गीत हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।

गीत

हे राम! कहां हो तुम? कलियुग में आ जाओ।
रावण हैं यहां अनगिन, संताप मिटा जाओ।

दुखियारी अयोध्या है, दुखियारे जन सारे।
खर, दूषण घर घर में, सब मात पिता हारे।
सरयू के पानी में किसने लोहू घोला?
लाशों से पाट दिया, कर कर छलनी मारे।
रोती हैं जो माताएं, कुछ न्याय दिला जाओ।…… हे राम

असुरों के रूप में अब, हर पापी भारी है।
होठों पर मुस्कानें पर दिल में आरी है।
कुछ आग लगाते हैं अपने घर में हंसकर,
किसको अपना समझें, सबमें गद्दारी है।
मंझधार में है केवट, प्रभु पार लगा जाओ।…… हे राम

मानव के मन में तुम कब सेतु बनाओगे?
झूठों को आ करके, प्रभु कब झुठलाओगे?
नल नील खड़े दोनों सेवा को हैं तत्पर,
वह रौद्र रुप अपना प्रभु कब दिखलाओगे?
लंका में वही डंका आ करके बजा जाओ।…… हे राम

हर ओर निराशा है, दुःख के बादल छाए।
कोयल भी सावन में अब रो रो कर गाए।
अब तो सारी खुशियां लगतीं हैं बेमानी,
अपना ही अपने पर हर जुल्म यहां ढाए।
आपस में प्रेम करना प्रभु राम सिखा जाओ।…… हे राम

डॉ. धर्मेन्द्र सिंह धरम, मैनपुरिया
ग्राम खरपरी, जिला मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
7017337991, 9456415594