राम तुम फिर धरती पर आओ
राम तुम फिर धरती पर आओ पुष्पक पर मत बैठे रह जाओ रघुनंदन तुम उतर कर आओ मल्लाहों और शबरी के संग फिर से तुम कुछ प्रीत दिखाओ। रावण फिर आज मुखर हुए हैं आकर इनका मर्दन कर जाओ लंका जिनकी स्वर्ण जटित है उनको अग्नि कुंड दिखाओ। मानवता पर छाया है संकट दुष्टों ने […]
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