राम ही राम बोल
राम ही आदि राम अनंता,
राम चिरंतन कौल,
मनवा राम ही राम तू बोल।
राम ही तारे राम उबारे,
राम ही बिगड़ी आन संवारे,
नाम बड़ा अनमोल।
मनवा राम ही राम तू बोल।
राम त्याग है, राम पराक्रम,
राम की भक्ति,राम समागम,
निर्भय हो जग डोल।
मनवा राम ही राम तू बोल।
राम धूप है, राम है छाया,
राम सनातन,जग की माया,
राम नाम रस घोल।
मनवा राम ही राम तू बोल।
बृज मे राम, सबके राम,
बिना राम नहीं,सुबह-शाम,
सुमिरन कर जग तोल।
मनवा राम ही राम तू बोल।
राम ही आदि राम अनंता,
राम चिरंतन कौल,
मनवा राम ही राम तू बोल।
—–
रचना: बृजमोहन गौड़
20, जेल रोड, राजगढ़ मप्र
राजगढ़ 465661
