जब अयोध्या झिलमिलायी दियो से
जब अयोध्या झिलमिलायी दियो से झिलमिल तारों सी,उर्मिला के अचेत मन को मिल गयी संजीवनी। मन के सूने गाँव में दिए हज़ारो जल गए,बिरहा की होली जली और यूँ दिवाली हो गयी। एक तरफ तड़पे है केकई बावरी से घूमती,एक तरफ है मंथरा निरभाग खुद को कोसती,अपने अपने हिस्से के संताप सबने सह लिए,बिरहा की […]
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