Shri Rammandir Kavya

हम सब के आदर्श राम

“हम सब के आदर्श राम”भारतीय संस्कृति के आदर्श होत्याग,दया , शौर्य का उत्कर्ष हो किन शब्दों में करूं तुम्हारा वंदनतुम हो अनादि अनंत रघुनंदन।सृष्टि के कण कण में रामजड़ चेतन में व्याप्त राममेरे तन मन जीवन में राम रघुकुल रीति के रक्षक राममंगलकारी लोकरक्षक राम कर्तव्यनिष्ठ वनवासी रामकेवट शबरी जटायु के रामशापित अहिल्या के दयालु […]

हम सब के आदर्श राम Read More »

संगत और कुसंगत

संगत और कुसंगत सुसंगत से बदलता मनुष्य का व्यवहारकुसंगत कर देती मनुष्य का बंटाधार कुसंगत में रहते हुये भी राम प्रेम में लीनविभीषण का राम प्रेम से हुआ बेड़ा पार वाल्मिकी डाकू से बन गया संत महानसुसंगत से जब हुआ अन्तर्मन पे प्रहार तुलसी पत्नी प्रेम में जा पहुँचा ससुरालरामायण लिख डाली जब पड़ी फटकार

संगत और कुसंगत Read More »

राम आधार हैं राम अंजाम हैं

राम आधार हैं राम अंजाम हैंऔर कुछ भी नहीं राम ही राम हैं भोर में राम हैं शाम में राम हैंइस हृदय में बसे नाम में राम हैं राम को छू शिला भी अहिल्या हुईराम हनुमंत की जिद रहे जादुईराम पूजा सदा राम ही धाम हैंऔर कुछ भी नहीं राम ही राम हैं कर्म में

राम आधार हैं राम अंजाम हैं Read More »

आर्यावर्त के राम

आर्यावर्त के राम मर्यादा के पुंज तुम, सनातन का तुम आधार हो, आर्यावर्त की धरती का, तुम ही दिव्य श्रृंगार हो। सरयू की लहरों में गूँजे, सदा तुम्हारी पावन गाथा है, जिसके चरणों में झुकता, संपूर्ण जगत का माथा है। छोड़ सिंहासन सुख, कंटक पथ जिसने चुन लिया,मर्यादा की रक्षा हेतु, वनवास का संकल्प कर

आर्यावर्त के राम Read More »

गीत: अधूरी चिट्ठी

*गीत: अधूरी चिट्ठी* शब्द नहीं थे हाथों में,मन ने फिर भी हाल लिखा,लिखी नहीं थी मैंने चिट्ठी,उसमें खुद ही राम लिखा॥शब्द नहीं थे हाथों में,मन ने फिर भी हाल लिखा,लिखी नहीं थी मैंने चिट्ठी,उसमें खुद ही राम लिखा॥ काग़ज़ मौन, कलम रुकी,आँखों ने एक संवाद रचा,दीप जला और लौ भी काँपी,सुबह ने धीमे अर्थ गढ़ा॥जो

गीत: अधूरी चिट्ठी Read More »

भगवान राम

भक्ति और भावना की, लहर चल रही है ।सारी दुनिया आज, “जय श्री राम” कह रही है।। भोगा बरसों का बनवास, कष्ट अपार सहे।सबके आराध्यदेव, प्रभु तंबू में रहे।अवधपति श्री राम, घर-घर में बसे हैं।नव -मंदिर में बिराजे ,सारे भवन सजे हैं।दशरथ- नंदन, रामलला, लक्ष्मण के प्यारे।मर्यादा पुरुषोत्तम, कौशल्या -दुलारे।आस्था और प्रेम की,सरयू बह रही

भगवान राम Read More »

सिया मुद्रिका हीरे की, राम नीलम नगीना हैं

सिया मुद्रिका हीरे की, राम नीलम नगीना हैं सीता स्वयंवर देखने राम, लक्ष्मण,गुरू विश्वामित्र जनकपुर पधारे हैं,अयोध्या के राजकुमार हैं जानकर नृप जनक ने उचित सत्कार किये हैं। सब भाँति सम्मान अभिनन्दन कर उचित निवास की व्यवस्था करी है,नगर भ्रमण करने हेतु आज्ञा गुरू सेपा अनुज संग जनकपुरी देखी है। प्रात:काल राम लक्ष्मण तहाँ पुष्प

सिया मुद्रिका हीरे की, राम नीलम नगीना हैं Read More »

अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा

विषय :- अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा सदियों की प्रतीक्षा ने आजमाथे पर तिलक सजाया है,आँसू नहीं, आस्था झरती हैहर हृदय ने राम को पाया है। अयोध्या की गलियों में आजइतिहास ने दीप जलाए हैं,वन-वन भटके जिनके चरणवे घर लौटकर मुस्काए हैं। टूटे स्वप्नों की ईंटों सेजो धैर्य ने मंदिर गढ़ा,वो केवल पत्थर नहीं बनावो विश्वास बनकर

अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा Read More »

तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है

*राम गीत*तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है राम नाम से ही मिलता उनके, चरणों में मुक्ति धाम है। जग में आकर जीवन में तूने,क्या खोया क्या पाया है देख के दुनिया की चकाचौंध तू,जीवन भर भरमाया है अपना नहीं है कुछ भी यहांँ पर, झूठे जगत के काम हैं।राम नाम ————-

तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है Read More »

ध्यान मग्न श्री हनुमानजी

ध्यान मग्न श्री हनुमानजी होकर तन्हा भी बस इतना ध्यान रखते हैं। नज़र के सामने वे करुणा निधान रखते हैं। वन,उपवन ,धरती की हम क्या बात करें- क़दमों के तले वो सारा आसमान रखते हैं। सुंदर काण्ड लिखा गया उनके पराक्रम पर, सीने में छुपा कर हरदम भगवान रखते हैं। हर गाँव,हर गली,नुक्कड़ पर मंदिर

ध्यान मग्न श्री हनुमानजी Read More »