तुम भी आओ
तुम भी आओ —–++++ राम चले पड़े वन से ,बस अब लगे पहुंचनेराजपथ को सजाओ-बिछाओ पलक पांवड़े द्वार तोरण सजाओ_ सुहागिनों गीत मंगल के गाओ।मंगल कलश लगाओ द्वार नगाड़े बजाओ कि—-लौट रहे राम घर मेरे -आओ तुम भी आओ। आज मिट्टी हुई चंदन उसे माथे लगाओस्वप्न जितने थे आंखों में आज उनको जगाओ।कहो केवट से […]









