Shri Rammandir Kavya

मिलता है मन को आराम।

केवल जिनके सुमिरन से ही,मिलता है मन को आराम।क्या तेरे क्या मेरे वे हैं,सबके घट-घट वासी राम॥ राम-रमापति जपता जा तू,क्यूँ घबराता है नादान।वे सारे जग के स्वामी हैं,वे रखते हैं सबका ध्यान॥ सबकुछ उन पर छोड़ो प्यारे,कर्म किये जाओ निष्काम।क्या तेरे क्या मेरे वे हैं,सबके घट-घट वासी राम॥ और भला क्या माँगू तुमसे,बस इतना […]

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राम राम सब बोलिये

जयश्रीराम सुमरिन दिल से जो करें,बनते उनके कामराम राम सब बोलिये ,जय जय हो श्रीराम राम लखन औ जानकी,चले गये बनवासराक्षस का संहार कर, रोका यहां विनाशदर्श राम के जो करे,पा जाता सुख धामसुमरिन दिल से जो करे,बनते उनके काम मिलन हुआ बजरंग से,चिंता हो गईं दूर जंगल में सुग्रीव ने,साथ दिया भरपूर,शरण विभिषण आ

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राम जन्म

शीर्षक – राम जन्म राम जन्म की बेला में मन खो गया ।प्रभु चरणों का दर्शन मुझको हो गया।। मां कौशल्या ने जब उपकार किया।प्रभु ने देखो अवधपुरी अवतार लिया।। दशरथ जी का खुशी से उत्सव हो गया। 1 राम जन्म का तोहफा देखो आज मिला । अवधपुरी को एक नया युवराज मिला ।।जनता को

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भक्त के वश में भगवान्

(((((( भक्त के वश में भगवान् )))))) एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था।एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम मेँ आया और बोला के बाबा आप सबका ध्यान रखते हैं।मेरा इस दुनिया मेँ कोई नहीं है।तो क्या मैँ यहाँ आपके आश्रम में रह सकता हूँ ?बालक की बात सुनकर संत बोले बेटा

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मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम”

मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम” राम तुम्हारे अंतर्मन में कितना अंतर्द्वंद मचा थाजब कैकयी माता ने खुद हीत्रासदियों का व्यूह रचा था अद्भुत पीड़ा दबी हुई थी तेरे कोमल कोमल श्यामल तन मेंनिर्विकार वाणी थी मुखरितपर कितनी दुविधा थी मन में मुँह से फिर भी प्रेम वाक्य ही सदा मधुर तुमने बोले थेमानव होकर अति मानव के

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राम भक्त हनुमान

राम भक्त हनुमान राम भक्त हनुमान ने ,किया प्रभु का ध्यान ।दरस दिए श्रीराम ने ,रखा भक्त का मान ।। राम का भक्त बजरंगबली सा ,कोई दूजा नहीं देखा भाला।मुझे चरणों का सेवक बना लो,केसरी अंजनी मां के लाला।।….) राम वन से अवध लौटाए ,मिलकर सिंहासन बिठाए ।भक्त विभीषण भी खुशियां मनाएं ,भेंट सीता को

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प्रभु राम

प्रभु राम राक्षसो को मारने के लिए घूमें जंगलों में,केवट का मिला उनको अपार प्यार था।चौदह बरस का मिला था उन्हें बनवास,मारकर दानवों को किया उपकार था।रावण का वध करने के लिए राम जी ने,किया दसकंधर पे भीषण प्रहार था।लखन व जानकी को सकुशल लाए घर,धरा को बचाया किया दुष्टों का संहार था।। भगवान राम

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श्री राम,श्री राम रटते रहेंगे

“श्री राम श्री राम “* श्री राम,श्री राम रटते रहेंगेसदा संकटों से भी,बचते रहेंगे।। करेंगे हमेशा,तुम्हारी ही पूजातेरा नाम ले कर,सँवरते रहेंगे।। जपेंगे इसी नाम की,हम तो मालागुरू मंत्र है,हम निखरते रहेंगे।। बनेंगे तुम्हारे ही,सेतु का पत्थरतेरा नाम ले कर,ही तरते रहेंगे।। है संसार गहरा, दुःखों का ही सागरभँवर से हमेशा, निकलते रहेंगे।। मिटाएँगे मन

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अवधनरेश हे प्रभु राम

‘राम’अवधनरेश हे प्रभु राम ,दशरथनन्दन राघव राम!कौशल्यासुत राजा राम,सबके हो परमेश्वर राम।ऋषियों की रक्षा करने को,दुखियों के कष्ट मिटाने को!संस्कृति के रक्षण-पोषण को,जनता के हित-चिन्तन को।तुमने अवध में जन्म लिया,भरत-भूमि को धन्य किया!दुष्टों का संहार किया,स्वप्नों को साकार किया।तुम्हें पाकर हम धन्य हुये,पुण्य हमारे उदय हुये !धर्मध्वजा फहराये तुम,पुरुषोत्तम कहलाये तुम।शत-शत नमन हे राम तुम्हें,अग-जग

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प्रभु श्री राम की महिमा

प्रभु श्री राम की महिमा मॉं कौशल्या के प्यारे राम, दशरथ राज दुलारे राम । हम सबके हैं प्यारे राम, बोलिए जय जय श्री राम । ताड़का को मारे राम, अहिल्या को तारे राम । मर्यादा पुरुषोत्तम राम, बोलिए जय जय श्री राम । बाली को मारे राम, सुग्रीव को तारे राम । मर्यादा पुरुषोत्तम

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