मिलता है मन को आराम।
केवल जिनके सुमिरन से ही,मिलता है मन को आराम।क्या तेरे क्या मेरे वे हैं,सबके घट-घट वासी राम॥ राम-रमापति जपता जा तू,क्यूँ घबराता है नादान।वे सारे जग के स्वामी हैं,वे रखते हैं सबका ध्यान॥ सबकुछ उन पर छोड़ो प्यारे,कर्म किये जाओ निष्काम।क्या तेरे क्या मेरे वे हैं,सबके घट-घट वासी राम॥ और भला क्या माँगू तुमसे,बस इतना […]
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