सारी दुनिया के प्राण बैठे हैं।
लेके धनु और बाण बैठे हैं।
आ के देखो ज़रा अयोध्या में,
राम खुद ही प्रमाण बैठे हैं।
काम लिखने से कुछ नहीं होगा
धाम लिखने से कुछ नहीं होगा
राम जैसा भी बनना पड़ता है
राम लिखने से कुछ नही होगा
सभी तीरथ और धाम की लीला।
जानते सब हैं नाम की लीला।
दो ही आखर में सृष्टि सारी है,
क्या सुनाऊँ मैं राम की लीला।