ध्यान मग्न श्री हनुमानजी

ध्यान मग्न श्री हनुमानजी

होकर तन्हा भी बस इतना ध्यान रखते हैं।

नज़र के सामने वे करुणा निधान रखते हैं।

वन,उपवन ,धरती की हम क्या बात करें-

क़दमों के तले वो सारा आसमान रखते हैं।

सुंदर काण्ड लिखा गया उनके पराक्रम पर,

सीने में छुपा कर हरदम भगवान रखते हैं।

हर गाँव,हर गली,नुक्कड़ पर मंदिर है इनके,

कई शहर भी इनसे अपनी पहचान रखते हैं।

सामने खड़ाऊ रख चरण वंदना दिन रात करें,

नहीं अपने बल का कभी अभिमान रखते हैं।

हम बिठा के रखते हैं उन्हें अपने दिलो जां पर,

किताबों में तस्वीर उनकी बच्चे नादान रखते हैं।

क्या फूल क्या पत्ते क्या दीप धूप और बाती यहाँ,

अर्पित कर सर्वस्व गरीब और धनवान रखते हैं।

आदित्य गुप्ता
गरियाबंद
छत्तीसगढ़
( सर्वाधिकार सुरक्षित)