Shri Rammandir Kavya

राम तुम फिर धरती पर आओ

राम तुम फिर धरती पर आओ पुष्पक पर मत बैठे रह जाओ रघुनंदन तुम उतर कर आओ मल्लाहों और शबरी के संग फिर से तुम कुछ प्रीत दिखाओ। रावण फिर आज मुखर हुए हैं आकर इनका मर्दन कर जाओ लंका जिनकी स्वर्ण जटित है उनको अग्नि कुंड दिखाओ। मानवता पर छाया है संकट दुष्टों ने […]

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राम राज्य

राम राज्य सत्य सनातन का परचम।जब सारे जग में लहराएगा।।उस दिन मानों धरती पर।एक नया सवेरा आएगा।। गूंजेगी वेद ऋचाएं और।सब राम मय हो जाएगा।।उस दिन मानों की…….… भावना से परहित की।जग स्वार्थ रहित हो जाएगा।उस दिन मानों की…….… चलकर राम के आदर्शों पर।सब मंत्रमुग्ध हो जाएगा।।उस दिन धरती पर मानो…….. जब उर्मिल सा तप

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राम नाम की माला थामी

राम नाम की माला थामी,रोम-रोम रस,ताल हो गया।चित्त में चित्र लगे रघुवर के,जीवन माला-माल हो गया। मन भाया राम रतन धन थैली,अब न ओढ़ूँ चादर मैली।कान पकड़ कर बोले नीरद,अन्तिम है यह ग़लती पहली । रंग बिरंगा भ्रम का पथ है,दिन दिन करते साल हो गया। चुम्बक जैसा मोह जगत है,मस्तक मस्तक अपना मत है।अजहु

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राम वो हैं

राम वो हैं राम वो हैं, विषम को भी सम जो करें।राम वो हैं, जगत का तम जो हरें । राम वो हैं, अहल्या का शाप हरे ।राम वो हैं, जो पितृज्ञा जाप करे । राम वो हैं, जो ताज का त्याग करे । राम वो हैं, जो राज का त्याग करे । राम वो

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कैकेई

कैकेई मंथरा की कूटनीति ने कैकेई की मति को भ्रष्ट कियाकैकेई ने राम प्रेम भूल तब रघुकुल को गहरा कष्ट दिया! वो भूल गई कि अर्धरात्रि को राम चिहुंक के उठते थे“मझली माता… मझले माता”पुकार ,भूमि पर रपटते थे! राम को चिपटा सीने से तब कौशल्या विकल हो जाती थींबेचैन पुत्र को गोद ले,कैकेई के

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रोम रोम से तुम्हें पुकारूं

जय ‌श्री राम रोम रोम से तुम्हें पुकारूं ,क्षण भर न करूं आराम ।मान रखो मेरे सुमिरन का, दर्शन मुझको दो श्री राम।बोलो राम राम राम,बोलो राम राम राम।बोलो राम राम राम,बोलो राम राम राम। राह तकूं मैं शबरी बन कर, तुलसी सम मैं रचती छंद।कथा तुम्हारी पढूं, लिखूं, भरूं हृदय अपने आनंद।अतुलनीय अलौकिक छवि

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राम बसते हैं

“श्री राम” राम बसते हैं,भारत के जन -जन में।राम रमते हैं मानस सरोवर में।राम चित्त की निश्छलता है।राम कर्म की पावनता है।राम संबन्धों की शुचि सुगन्ध,राम मुक्ति का सहज अनुबंध।राम मर्यादा पुरुषोत्तम,राम का चरित्र उत्तमोत्तम।राम आदर्शों का ज्वलन्त रूप,राम धर्म का मूर्त स्वरूप।कुसुम से कोमल हृदय,वज्र से कठोर निर्णय।जटायु पर करुणा बरसाई,सुग्रीव से मित्रता निभाई।सम्मान

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लीला राम की

राम मंदिर हेतु सितंबर माह की रचना।“लीला राम की” धरा धाम पर जब बढ़ा,अतिशय अत्याचार।तब जन्में श्री राम जी,आये पालन हार।। राजा अवध लुटा रहे,मोती भर-भर थाल।अवधपुरी में धूम है,जन्मे दशरथ लाल। रानी रूठी भूप से, मांगें दो वरदान।पुत्र भरत को राज्य दो,वन को राम पयान।। राजा व्याकुल रात से, रटें राम भगवान।प्रात:जाते राम वन,दशरथ

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आ बसो मेरे हृदय हे राम मेरे

जय श्री राम 🙏 आ बसो मेरे हृदय हे राम मेरे, दो सहारा हाथ को फिर थाम मेरे कर लिया जब से भरोसा नाथ तुम पर-बन रहे तब से यहाँ सब काम मेरे। जय करूँ मैं राम जी तेरी सदा ही, नाम बिन ज्यों रात अंधेरी सदा ही, दो जगह हे नाथ चरणों में तुम्हारे

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अयोध्या के राजा राम।

कविता – अयोध्या के राजा राम। अयोध्या के राजा राम,धर्म का पालन, जीवन का क्रम।धन्य धरती पर उनका आगमन,भक्तों के दिलों में विराजमान। सीता के संग वनवास में,उनका त्याग, बलिदान और महिमा।लक्ष्मण, संग वन में किया निवास,राम के प्रेम की यह अद्भुत कहानी। रावण के अहंकार पर विजय प्राप्त,लंका के राजा रावण को हराया,सीता को

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