श्री रामचन्द्र
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दीप प्रज्वलित हो गए सारे ,
अवध नगर की गलियों में ।
मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,
राम चंद्र की बोलियों में ।।
हो वन का रस्ता ,राजमहल ,
खिवैया सरिता तीरा ।
आचरण रहे सदाचार का ,
ना होता भाव अधीरा ।।
पिता वचन का मान बड़ाया,
वनवास लिया झोलियों में ।
मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,
रामचंद्र की बोलियों में ।।
लखन सिया सह थे रघुराई ,
धर्म पथ पर थे दो भाई ।
सौमित्र भ्रात आज्ञाकारी ,
हनुमत सेवक और सहाई ।।
जय श्री राम आवाज़ उठी है ,
लंकेश की टोलियों में ।
मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,
राम चंद्र की बोलियों में ।।
करुणा साहसी शील छमा ,
जिनमें हो सभी विद्धमान ।
युगों युगों पूजे जाएँ गे,
मेरे श्री राम भगवान ।।
परव बड़ा ही रंगों वाला ,
खेले सारे होलियों में ।
मर्यादा पुरुषार्थ का पालन,
रामचंद्र की बोलियों में ।।
✍️ऋतु रस्तोगी
