2026-10

उर्मिला : मौन प्रेम (त्याग ,तपस्या ) के अनकहे अध्याय की अमर गाथा

उर्मिला : मौन प्रेम (त्याग ,तपस्या ) के अनकहे अध्याय की अमर गाथा रचनाकार : डा. शालिनी सिंह,कौशांबी   उर्मिला न वह वन में गईं, न राजपथ पर चलीं,फिर भी विरह की अग्नि में प्रतिपल जलीं।लक्ष्मण के संकल्प की बनीं आधार बनी ,उर्मिला थीं प्रेम, धैर्य और त्याग का संसार बनी । चौदह वर्षों का […]

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प्रभु राम के चरणों में प्रस्तुत घनाक्षरी छंद

प्रभु राम के चरणों में प्रस्तुत घनाक्षरी छंद,,, प्राणों में हमारे राम,दिल में समाए राम,राम नाम सदा ही गाते रहिए,कौशल्या के जाए राम,दशरथदुलारे राम,राम को हृदय में बसाते रहिए,मर्यादा पुरुष राम,कलुष को मेटें राम,भक्ति में सदा ही नहाते रहिए,हरि का नाम राम,देवत्व का हिसाब राम,राम की कथा नित सुनाते रहिए।। मीत से मिलाएं राम,बिगड़ी बनाएं

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सोलह दिव्य कलाएं है, मेरे प्रभु श्री राम में।

**श्री राम**सोलह दिव्य कलाएं है,मेरे प्रभु श्री राम में।मन में एक शान्ति का सागर,मिले अयोध्या धाम में।। उत्तम गुणों से युक्त थे जो,पराक्रमी और तेजस्वी।धर्म के मर्म के ज्ञाता थे वो,कृतज्ञ और थे ओजस्वी।। सत्य का हर पल पालन करते,संकल्प विचारों के थे पक्केसीरत के जो बड़े धनी थे,प्राणी हित के थे वह सच्चे।। ज्ञानी

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कण – कण में राम

श्री राम कण – कण में रामक्षण- क्षण में रामहैं राम बसे मन- मन में हैं! हैं मर्यादा में सजते रामसीता के बिन न जचते रामबिन लक्ष्मण के हैं अधीर रामसरयू की धार में दिखते राम! हैं त्याग तपस्या के साधकहैं सृष्टि के कर्ता कारकहैं वचनवद्व दशरथ के सुतरामा हैं अहंकार के दाहक! पिता की

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🚩 मेरे प्रभु श्रीराम और पावन अयोध्या 🚩

🚩 मेरे प्रभु श्रीराम और पावन अयोध्या 🚩 एक श्रद्धा, एक आस्था, एक मर्यादा की कविता 🌺 पावन है भारत की धरती, पावन इसकी शान,अयोध्या की मिट्टी में बसते, मेरे प्रभु श्रीराम। सरयू की लहरें गाती हैं, राम नाम का गान,कण-कण में जिनके दर्शन हों, वे हैं मेरे राम। राजमहल में जन्म लिया, पर वन

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सत्य की जीत

दोहा सत्य की जीत (विजयदशमी)मर्यादा की खान है, रघुकुलके श्रीराम।युगों युगों से गूँजता, जग मेंइनका नाम।। जीत हुई है सत्य की,झूठहुआ लाचार।नष्ट हुआ आतंक है,फैलीशान्ति अपार।। अत्याचारी था सदा रावणकुटिल अपार।बुरी नियत का हो गया,जीवन सब बेकार ।। मिली बुराई को यहाँ,देखोआखिर हार ।कठिन राह थी सत्य की,अंत हुआ साकार।। विजय दिवस की सीखलो,टूट गया

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सिय संग हिय पधारों राम

सिय संग हिय पधारों राम तन अवध मन मारो अयोध्या.सिय संग हिय पधारों राम. दूषित मन के दूषन मारो.छल-कपट के खल निवारो.मन के सब संत्रास मिटाकर.कर दो पावन मारो काम.सिय संग हिय पधारों राम. काम क्रोध तो सर चढ़ बैठा.लोभ मोह ने जकड़ा ऐसा.बना सिला मै अहिल्य सरीखा.रज पग से अब तारो राम.सिय संग हिय

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श्री राम हैं आदर्श मेरे

श्री राम हैं आदर्श मेरे ——————–श्रीराम हैं आदर्श मेरे , मुझे राममय सब चाहिए ।छल-कपट ,द्वंदों से मुक्त, यह धरा अब चाहिए ।। स्नेह के सब रिश्ते हो , परिवारों में हो त्याग भाव परंपराओं का हो पालन ,नवीनता से न हो दुरावसंग खड़े हो साथ-साथ ,सहारा जब जब चाहिए ।छल -कपट ,द्वंदों से मुक्त

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राम को देखकर,अंजनी लाल की दिल की धड़कन,थमी की थमी रह गई।

राम को देखकर,अंजनी लाल कीदिल की धड़कन,थमी की थमी रह गई।राम ने प्यार से, जब पुकारा उन्हेंधरती सारी रुकी की रुकी रह गई।”🌹अंतर्यामी श्री राम की लीला:जानकी का पता अब लाएगा कौनचिंता रघुवर के मन में सताने लगी।राम के संग लक्ष्मण बैठे थे मौन पूरी सेना ठगी की ठगी रह गई।।राम को देखकर…🌹अशोक वाटिका में

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