श्री राम हैं आदर्श मेरे
——————–
श्रीराम हैं आदर्श मेरे , मुझे राममय सब चाहिए ।
छल-कपट ,द्वंदों से मुक्त, यह धरा अब चाहिए ।।
स्नेह के सब रिश्ते हो , परिवारों में हो त्याग भाव
परंपराओं का हो पालन ,नवीनता से न हो दुराव
संग खड़े हो साथ-साथ ,सहारा जब जब चाहिए ।
छल -कपट ,द्वंदों से मुक्त ,यह धरा अब चाहिए ।।
शबरियाँ न हों वंचित कोई ,श्रीराम के दीदार से
अहिल्याओं की हो गति सब ,श्रीराम के आधार से
घर घर में पनपे रावणों से ,परित्राण अब चाहिए ।
छल -कपट, द्वंदों से मुक्त ,यह धरा अब चाहिए ।।
धर्म हो सत्य आधारित ,सदा ज्ञान की गंगा बहे
न छिने निवाला भूखों का ,मानव मन चंगा रहे
दिलों में छाया तम हटे सब ,रामत्व अब जगाइए ।
छल -कपट ,द्वंदों से मुक्त ,यह धरा अब चाहिए ।|
✍️ डॉ. विजय नागपाल ‘ नाविक ‘
वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार
ट्यूलिप वॉयलेट , गुरुग्राम
