राम नाम कलयुग का अमृत

गीत :-

राम नाम कलयुग का अमृत,पीने वाला तर जाता
बेशक हो तूफाँ में नैया,परली पार उतर जाता

राम नाम के बल से ही तो,जल में पत्थर तैर गये
बनी शिला भी अद्भुत नारी,जब रघुवर के पैर लगे
राम नाम के बल से हनुमत ,सूरज मुख में भर जाता
राम नाम कलयुग का अमृत,पीने वाला तर जाता,,,

दिल से कोई याद करे ये,दौडे-दौडे आते हैं
धन्ना जाट सुदामा शबरी,सबकी लाज़ बचाते हैं
ये नरसी का बन गढ़वाला,भात अनोखा भर जाता
राम नाम कलयुग का अमृत,पीने वाला तर जाता,,,

नरक कुण्ड से बचना है तो,बस इतना सा जतन करो
बुरे कर्म सब तज कर प्यारे ,राम नाम का भजन करो
नहीं थामते राम ‘जगन’ को ,कब का टूट बिखर जाता
राम नाम कलयुग का अमृत,पीने वाला तर जाता,,,

संदीप जगन