श्री राम वंदना!
श्री राम तिहारे चरणों की मैं वंदना करूँ ,
अपनी शरण में लीजिए मैं वंदना करूँ।
जप तप नहीं किया, न कभी पूजा-पाठ ही,
विश्वास, प्रेम-भाव ले आई हूँ साथ ही ।
प्रभु कृपा कर दीजिए मैं वंदना करूँ।
भूल कितनी ही हुईं , कितने हुए हैं मुझसे पाप ,
क्या मुख लेकर आऊँ मैं, कैसे तिहारे पास,
अब मुझको बख्श दीजिए मैं वंदना करूँ ।
सब द्वार बंद हो गए , एक तेरा दर खुला,
लौटा दिया जो तुमने, तो फिर कौन आसरा ।
चरणों में अपने लीजिए, मैं वंदना करूँ।
जर्ज़र ये नाव मेरी, लहरें बहुत मगरूर ,
ग़र तुमने न सम्भाला तो डूबेगी ये ज़रूर
नैया को पार कीजिये, मैं वंदना करूँ ।
कर जोड़कर खड़ी हूँ मैं, तेरे ही द्वार पर,
थामोगे तुम ना हाथ तो, जाऊँगी फिर किधर,
अब तो सम्भाल लीजिए मैं वंदना करूँ ।
इस योग्य तो नहीं थी,जितना मुझे दिया,
सौभाग्य है मेरा जो दर्शन तेरा मिला,
शुकराना मेरा लीजिए मैं वंदना करूँ !
आँखों से बहते अश्रु से चरण पखार लूँ ,
मुखड़ा जो इधर मोड़ लो तुमको निहार लूँ ,
उपकार इतना कीजिए मैं वंदना करूँ।
अंधकूप है ये जग सारा, देता नहीं दिखाई,
दर-दर भटक रही हूँ मिलती न राह कोई,
अब हाथ थाम लीजिए , मैं वंदना करूँ ।
जन्मों से भटक रही हूँ आवागमन में मैं
अब थक गई हूँ इस जीवन मरण में मैं
अब भव से पार कीजिए मैं वंदना करूँ ।
रमा त्यागी “एकाकी”
ग़ाज़ियाबाद
