपना लगे, सबको अति आसान।

प्रभु श्री राम का भाव सबकी स्थिति के अनुसार व्यवहार में उतरे इसी कामना के साथ प्रकट विशेष भाव। राम नाम जपना लगे, सबको अति आसान।प्रभो राम गुण भावना, व्यापे अंतर आन।। राम सरीखे सुत बनें, हो भ्रातृत्व स्वभाव।मित्र बनाये भाव से, तजि सब भेद प्रभाव।। जीवन में पालन करें, एक पत्नी व्रत धर्म।संतो को

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राम राज्य फिर आयेगा

१—*राम राज्य फिर आयेगा*सूर्यवंश का सूर्य चमक कर उजियारा फैलायेगा,मुझको है विश्वास धरा पर रामराज्य फिर आयेगा। महकेंगीं गलियां चौबारे दीप आरती चन्दन से। पावन होगा हर घर प्रतिदिन रघुराई के वंदन से।राम तुम्हारे आ जाने से घर मन्दिर हो जायेगा I मुझको है विश्वास धरा पर रामराज्य अब आयेगा I परिवार में प्रीत बढ़ेगी

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श्री राम :११ दोहे

श्री राम :११ दोहे ==========गौर-वर्ण दैदीप्य-मन , अतिशय मृदुल उदार ।दुष्टों के संहार हित, लिए राम अवतार । करुणामय श्री राम हैं, राम-हि तारणहार ।राम सखा हैं, मित्र हैं, राम-हि प्रेम फ़ुहार । केवट से की मित्रता, किया शिला उद्धार ।दण्ड दिया हर दुष्ट को, भक्तों को उपहार । राम नाम की लौ लगी, जिनको

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प्राण प्रतिष्ठा राम की, दिवस मिला है सोम ।

प्राण प्रतिष्ठा राम की, दिवस मिला है सोम ।जयकारो के साथ में, गूँज उठा है व्योम ।।गर्भगृह में रामलला, मंदिर पावन धाम ।दर्शन पाकर धन्य है, ऐसे है प्रभु राम ।।भरत, शत्रुघ्न भ्रात हो, जिससे खुश थे राम ।अनुज लखन भी कम नहीं, भाव रखे निष्काम ।।शबरी आश्रम पर गये, लखन संग श्री राम ।खाये

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सारी दुनिया के प्राण बैठे हैं।

सारी दुनिया के प्राण बैठे हैं।लेके धनु और बाण बैठे हैं।आ के देखो ज़रा अयोध्या में,राम खुद ही प्रमाण बैठे हैं। काम लिखने से कुछ नहीं होगाधाम लिखने से कुछ नहीं होगा राम जैसा भी बनना पड़ता हैराम लिखने से कुछ नही होगासभी तीरथ और धाम की लीला।जानते सब हैं नाम की लीला।दो ही आखर

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श्री रामचन्द्र

श्री रामचन्द्र ——————-दीप प्रज्वलित हो गए सारे ,अवध नगर की गलियों में ।मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,राम चंद्र की बोलियों में ।। हो वन का रस्ता ,राजमहल ,खिवैया सरिता तीरा ।आचरण रहे सदाचार का ,ना होता भाव अधीरा ।।पिता वचन का मान बड़ाया,वनवास लिया झोलियों में ।मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,रामचंद्र की बोलियों में ।। लखन सिया

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