Shri Rammandir Kavya

प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।

सादर समीक्षार्थ,पञ्चचामर छंद (श्रीराम)(121 212 121 212 121 2) प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।सुधा मयूख-रेख में सजी सुरम्य शान है॥प्रसून-वृष्टि-व्योम से सुमोद का वितान है।निनाद-नाद-बाल-रूप में प्रफुल्ल मान है॥ पिनाक-भंग-नाद से दिगंत गूँजमान है।सिया विवाह राम संग शुभ्रता-विधान है॥विदेह-धाम-मध्य में प्रमोद-पूर्ण स्थान है।विवाह सर्व भ्रात से छटा अनूप शान है॥ निषाद-राज राम संग मित्रता प्रधान […]

प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है। Read More »

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख।

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख।अलौकिक मंदिर बना वहाँ सुंदर देख। पर मर्यादा पुरुषोत्तम सिर्फ़ वहाँ नहीं हैं,कभी कभी ख़ुद दिल के भी अंदर देख। हर ज़र्रा तीरथ है यहाँ हर कतरा है राम,हर पत्ते में करुणा निधान का मंजर देख। सदियों से विश्व में आगे रहा है ये भारत,यहीं पे पराजित हुआ था

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख। Read More »

श्री राम

आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।रामभक्ति बिन मैं बड़ी असहाय सी हो जाती हूं।मेरे मन मंदिर में उनका ही प्रकाश चमकता है।मेरा सम्पूर्ण जीवन उनके प्रभाव से महकता है। बड़ी हुई हूं मैं उन्हीं की कथाएं सुन सुन कर।जीवन डोर बुनी उन्ही के आदर्श चुन चुन कर।मर्यादित रखू अपने को, कोशिश

श्री राम Read More »

अभिवादन से अंत तक राम व्याप्त हैं

अभिवादन से अंत तक राम व्याप्त हैं,राम नाम से ही हमें राम प्राप्त हैं,राम जो अन्याय की दीवार को तोड़ें,राम मित्रता भी दीन-हीन से जोड़ें,तम में डूबी मानवता के राम नूर हैं,राम जाति-धर्म के बंधन से दूर हैं,ठुकरा दिए राम ने राजाओं के किले,शबरी के बेर खाए और सुग्रीव से मिले।सामाजिक समरसता के राम प्रतीक,भाईचारे

अभिवादन से अंत तक राम व्याप्त हैं Read More »

मेरे राम

कैसा जीवन जिएं मेरे राम ने बताया रामकथा ने हम सब को जीना सिखायाकैसा हो पुत्र कैसा हो भाई जानना चाहो तो मानस पढ़ लो भाई कैसी हो पत्नी पति हो कैसा पत्नी सीता जैसी पति राम जैसा कैसा हो शत्रु कैसा हो मित्र जान लोगे यदि पढ़ोगे राम का चरित्र राम जी के जीवन

मेरे राम Read More »

श्री रामचरितमानस विधाता छंद

पुरातन ग्रन्थ ये अपना, हमें जीना सिखाता है। सिया श्रीराम-अमृत नित,हमें पीना सिखाता है।। चले जो दम्भ से तन के,उसी की हार होती है। जहाँ हैं शील मर्यादा ,वहीं जयकार होती है।। रहे आदर्श अंतस में,वही तो राम है बनता । जपे जो राम की माला,उसी का काम भी बनता ।। नहीं आसान है मुख

श्री रामचरितमानस विधाता छंद Read More »

हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।

हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।रावण हैं यहां अनगिन, संताप मिटा जाओ। दुखियारी अयोध्या है, दुखियारे जन सारे।खर, दूषण घर घर में, सब मात पिता हारे।सरयू के पानी में किसने लोहू घोला?लाशों से पाट दिया, कर कर छलनी मारे।रोती हैं जो माताएं, कुछ न्याय दिला जाओ।…… हे राम असुरों के रूप में

हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ। Read More »

हम सब के आदर्श राम

“हम सब के आदर्श राम”भारतीय संस्कृति के आदर्श होत्याग,दया , शौर्य का उत्कर्ष हो किन शब्दों में करूं तुम्हारा वंदनतुम हो अनादि अनंत रघुनंदन।सृष्टि के कण कण में रामजड़ चेतन में व्याप्त राममेरे तन मन जीवन में राम रघुकुल रीति के रक्षक राममंगलकारी लोकरक्षक राम कर्तव्यनिष्ठ वनवासी रामकेवट शबरी जटायु के रामशापित अहिल्या के दयालु

हम सब के आदर्श राम Read More »

संगत और कुसंगत

संगत और कुसंगत सुसंगत से बदलता मनुष्य का व्यवहारकुसंगत कर देती मनुष्य का बंटाधार कुसंगत में रहते हुये भी राम प्रेम में लीनविभीषण का राम प्रेम से हुआ बेड़ा पार वाल्मिकी डाकू से बन गया संत महानसुसंगत से जब हुआ अन्तर्मन पे प्रहार तुलसी पत्नी प्रेम में जा पहुँचा ससुरालरामायण लिख डाली जब पड़ी फटकार

संगत और कुसंगत Read More »

राम आधार हैं राम अंजाम हैं

राम आधार हैं राम अंजाम हैंऔर कुछ भी नहीं राम ही राम हैं भोर में राम हैं शाम में राम हैंइस हृदय में बसे नाम में राम हैं राम को छू शिला भी अहिल्या हुईराम हनुमंत की जिद रहे जादुईराम पूजा सदा राम ही धाम हैंऔर कुछ भी नहीं राम ही राम हैं कर्म में

राम आधार हैं राम अंजाम हैं Read More »