तुम भी आओ

तुम भी आओ —–++++

राम चले पड़े वन से ,बस अब लगे पहुंचने
राजपथ को सजाओ-बिछाओ पलक पांवड़े
द्वार तोरण सजाओ_ सुहागिनों गीत मंगल के गाओ।
मंगल कलश लगाओ द्वार नगाड़े बजाओ कि—-
लौट रहे राम घर मेरे -आओ तुम भी आओ।

आज मिट्टी हुई चंदन उसे माथे लगाओ
स्वप्न जितने थे आंखों में आज उनको जगाओ।
कहो केवट से लगाए किनारे पे नाव अपनी
तराये पितरों को, सुनाएं प्रभु को हृदय ध्वनि।
बुलाओ बुलाओ, जिसे भी तुम चाहो ,सबको बुलाओ कि—-
लौट रहे राम घर मेरे आओ तुम भी आओ।

कह रही हर शिला मुझको छू कर तुम जाओ
है अहिल्या एक इसमें, शापमुक्त इसे तुम कराओ।
आज सब्र खो रही मां शबरी भी देखो
लिए मीठे मीठे फल बैठी- पास उसके भी बैठो ।
तुम्हें भी निमंत्रण -आमंत्रण तुम्हें भी ,आओ आओ कि— लौट रहे राम घर मेरे तुम भी आओ।

है पथ पर इसी जटायु की उखड़ी सी सांँसे
लौटेंगे प्रभु यही से- है जिंदा अधूरी सी आसें।
है गिलहरी सा योगदान मेरा भी प्रभु विजय में।
मेरा नाम भी अंकित विजय ध्वज में, समय में ।
बजाओ नपीरी सुनाओ ये गाथा,चहुं दिशाओं को सुनाओ कि—-
लौट रहे राम घर मेरे तुम भी आओ तुम भी आओ।
वंदना मोदी गोयल