2026-01

राम राज्य फिर आयेगा

१—*राम राज्य फिर आयेगा*सूर्यवंश का सूर्य चमक कर उजियारा फैलायेगा,मुझको है विश्वास धरा पर रामराज्य फिर आयेगा। महकेंगीं गलियां चौबारे दीप आरती चन्दन से। पावन होगा हर घर प्रतिदिन रघुराई के वंदन से।राम तुम्हारे आ जाने से घर मन्दिर हो जायेगा I मुझको है विश्वास धरा पर रामराज्य अब आयेगा I परिवार में प्रीत बढ़ेगी […]

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श्री राम :११ दोहे

श्री राम :११ दोहे ==========गौर-वर्ण दैदीप्य-मन , अतिशय मृदुल उदार ।दुष्टों के संहार हित, लिए राम अवतार । करुणामय श्री राम हैं, राम-हि तारणहार ।राम सखा हैं, मित्र हैं, राम-हि प्रेम फ़ुहार । केवट से की मित्रता, किया शिला उद्धार ।दण्ड दिया हर दुष्ट को, भक्तों को उपहार । राम नाम की लौ लगी, जिनको

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प्राण प्रतिष्ठा राम की, दिवस मिला है सोम ।

प्राण प्रतिष्ठा राम की, दिवस मिला है सोम ।जयकारो के साथ में, गूँज उठा है व्योम ।।गर्भगृह में रामलला, मंदिर पावन धाम ।दर्शन पाकर धन्य है, ऐसे है प्रभु राम ।।भरत, शत्रुघ्न भ्रात हो, जिससे खुश थे राम ।अनुज लखन भी कम नहीं, भाव रखे निष्काम ।।शबरी आश्रम पर गये, लखन संग श्री राम ।खाये

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सारी दुनिया के प्राण बैठे हैं।

सारी दुनिया के प्राण बैठे हैं।लेके धनु और बाण बैठे हैं।आ के देखो ज़रा अयोध्या में,राम खुद ही प्रमाण बैठे हैं। काम लिखने से कुछ नहीं होगाधाम लिखने से कुछ नहीं होगा राम जैसा भी बनना पड़ता हैराम लिखने से कुछ नही होगासभी तीरथ और धाम की लीला।जानते सब हैं नाम की लीला।दो ही आखर

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श्री रामचन्द्र

श्री रामचन्द्र ——————-दीप प्रज्वलित हो गए सारे ,अवध नगर की गलियों में ।मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,राम चंद्र की बोलियों में ।। हो वन का रस्ता ,राजमहल ,खिवैया सरिता तीरा ।आचरण रहे सदाचार का ,ना होता भाव अधीरा ।।पिता वचन का मान बड़ाया,वनवास लिया झोलियों में ।मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,रामचंद्र की बोलियों में ।। लखन सिया

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ऐसी थी उर्मिला!

ऐसी थी उर्मिला!——————— प्रियप्रवास की ध्वनि जब,गुंजित उर्मिला के श्रुतिपट,भाव विह्वल हो दौड़ पड़ी,गिर पड़ी पति – पग झट! कहा, हे प्रिय प्राणधार !मैं भी कानन चलूंगी साथ,दीया बिन कैसे जलेगी,बाती, चिर निरंतर नाथ! कहा सौमित्र,हे सुनो कलत्र!तुम बिन हृदय अति विरक्त,पर, संग कैसे वन चलोगी,प्रासाद का चहूँ छोर रिक्त! पुत्र वियोग संतप्त मातृ को,

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आधार छंद – दुर्मिल/श्रीपद सवैया

आधार छंद – *दुर्मिल/श्रीपद सवैया* यशवान बने मुख राम कहे नित ध्यान सदा गुणगान करे।सिय राम प्रकाश भरे उर में तब होत कृपा मन ध्यान धरे।।प्रभु आप दयानिधि सागर हो रखलो अब लाज सुजान हरे ।।इस जीवन के तुम राम सदा हृदय में सबके हनुमान धरे।। रघुनंदन नाम सदा शुभ पालन श्री तुम ही भयनाशन

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गीत हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।

गीत हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।रावण हैं यहां अनगिन, संताप मिटा जाओ। दुखियारी अयोध्या है, दुखियारे जन सारे।खर, दूषण घर घर में, सब मात पिता हारे।सरयू के पानी में किसने लोहू घोला?लाशों से पाट दिया, कर कर छलनी मारे।रोती हैं जो माताएं, कुछ न्याय दिला जाओ।…… हे राम असुरों के रूप

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तुम भी आओ

तुम भी आओ —–++++ राम चले पड़े वन से ,बस अब लगे पहुंचनेराजपथ को सजाओ-बिछाओ पलक पांवड़े द्वार तोरण सजाओ_ सुहागिनों गीत मंगल के गाओ।मंगल कलश लगाओ द्वार नगाड़े बजाओ कि—-लौट रहे राम घर मेरे -आओ तुम भी आओ। आज मिट्टी हुई चंदन उसे माथे लगाओस्वप्न जितने थे आंखों में आज उनको जगाओ।कहो केवट से

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🌺 हमारे राम 🌺

🌺 हमारे राम 🌺————- भटक रहा है इत उत, अपने मन को नही खगालारहते वक़्त फेर ले मूरख, राम नाम का माला, गूंज रही सम्पूर्ण जगत में, राम नाम की बानीवही पास उन्मुक्त़ बहे सरयू नदियाँ का पानीदिव्य दरस मिल जाए जिसको, हो जाए मतवालारहते वक्त फेर ले मूरख, राम नाम का माला, 🌱 शंख

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