प्रकटे राम अवधपुर फिर से
*प्रकटे राम अवधपुर फिर से,*(मापनी 32,यति 16,16पर) हर्षित आज सभी नर-नारी।काल-पुरुष की है बलिहारी।।सरयू भी आह्लादित भारी।धन्य राम की सब महतारी।।स्वस्ति-वचन गूँजें हर गिरि से।प्रकटे राम अवधपुर फिर से।। अहंकार का रावण आया।असुर-भाव का तंत्र रचाया।।जन्म-भूमि का मन हर्षाया।पूर्ण मिटी बाबर की छाया।।हर्ष-निनाद गूँजता स्वर से।प्रकटे राम अवधपुर फिर से।। फिर साकार हुआ युग त्रेता।नौका […]
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