Shri Rammandir Kavya

* अवध आनंद *

** अवध आनंद ** दशरथ खुश हुएअवध में राम हुए गाजे बाजे बज रहे बनती सुहारी हो। नाच रहे जन-मनअब नहीं कोई ग़मअवध को मिलें हैंअब त्रिपुरारी हो। चारों भाई खेल करेंआपस में प्रेम धरें कैकेयी मां लाड़ करेंसब पर वारी हो। कौशल्या बलाएं करेंसिया राम डोर बंधेचारों भाई ब्याह रचेंसुमित्रा दुलारी हो। राम सिया […]

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त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌।

त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌।आओ हम सब चले अब अवध धाम को ।नाच गाकर मनायेंगे खुशियां वहीं ,मिल रहा है भवन अब मेरे राम को । सैकड़ों वर्ष बीते रहे घर बिना ।पा रहे थे सजा बिन सबब बिन गुना’ह ।एक तिरपाल में दिन गुजारे फकत ,सर की खातिर था सर पर खुला

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कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गया

कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गयाएक धोबी के कहने पर क्यों सीता को घर से निकाला गयासभी मांग रहे थे उत्तर प्रश्न खुद बने थे रामजानते थे पवित्रता सीता की फिर भी चुप खड़े थे रामआने वाली पीढ़ी को उन्हे राजधर्म सिखलाना थाराम सह गए हर दुखक्योंकि राम को राम का

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राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं।

राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं।राम सबके हैं रचयिता राम को कितना रचूं में।। राम को बाहर तलाशापत्थरों को भी तराशा।वन गमन भी कर लिया है पर हृदय है अब भी प्यासा। हैं गढ़ा जिसने सभी को आपको कितना गढ़ूं मैं।राम सबके हैं रचयिता राम को कितना रचूं में।। भक्ति की

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राम-राजअब लाना होगा

“राम-राजअब लाना होगा” ‌ ***************** प्राण-प्रतिष्ठा हो गई अवध मेंप्रकाश नवल फैलाना होगा। राम – राज्य को पुनर्जन्म दे, जग को स्वर्ग बनाना होगा।। राम-राज अब लाना होगा ।।* * *अधर्म फैल रहा जो निशदिन, जड़ से उसे मिटाना होगा। डगमग-डगमग नाव धर्म की,मिलकर पार लगाना होगा। राम राज अब————-! * * * पाप पनपते

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युगों का काट कर वनवास

*गीत* युगों का काट कर वनवास,आए धाम,वंदन है।प्लावित मन है भावों से,मेरे श्री राम,वंदन है। चरण में शीश धर उनके,हमे निष्पाप होना है।पकड़ लें हाथ वे बढ़कर,हृदय से ऐसे रोना है।हमे करने यहांँ आए,प्रभु निष्काम,वंदन है। सकल ब्रह्मांड हर्षित है,कण-कण जाप करता है।ये पावन नाम है ऐसा,सभी संताप हरता है।त्रेता आया कलयुग में,प्रतापी नाम,वंदन है।

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श्री राम वंदना!

श्री राम वंदना! श्री राम तिहारे चरणों की मैं वंदना करूँ ,अपनी शरण में लीजिए मैं वंदना करूँ। जप तप नहीं किया, न कभी पूजा-पाठ ही,विश्वास, प्रेम-भाव ले आई हूँ साथ ही ।प्रभु कृपा कर दीजिए मैं वंदना करूँ। भूल कितनी ही हुईं , कितने हुए हैं मुझसे पाप , क्या मुख लेकर आऊँ मैं,

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अवध में आज आएंगे रघुराई

अवध में आज आएंगे रघुराईभरत जी कर रहे अगुवाई।पीछे आती तीनों माताएं, औरखुशी से उनकी आंखें भर आई।अवध में आएंगे —— प्रजाजन सब पीछे आए।सुहागिनों ने मंगल गाए।घरों में बंदनवार सजाए।सबके मन मुदित हो आए।अवध में आएंगे ——- जाने क्या सोचेंगे रामजी,क्या सोचेंगे लक्ष्मण भाई।जब देखेंगे उर्मिला मां कीफीका चेहरा और आंखें पथराई।अवध में आएंगे

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आ गये देखो श्री राम आ गये

आ गये देखो श्री राम आ गये राममय हुआ जग साराअवध में हर और हुआ उजियाराभीग रही थी पलकें कबसेआज लगा लो मिल जयकारा आ गये देखो श्री राम आ गये हो रहें सब नाम में लीनछंट गया मौसम सब गमगीनहौले-हौले जब श्री राम पधारेंदेखो रुप कितना है शालीन आ गये देखो श्री राम आ

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राम का सुमिरन करो (हरि गीतिका छंद)

राम का सुमिरन करो (हरि गीतिका छंद) मन हो रहा व्याकुल कभी जो, राम का सुमिरन करो।हरते सभी वे कष्ट जन के, तुम किसी से मत डरो।।हनुमान जैसे भक्त बन कर, छवि हृदय में तुम धरो।फिर दरश श्री रघुनाथ के हों, जन्म मनु सार्थक करो।। मन हो रहा व्याकुल कभी जो, राम का सुमिरन करो….

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