Shri Rammandir Kavya

ऐसी थी उर्मिला!

ऐसी थी उर्मिला!——————— प्रियप्रवास की ध्वनि जब,गुंजित उर्मिला के श्रुतिपट,भाव विह्वल हो दौड़ पड़ी,गिर पड़ी पति – पग झट! कहा, हे प्रिय प्राणधार !मैं भी कानन चलूंगी साथ,दीया बिन कैसे जलेगी,बाती, चिर निरंतर नाथ! कहा सौमित्र,हे सुनो कलत्र!तुम बिन हृदय अति विरक्त,पर, संग कैसे वन चलोगी,प्रासाद का चहूँ छोर रिक्त! पुत्र वियोग संतप्त मातृ को, […]

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आधार छंद – दुर्मिल/श्रीपद सवैया

आधार छंद – *दुर्मिल/श्रीपद सवैया* यशवान बने मुख राम कहे नित ध्यान सदा गुणगान करे।सिय राम प्रकाश भरे उर में तब होत कृपा मन ध्यान धरे।।प्रभु आप दयानिधि सागर हो रखलो अब लाज सुजान हरे ।।इस जीवन के तुम राम सदा हृदय में सबके हनुमान धरे।। रघुनंदन नाम सदा शुभ पालन श्री तुम ही भयनाशन

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गीत हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।

गीत हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।रावण हैं यहां अनगिन, संताप मिटा जाओ। दुखियारी अयोध्या है, दुखियारे जन सारे।खर, दूषण घर घर में, सब मात पिता हारे।सरयू के पानी में किसने लोहू घोला?लाशों से पाट दिया, कर कर छलनी मारे।रोती हैं जो माताएं, कुछ न्याय दिला जाओ।…… हे राम असुरों के रूप

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तुम भी आओ

तुम भी आओ —–++++ राम चले पड़े वन से ,बस अब लगे पहुंचनेराजपथ को सजाओ-बिछाओ पलक पांवड़े द्वार तोरण सजाओ_ सुहागिनों गीत मंगल के गाओ।मंगल कलश लगाओ द्वार नगाड़े बजाओ कि—-लौट रहे राम घर मेरे -आओ तुम भी आओ। आज मिट्टी हुई चंदन उसे माथे लगाओस्वप्न जितने थे आंखों में आज उनको जगाओ।कहो केवट से

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🌺 हमारे राम 🌺

🌺 हमारे राम 🌺————- भटक रहा है इत उत, अपने मन को नही खगालारहते वक़्त फेर ले मूरख, राम नाम का माला, गूंज रही सम्पूर्ण जगत में, राम नाम की बानीवही पास उन्मुक्त़ बहे सरयू नदियाँ का पानीदिव्य दरस मिल जाए जिसको, हो जाए मतवालारहते वक्त फेर ले मूरख, राम नाम का माला, 🌱 शंख

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मेरे राम***

मेरे राम***रग- रग में रमण, करने वाले,हर क्षण, करुणा करने वाले,उन प्रभु, राम को नमन मेरा,वंदन, और अभिनंदन मेरा,!! जनम- जनम के बंधन, काटे,भक्तों, में विश्वास भरा ,भक्ती, से शक्ति, प्राप्त हुई, मन पल में हो गया हरा-भरा,उनके रजधूलि, के दर्शन से,जीवन, हो गया है धन्य मेरा,उन प्रभु राम को नमन मेरा,वंदन, और अभिनंदन मेरा,!!

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“राम मंदिर शिखर पर धर्मध्वज”

*”राम मंदिर शिखर पर धर्मध्वज”* शुभदिन मंगलवार भारतवर्ष का- आज ऐतिहासिक,मोदी अयोध्या राम मंदिर शिखर पर धर्मध्वज फहराए।१६१ फीट मंदिर शिखर पर २२ फीट का ध्वज फहराए।४२ फूट का ध्वजदंड, ३६०° घूर्णन बियरिंग तंत्र लगाए।इस मौके पर साथ योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख आए।ये ध्वज कभी त्रेतायुग में अयोध्या में लहरा कर फहरा,आज फिर से आंँखों

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“अयोध्या नगरी में बाजे बधाई”

“अयोध्या नगरी में बाजे बधाई” हुआ विश्व अभिभूत श्रीराम के आने पर अयोध्या में खुशी छाई।हर एक घर- आंगन में, उमंग भर-भर खुशियां सबके मन लाई।राजा दशरथ आनन्द मगन हुए, माताएं भी मिल खुशी मनाएं।सभी लोग वशिभूत हुए मंगल गीत गाए खुशियां घर घर छाई।।देखो राम के आने से रघुकुल में हर्षोउल्लास सर्वत्र छाया।दीपक जले

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राम गमन पथ यात्रा (कविता)

राम गमन पथ यात्रा (कविता) जब वन को चले थे राम,त्याग कर सुख साधन के धाम प्रकृति मुस्कुराई ,धन्य रघुराई ! जटा जुट को मुकुट विराजे,केसरिया या के भाल पे साजे ,धारण वल्कल वस्त्र, हाथ में शास्त्र,संग में, जानकी माई चले, पीछे लक्ष्मण भाई संग भवरे गुन गुनजार करे,और ठंडी सुगंधित वियार चले,गावे मोर पपीहा

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अशोक वाटिका में सीता

अशोक वाटिका में सीता :- कैसे धरूँ मैं धीर नाथ अब कैसे धरूँ मैं धीर याद तुम्हारी मोहे तड़पावेआ जाओ रघुबीर नाथ अब कैसे धरूँ मैं धीर..!! तुम बिन राघव चित न लागे पथराए नैना ये जागे पाँव पड़ी ज़ंजीर नाथ अब कैसे धरूँ मैं धीर..!! राह तुम्हारी देखूं निस दिन नैन मेरे अब काजल

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