है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है
है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है,सूरज की किरणे शांत हो रही, उफ़न समंदर आता है,पलकों पे ठहरे दो अश्रु, बहने की आज्ञा मांग रहे,सिया विरह का राम प्रभु, खुद को ही दोषी जान रहे, कैसे शत्रु का नाश करें, प्रसन्न करें कैसे शिव को,ना सामग्री सब पूजा की, पुरोहित […]
है घोर विषय की चिंता मे, श्री हरी शिला पे बैठे है Read More »







