Shri Rammandir Kavya

अयोध्या की छवि निराली है

इस कविता में देखिए कैसे अयोध्या वासियों के साथ-साथ देवता और प्रकृति भी *रामलला के जन्म* की खुशियां मना रहे हैं. इस कविता की विशेषता है कि इसमें हिंदी के सभी वर्ण- स्वर और व्यंजन क्रम से तो आए ही हैं, पांचो वर्ग (कचटतप) भी अलग-अलग, एक दृश्य का वर्णन करते हैं *अ* योध्या की […]

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रघुनंदन के रघुराई

अवध में राम पधारे थे,लहर खुशियों की छाई थी।सलोना देख कर मुखड़ा,आंख मां की भर आईं थी।।स्वर्ग से खुश हो देवों ने,पुष्प उन पर बरसाए थे।सभी के मन हर्षाए थे,पिता फूले ना समाए थे।।ना रघुवर सा हुआ बेटा,ना उन जैसा है अब भाई।नहीं ढूंढे मिले तुमको,रघुनंदन सा रघुराई।।बने वो त्याग की प्रतिमा,हर कर्तव्य निभाएं थे।वचन

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है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है

है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है,सूरज की किरणे शांत हो रही, उफ़न समंदर आता है,पलकों पे ठहरे दो अश्रु, बहने की आज्ञा मांग रहे,सिया विरह का राम प्रभु, खुद को ही दोषी जान रहे, कैसे शत्रु का नाश करें, प्रसन्न करें कैसे शिव को,ना सामग्री सब पूजा की, पुरोहित

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राम का आगमन

राम का आगमन“””””””””””””””” अयोध्या नगरी गूंझ उठीराम के जयकारों सेपुलकित हुई सारी जनताढोल ताशे नगारों से विजय पताका लहरायेभारत के हर प्रांगन मेंराम-राज्य की कल्पनाजाग उठी गलियारों में देवताओं की लीला से पुनःमन कंवल खिल आया प्रभु की लीला न्यारीजन जन को हरशाया अंकित मानस पटल परतारे आकाश मे जैसे धरोहर सदियों की पुनः प्राप्त

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ग़ज़ल 🌹

ग़ज़ल 🌹 चलो त्योहार मिलकर रामनवमी का मनाते हैं जगत ख़ुशहाल होगा आस भगवन से लगाते हैं नज़र आने लगे रावन ही रावन आज धरती पर चलो मिलकर सभी हम राम को वापस बुलाते हैं करे ये रूह पावन आज हम अच्छे विचारों सेचलो अभियान अब तो राम होने का चलाते हैं धरा पर फिर

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रामहि राम हमारे मन बसिया

रामहि राम हमारे मन बसिया ====================रामहि राम हमारे मन बसिया हो रामहि राम हमारे मन बसियारामहि राम हमारे मन बसिया हो रामहि राम हमारे मन बसिया अंखिया कहै हम दरशन करिबै हो अंखिया कहै हम दरशन करिबै देखबै सलोनी सुरतिया हो मन बसिया रामहि राम हमारे मन बसियाहो रामहि राम हमारे मन बसिया मुंहवा कहै

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🙏 राम मिलण रो भजन 🙏

🙏 राम मिलण रो भजन 🙏 “म्हाने राम मिलण रो कोड लग्यो गुरुवर…” म्हाने राम मिलण रो कोड लग्यो गुरुवर,मन रो घोड़ो छूट्यो सावरिया रे।अँखियों सूं बरसै पियासी बरखा,राम नाम री झड़ी लागी आज रे॥ रोम रोम में राम बसे म्हारे,श्वास श्वास में वस्या ध्यान रे।मंदिर री सीढ़ी पर बणसी आसो,कदम-कदम पर थारे परभु ज्ञान

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राम नाम कलयुग का अमृत

गीत :- राम नाम कलयुग का अमृत,पीने वाला तर जाताबेशक हो तूफाँ में नैया,परली पार उतर जाता राम नाम के बल से ही तो,जल में पत्थर तैर गयेबनी शिला भी अद्भुत नारी,जब रघुवर के पैर लगेराम नाम के बल से हनुमत ,सूरज मुख में भर जाताराम नाम कलयुग का अमृत,पीने वाला तर जाता,,, दिल से

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राम एकल गीत भी हैं

श्री राम गीत राम एकल गीत भी हैं, राम एकल तान भी,राम एकल देह भी हैं, राम एकल प्राण भी, राम केवट को थे तारे, बन तपस्वी वन बुहारे,मां अहिल्या को उभारा, शबरी का जीवन सँवारे,राम भवसागर खिवैया, राम एकल दान भी,राम एकल देह भी हैं, राम एकल प्राण भी,राम एकल गीत भी हैं… राम

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राम बसे चहुँ-ओर

राम बसे चहुँ-ओर मगर हम ढूँढे अपने अंदर राम शायद हो पाएँगे हमसे फिर थोड़े से बेहतर कामलोग कई हैं ख़ास यहाँ पर लेकिन अपना ईश्वर आमयाद जिसे कर सकते हैं बिन जाए कहीं बिन देकर दाम हर मन पावन हर दिल निर्मल हर घर हो इक सुंदर धामकाश सँवर जाए ये दुनिया काश चराग़ां

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