मेरे राम***
रग- रग में रमण, करने वाले,
हर क्षण, करुणा करने वाले,
उन प्रभु, राम को नमन मेरा,
वंदन, और अभिनंदन मेरा,!!
जनम- जनम के बंधन, काटे,
भक्तों, में विश्वास भरा ,
भक्ती, से शक्ति, प्राप्त हुई,
मन पल में हो गया हरा-भरा,
उनके रजधूलि, के दर्शन से,
जीवन, हो गया है धन्य मेरा,
उन प्रभु राम को नमन मेरा,
वंदन, और अभिनंदन मेरा,!!
मानव के रूप में हम आए,
कलयुग, में एक सहारा है
राम, नाम के दो अक्षर, ने
मेरे जीवन, को तारा है
सानिध्य, जो उनका हमें मिला,
श्री राम विना हैं कौन मेरा,
उन प्रभु राम को नमन मेरा,
वंदन, और अभिनंदन मेरा,!!
स्वरचित***
रेखा शंखवार “स्मृति”
औरैया उत्तरप्रदेश
