वन-वन भटकते राम खड़े, नयन भरे अश्रु धार
वन-वन भटकते राम खड़े, नयन भरे अश्रु धार,सीता बिन सूना हर क्षण, सूना सारा संसार।हर पेड़ से वो पूछ रहे, “देखी क्या तुमने जानकी को ?”पत्तों की सरसराहट बोली, “हम भी तरसे उस रानी को।”हर डाली से झुककर बोले, हर फूलों से की पुकार,“बतला दो पता मेरी प्राणप्रिया का, कहाँ छुपा है उनका प्यार?”नदियों की […]
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