ऐसी थी उर्मिला!
ऐसी थी उर्मिला!——————— प्रियप्रवास की ध्वनि जब,गुंजित उर्मिला के श्रुतिपट,भाव विह्वल हो दौड़ पड़ी,गिर पड़ी पति – पग झट! कहा, हे प्रिय प्राणधार !मैं भी कानन चलूंगी साथ,दीया बिन कैसे जलेगी,बाती, चिर निरंतर नाथ! कहा सौमित्र,हे सुनो कलत्र!तुम बिन हृदय अति विरक्त,पर, संग कैसे वन चलोगी,प्रासाद का चहूँ छोर रिक्त! पुत्र वियोग संतप्त मातृ को, […]









