2026-01

भगवान राम

भक्ति और भावना की, लहर चल रही है ।सारी दुनिया आज, “जय श्री राम” कह रही है।। भोगा बरसों का बनवास, कष्ट अपार सहे।सबके आराध्यदेव, प्रभु तंबू में रहे।अवधपति श्री राम, घर-घर में बसे हैं।नव -मंदिर में बिराजे ,सारे भवन सजे हैं।दशरथ- नंदन, रामलला, लक्ष्मण के प्यारे।मर्यादा पुरुषोत्तम, कौशल्या -दुलारे।आस्था और प्रेम की,सरयू बह रही […]

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सिया मुद्रिका हीरे की, राम नीलम नगीना हैं

सिया मुद्रिका हीरे की, राम नीलम नगीना हैं सीता स्वयंवर देखने राम, लक्ष्मण,गुरू विश्वामित्र जनकपुर पधारे हैं,अयोध्या के राजकुमार हैं जानकर नृप जनक ने उचित सत्कार किये हैं। सब भाँति सम्मान अभिनन्दन कर उचित निवास की व्यवस्था करी है,नगर भ्रमण करने हेतु आज्ञा गुरू सेपा अनुज संग जनकपुरी देखी है। प्रात:काल राम लक्ष्मण तहाँ पुष्प

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अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा

विषय :- अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा सदियों की प्रतीक्षा ने आजमाथे पर तिलक सजाया है,आँसू नहीं, आस्था झरती हैहर हृदय ने राम को पाया है। अयोध्या की गलियों में आजइतिहास ने दीप जलाए हैं,वन-वन भटके जिनके चरणवे घर लौटकर मुस्काए हैं। टूटे स्वप्नों की ईंटों सेजो धैर्य ने मंदिर गढ़ा,वो केवल पत्थर नहीं बनावो विश्वास बनकर

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तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है

*राम गीत*तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है राम नाम से ही मिलता उनके, चरणों में मुक्ति धाम है। जग में आकर जीवन में तूने,क्या खोया क्या पाया है देख के दुनिया की चकाचौंध तू,जीवन भर भरमाया है अपना नहीं है कुछ भी यहांँ पर, झूठे जगत के काम हैं।राम नाम ————-

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ध्यान मग्न श्री हनुमानजी

ध्यान मग्न श्री हनुमानजी होकर तन्हा भी बस इतना ध्यान रखते हैं। नज़र के सामने वे करुणा निधान रखते हैं। वन,उपवन ,धरती की हम क्या बात करें- क़दमों के तले वो सारा आसमान रखते हैं। सुंदर काण्ड लिखा गया उनके पराक्रम पर, सीने में छुपा कर हरदम भगवान रखते हैं। हर गाँव,हर गली,नुक्कड़ पर मंदिर

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आया दीपों का त्योहार

आया दीपों का त्योहार*******************आया दीपों का त्यौहार।,मन में खुशियां अपरंपार। । जगमग जगमग दीप जलाओ।, मिट जाए अंधियार आया दीपों का त्यौहार।🌹🌹🌹🌹🌹🌹अवध पुरी में राम पधारे ।,चौदह वर्ष वनों में गुजारे ।लक्षमण,हनुमत मीत सखा सब ।संग खड़े कौशल के द्वारे।।फूलों की मालाएं लेकर ।करें सभी सत्कार ।। आया दीपों का त्यौहार।🌹🌹🌹🌹🌹🌹चुन्नू आओ मुन्नू आओ।,खेल खिलौने

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भू_सुता जगजननी सिया जी

*भू_सुता जगजननी सिया जी* प्राण प्रिया श्री राम सिया की, हम यह कथा सुनाने आए हैं।जगजननी की करुण कथा सेनयनों ने अश्रु छलकाए है।। विदेहराज नृप जनक कुमारी,सीता सीत (हल)से जन्मी थी।मां सुनयना की भरने सूनी गोदी,भू कन्या बन अवतरित हुईं थी।। दिव्य रूपिणी, दिव्य परम ये,थी पूर्ण दिव्यता का अवतार।पांच वर्ष की बाल आयु

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गौतम ऋषि का आश्रम आज भी मौन है।

शिला गौतम ऋषि का आश्रम आज भी मौन है।मौन… वैसा ही मौन, जैसा सदियों पहले अहिल्या पर उतारा गया था। अहिल्या! एक अति सुन्दर स्त्री, निर्मल, प्रतिभाशाली पर जब छल हुआ, तो दोष उसका नहीं थाफिर भी श्राप उसी को मिलाउसने एक क्षण में सब कुछ खो दियाअपना स्वर, अपना सम्मान, अपना अस्तित्व।वह जीवित थी,

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सूर्य का प्रकाश, चंद्र सी शीतलता, असीम जैसे आकाश

**प्रभु श्री राम**सूर्य का प्रकाश, चंद्र सी शीतलता, असीम जैसे आकाश,जल सी निर्मलता, वर्ण श्यामल, नयन कमल।चरण चमत्कारी, स्पर्श हितकारी,सर्वशक्तिमान शस्त्रधारी, रूप सहजता जिनकी अनूप।सौम्यता से स्वीकार किया हर कटुता का परिहार,क्षण में वनवासी बने अयोध्या के राजकुमार।विनम्रता से शिथिल किया सागर का अभिमान,साधा असाध्य लहरों को, रचा प्रेम का बांध (सेतु)।जीवन जिनका एक उदाहरण,

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राम नाम जपना लगे, सबको अति आसान।

प्रभु श्री राम का भाव सबकी स्थिति के अनुसार व्यवहार में उतरे इसी कामना के साथ प्रकट विशेष भाव। राम नाम जपना लगे, सबको अति आसान।प्रभो राम गुण भावना, व्यापे अंतर आन।। राम सरीखे सुत बनें, हो भ्रातृत्व स्वभाव।मित्र बनाये भाव से, तजि सब भेद प्रभाव।। जीवन में पालन करें, एक पत्नी व्रत धर्म।संतो को

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