त्यागकर काज को छोड़कर काम को ।
त्यागकर काज को छोड़कर काम को ।आओ हम सब चले अब अवध धाम को ।नाच गाकर मनायेंगे खुशियां वहीं ,मिल रहा है भवन अब मेरे राम को । सैकड़ों वर्ष बीते रहे घर बिना ।पा रहे थे सजा बिन सबब बिन गुना’ह ।एक तिरपाल में दिन गुजारे फकत ,सर की खातिर था सर पर खुला […]
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