तुम भी राम बन सकते हो
मदद का हाथ बढ़ाकर,
किसी का काम बन सकते हो,
तकलीफों के रावण को मारकर,
तुम भी राम बन सकते हो..
आसान नही है, सत्ता का त्याग करना,
खुशी खुशी, वनवास स्वीकारना,
दान कर अहम अपना, सरल बनो,
किसी के मुश्किलों का तुम, हल बनो,
उम्मीद और खुशियों का, पैगाम बन सकते हो,
कोशिश तो करके देखो एक बार,
तुम भी राम बन सकते हो…
बन सकते हो तुम, मर्यादा पुरुषोत्तम,
शक्ति और धैर्य का, समुचित संगम,
उद्धार कर किसी अबला अहिल्या का,
समाज में, बड़ा नाम बन सकते हो,
कोशिश तो करके देखो एक बार,
तुम भी राम बन सकते हो…
भेदभाव ना करो जाति पर,
है हर मनुष्य, ईश्वर रचित,
हाथ बढ़ाकर उसे उठाओ,
समाज की मूल धारा से जो, वंचित,
घृणा और हिंसा का धनुष तोड़कर,
ईश्वर समान बन सकते हो,
कोशिश तो करके देखो एक बार,
तुम भी राम बन सकते हो,
तुम भी राम बन सकते हो…
©®शान्तनु दास(शांत)
