* अवध आनंद *
** अवध आनंद ** दशरथ खुश हुएअवध में राम हुए गाजे बाजे बज रहे बनती सुहारी हो। नाच रहे जन-मनअब नहीं कोई ग़मअवध को मिलें हैंअब त्रिपुरारी हो। चारों भाई खेल करेंआपस में प्रेम धरें कैकेयी मां लाड़ करेंसब पर वारी हो। कौशल्या बलाएं करेंसिया राम डोर बंधेचारों भाई ब्याह रचेंसुमित्रा दुलारी हो। राम सिया […]









