Shri Rammandir Kavya

जय हो राम राम राम

जय हो राम राम राम # रामलला जी आ गए आज अयोध्या धामबोलो राम राम राम बोलो राम राम रामदर्शन करने को चलो छोड़ छाड़ सब कामबोलो राम राम राम बोलो राम राम राम कर सरजू का स्नान सभीभव सागर से तर कर जाएंगेराम लला के श्री चरणों मेंजाकर शीश नवाएंगेउनकी दया से बन जाएंगे […]

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हे राम! तुम्हारा वंदन है

हे राम! तुम्हारा वंदन है धूप दीप से थाल सजाया जिसमें रोली कुंकुम चंदन है।देवों की इस पुण्य धरा पर फिर से राम तुम्हारा वंदन है।हे राम! पुनः तुम आकर देखोस्नेह लक्ष्मण- सा नहीं दिखताचरण पादुका सिर रखने वालाभाई भरत- सा नहीं दिखतापवित्रता कहाँ अब सीता जैसी शबरी – सा प्रेम नहीं दिखतामित्रता कहाँ सुग्रीव

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भक्ति गीत

भक्ति गीत जन-जन मन में दीप जला कर,राम नाम उजास भरो।भाव-भरी जीवन नौका को,हे रघुनंदन पार करो।। मोह माया काँटे पथ बिखरे,मन भरमा जाता है।राग द्वेष से भरा हृदय मम, लोभी हो जाता है। सत्य-धर्म की राह दिखाकर,संशय मेरे सभी हरो। भाव-भरी जीवन नौका को,हे रघुनंदन पार करो।। दुख की रेखा, संशय-छाया,सब तुम ही हरते

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प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।

सादर समीक्षार्थ,पञ्चचामर छंद (श्रीराम)(121 212 121 212 121 2) प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।सुधा मयूख-रेख में सजी सुरम्य शान है॥प्रसून-वृष्टि-व्योम से सुमोद का वितान है।निनाद-नाद-बाल-रूप में प्रफुल्ल मान है॥ पिनाक-भंग-नाद से दिगंत गूँजमान है।सिया विवाह राम संग शुभ्रता-विधान है॥विदेह-धाम-मध्य में प्रमोद-पूर्ण स्थान है।विवाह सर्व भ्रात से छटा अनूप शान है॥ निषाद-राज राम संग मित्रता प्रधान

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अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख।

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख।अलौकिक मंदिर बना वहाँ सुंदर देख। पर मर्यादा पुरुषोत्तम सिर्फ़ वहाँ नहीं हैं,कभी कभी ख़ुद दिल के भी अंदर देख। हर ज़र्रा तीरथ है यहाँ हर कतरा है राम,हर पत्ते में करुणा निधान का मंजर देख। सदियों से विश्व में आगे रहा है ये भारत,यहीं पे पराजित हुआ था

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श्री राम

आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।रामभक्ति बिन मैं बड़ी असहाय सी हो जाती हूं।मेरे मन मंदिर में उनका ही प्रकाश चमकता है।मेरा सम्पूर्ण जीवन उनके प्रभाव से महकता है। बड़ी हुई हूं मैं उन्हीं की कथाएं सुन सुन कर।जीवन डोर बुनी उन्ही के आदर्श चुन चुन कर।मर्यादित रखू अपने को, कोशिश

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अभिवादन से अंत तक राम व्याप्त हैं

अभिवादन से अंत तक राम व्याप्त हैं,राम नाम से ही हमें राम प्राप्त हैं,राम जो अन्याय की दीवार को तोड़ें,राम मित्रता भी दीन-हीन से जोड़ें,तम में डूबी मानवता के राम नूर हैं,राम जाति-धर्म के बंधन से दूर हैं,ठुकरा दिए राम ने राजाओं के किले,शबरी के बेर खाए और सुग्रीव से मिले।सामाजिक समरसता के राम प्रतीक,भाईचारे

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मेरे राम

कैसा जीवन जिएं मेरे राम ने बताया रामकथा ने हम सब को जीना सिखायाकैसा हो पुत्र कैसा हो भाई जानना चाहो तो मानस पढ़ लो भाई कैसी हो पत्नी पति हो कैसा पत्नी सीता जैसी पति राम जैसा कैसा हो शत्रु कैसा हो मित्र जान लोगे यदि पढ़ोगे राम का चरित्र राम जी के जीवन

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श्री रामचरितमानस विधाता छंद

पुरातन ग्रन्थ ये अपना, हमें जीना सिखाता है। सिया श्रीराम-अमृत नित,हमें पीना सिखाता है।। चले जो दम्भ से तन के,उसी की हार होती है। जहाँ हैं शील मर्यादा ,वहीं जयकार होती है।। रहे आदर्श अंतस में,वही तो राम है बनता । जपे जो राम की माला,उसी का काम भी बनता ।। नहीं आसान है मुख

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हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।

हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।रावण हैं यहां अनगिन, संताप मिटा जाओ। दुखियारी अयोध्या है, दुखियारे जन सारे।खर, दूषण घर घर में, सब मात पिता हारे।सरयू के पानी में किसने लोहू घोला?लाशों से पाट दिया, कर कर छलनी मारे।रोती हैं जो माताएं, कुछ न्याय दिला जाओ।…… हे राम असुरों के रूप में

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