2026-01

मेरे राम***

मेरे राम***रग- रग में रमण, करने वाले,हर क्षण, करुणा करने वाले,उन प्रभु, राम को नमन मेरा,वंदन, और अभिनंदन मेरा,!! जनम- जनम के बंधन, काटे,भक्तों, में विश्वास भरा ,भक्ती, से शक्ति, प्राप्त हुई, मन पल में हो गया हरा-भरा,उनके रजधूलि, के दर्शन से,जीवन, हो गया है धन्य मेरा,उन प्रभु राम को नमन मेरा,वंदन, और अभिनंदन मेरा,!! […]

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“राम मंदिर शिखर पर धर्मध्वज”

*”राम मंदिर शिखर पर धर्मध्वज”* शुभदिन मंगलवार भारतवर्ष का- आज ऐतिहासिक,मोदी अयोध्या राम मंदिर शिखर पर धर्मध्वज फहराए।१६१ फीट मंदिर शिखर पर २२ फीट का ध्वज फहराए।४२ फूट का ध्वजदंड, ३६०° घूर्णन बियरिंग तंत्र लगाए।इस मौके पर साथ योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख आए।ये ध्वज कभी त्रेतायुग में अयोध्या में लहरा कर फहरा,आज फिर से आंँखों

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“अयोध्या नगरी में बाजे बधाई”

“अयोध्या नगरी में बाजे बधाई” हुआ विश्व अभिभूत श्रीराम के आने पर अयोध्या में खुशी छाई।हर एक घर- आंगन में, उमंग भर-भर खुशियां सबके मन लाई।राजा दशरथ आनन्द मगन हुए, माताएं भी मिल खुशी मनाएं।सभी लोग वशिभूत हुए मंगल गीत गाए खुशियां घर घर छाई।।देखो राम के आने से रघुकुल में हर्षोउल्लास सर्वत्र छाया।दीपक जले

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राम गमन पथ यात्रा (कविता)

राम गमन पथ यात्रा (कविता) जब वन को चले थे राम,त्याग कर सुख साधन के धाम प्रकृति मुस्कुराई ,धन्य रघुराई ! जटा जुट को मुकुट विराजे,केसरिया या के भाल पे साजे ,धारण वल्कल वस्त्र, हाथ में शास्त्र,संग में, जानकी माई चले, पीछे लक्ष्मण भाई संग भवरे गुन गुनजार करे,और ठंडी सुगंधित वियार चले,गावे मोर पपीहा

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अशोक वाटिका में सीता

अशोक वाटिका में सीता :- कैसे धरूँ मैं धीर नाथ अब कैसे धरूँ मैं धीर याद तुम्हारी मोहे तड़पावेआ जाओ रघुबीर नाथ अब कैसे धरूँ मैं धीर..!! तुम बिन राघव चित न लागे पथराए नैना ये जागे पाँव पड़ी ज़ंजीर नाथ अब कैसे धरूँ मैं धीर..!! राह तुम्हारी देखूं निस दिन नैन मेरे अब काजल

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आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।

*श्री राम* आंख बंद करती हूं तो उन्हें ही समक्ष पाती हूं।रामभक्ति बिन मैं बड़ी असहाय सी हो जाती हूं।मेरे मन मंदिर में उनका ही प्रकाश चमकता है।मेरा सम्पूर्ण जीवन उनके प्रभाव से महकता है। बड़ी हुई हूं मैं उन्हीं की कथाएं सुन सुन कर।जीवन डोर बुनी उन्ही के आदर्श चुन चुन कर।मर्यादित रखू अपने

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जिव्या पर बस राम हो , “निर्मल” मन में राम ।

जिव्या पर बस राम हो , “निर्मल” मन में राम ।कानों में गूंजे सदा , दो अक्षर का नाम ।।श्री राम आदर्श हैं , समरसता प्रतिमान ।राम मंदिर बन गया ,सजा अयोध्या धाम ।।जन्म सफल सबका हुआ ,प्रभु के दर्शन पाइ ।भक्त सभी स्वागत करें ,देव सुमन बरसाइ ।। हर घर आंगन देहरी ,जलते दीप

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जिनके सुमिरन से खुल जाते स्वयं मुक्ति के सारे धाम।

जिनके सुमिरन से खुल जाते स्वयं मुक्ति के सारे धाम।वो हैं प्राणन प्यारे राम जय श्री राम जय श्री राम। कौशल्या की आंख तारे,दशरथ के हैं राज दुलारे,ताड़का मार अजामिल तारे,सुर नर मुनि जन के रखवारे,पत्थर तैर गए पानी में छूकर जिनका नाम-वो हैं —– मेरी सांसों में धड़कन में,मेरे अंतस के आंगन में,श्रद्धा होम

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हे राम हमारे आ जाओ।

हे राम हमारे आ जाओ।प्रभु राम हमारे आ जाओ। सरयू जी राह निहारे हैगंगा भी तुम्हें पुकारे हैहै साधु संत सब ये कहतेहैं राम नाम रटते रहते। सब भक्त पुकारे आ जाओ।हे राम हमारे आ जाओ । हे अवधपुरी के रघुनंदन हे राम लखन लेने चंदनतुम चित्रकूट में आए थेजब तुलसी तुम्हें बुलाए थे। भव

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* अवध आनंद *

** अवध आनंद ** दशरथ खुश हुएअवध में राम हुए गाजे बाजे बज रहे बनती सुहारी हो। नाच रहे जन-मनअब नहीं कोई ग़मअवध को मिलें हैंअब त्रिपुरारी हो। चारों भाई खेल करेंआपस में प्रेम धरें कैकेयी मां लाड़ करेंसब पर वारी हो। कौशल्या बलाएं करेंसिया राम डोर बंधेचारों भाई ब्याह रचेंसुमित्रा दुलारी हो। राम सिया

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