2026-01

त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌।

त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌।आओ हम सब चले अब अवध धाम को ।नाच गाकर मनायेंगे खुशियां वहीं ,मिल रहा है भवन अब मेरे राम को । सैकड़ों वर्ष बीते रहे घर बिना ।पा रहे थे सजा बिन सबब बिन गुना’ह ।एक तिरपाल में दिन गुजारे फकत ,सर की खातिर था सर पर खुला […]

त्यागकर काज को छोड़कर काम को ‌। Read More »

कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गया

कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गयाएक धोबी के कहने पर क्यों सीता को घर से निकाला गयासभी मांग रहे थे उत्तर प्रश्न खुद बने थे रामजानते थे पवित्रता सीता की फिर भी चुप खड़े थे रामआने वाली पीढ़ी को उन्हे राजधर्म सिखलाना थाराम सह गए हर दुखक्योंकि राम को राम का

कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गया Read More »

राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं।

राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं।राम सबके हैं रचयिता राम को कितना रचूं में।। राम को बाहर तलाशापत्थरों को भी तराशा।वन गमन भी कर लिया है पर हृदय है अब भी प्यासा। हैं गढ़ा जिसने सभी को आपको कितना गढ़ूं मैं।राम सबके हैं रचयिता राम को कितना रचूं में।। भक्ति की

राम पर कितना लिखूं मैं राम को कितना पढूं मैं। Read More »

राम-राजअब लाना होगा

“राम-राजअब लाना होगा” ‌ ***************** प्राण-प्रतिष्ठा हो गई अवध मेंप्रकाश नवल फैलाना होगा। राम – राज्य को पुनर्जन्म दे, जग को स्वर्ग बनाना होगा।। राम-राज अब लाना होगा ।।* * *अधर्म फैल रहा जो निशदिन, जड़ से उसे मिटाना होगा। डगमग-डगमग नाव धर्म की,मिलकर पार लगाना होगा। राम राज अब————-! * * * पाप पनपते

राम-राजअब लाना होगा Read More »

युगों का काट कर वनवास

*गीत* युगों का काट कर वनवास,आए धाम,वंदन है।प्लावित मन है भावों से,मेरे श्री राम,वंदन है। चरण में शीश धर उनके,हमे निष्पाप होना है।पकड़ लें हाथ वे बढ़कर,हृदय से ऐसे रोना है।हमे करने यहांँ आए,प्रभु निष्काम,वंदन है। सकल ब्रह्मांड हर्षित है,कण-कण जाप करता है।ये पावन नाम है ऐसा,सभी संताप हरता है।त्रेता आया कलयुग में,प्रतापी नाम,वंदन है।

युगों का काट कर वनवास Read More »