राम तुम्हें अब आना होगा

राम तुम्हें अब आना होगा
कलयुग की इस घोर रात्रि में,
सत्य हुआ लाचार प्रभु।
मर्यादा की नींव हिली है,
फैला है हाहाकार प्रभु।
​धर्म-अधर्म का भेद मिटा अब,
स्वार्थ बना है सबका प्रिय!
छल और कपट का राज हुआ है,
​फिर से धनुष उठाना होगा!
दुष्टों को तड़पाना होगा,
धर्म की जोत जलाने को प्रभु,
राम तुम्हें अब आना होगा।
​सूपर्णखा सी नीयत बिखरी,
रावण जैसा अहंकार है।
कण-कण में है आज यहाँ पर,
कपट-जाल का बाज़ार बिछा।
​शबरी जैसी राह निहारे,
निश्छल-निर्मल भक्ति आज।
अहिल्या सी पत्थर बैठी है,
आस लगाए सारा समाज।
​मर्यादा का पाठ पढ़ाने,
सत्य का दीप जलाने को प्रभु।
हर उर में फैली नफ़रत को,
प्रेम की राह दिखाने को प्रभु।
फिर से कदम बढ़ाना होगा,
कलयुग के इस अंधियारे में,
राम तुम्हें अब आना होगा!
_ पलक शर्मा