2026-03

प्रकटे राम अवधपुर फिर से

*प्रकटे राम अवधपुर फिर से,*(मापनी 32,यति 16,16पर) हर्षित आज सभी नर-नारी।काल-पुरुष की है बलिहारी।।सरयू भी आह्लादित भारी।धन्य राम की सब महतारी।।स्वस्ति-वचन गूँजें हर गिरि से।प्रकटे राम अवधपुर फिर से।। अहंकार का रावण आया।असुर-भाव का तंत्र रचाया।।जन्म-भूमि का मन हर्षाया।पूर्ण मिटी बाबर की छाया।।हर्ष-निनाद गूँजता स्वर से।प्रकटे राम अवधपुर फिर से।। फिर साकार हुआ युग त्रेता।नौका […]

प्रकटे राम अवधपुर फिर से Read More »

वन-गमन

वन-गमन चले राम, सीता, लखन आज वन को भरत के लिए त्याग कर ताज वन को निरख वेश-भूषा कुमारों का वल्कलनहीं आ रही आज है लाज वन को बड़ा क़र्ज़ है भूमि का राम पर भी चुकाने चले उसका हैं ब्याज वन को भले ही है साकेत जन्नत से बढ़कर मगर मानते वो बड़ा राज

वन-गमन Read More »

राम नाम प्रिय है सबको

राम नाम प्रिय है सबको,है ये जग में सबसे प्यारा नाम।बिना राम के जग ये सूना,राम नाम जपु में सुबह और शाम।त्रेता युग में जन्मे राम,प्रेम से बोलो जय श्री राम।कितना सुंदर विह्वल रुप राम का,मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए ।कर अंहकारी रावण का वध,लौट अयोध्या वापस आये।राम ने चौदह वर्ष वनवास किया ,वन में शबरी पर

राम नाम प्रिय है सबको Read More »

राम राम जय राजा राम

श्री राम भजन 🙏🙏 राम राम जय राजा राम राम राम जय राजा राम रघुपति राघव राजा रामपतित पावन सीताराम (1) राम की नगरी में बैठी हूं राम का भजन सुनती हूं, भजन सुनने से पहले मैं ,श्री राम चरणों में अपना शीश झुकती हूं। (2) मेरे रोम – रोम में राम बसे तन-मन में

राम राम जय राजा राम Read More »

शिला

शिला गौतम ऋषि का आश्रम आज भी मौन है।मौन… वैसा ही मौन, जैसा सदियों पहले अहिल्या पर उतारा गया था। अहिल्या! एक अति सुन्दर स्त्री, निर्मल, प्रतिभाशाली पर जब छल हुआ, तो दोष उसका नहीं थाफिर भी श्राप उसी को मिलाउसने एक क्षण में सब कुछ खो दियाअपना स्वर, अपना सम्मान, अपना अस्तित्व।वह जीवित थी,

शिला Read More »

जय हो राम राम राम

जय हो राम राम राम # रामलला जी आ गए आज अयोध्या धामबोलो राम राम राम बोलो राम राम रामदर्शन करने को चलो छोड़ छाड़ सब कामबोलो राम राम राम बोलो राम राम राम कर सरजू का स्नान सभीभव सागर से तर कर जाएंगेराम लला के श्री चरणों मेंजाकर शीश नवाएंगेउनकी दया से बन जाएंगे

जय हो राम राम राम Read More »

हे राम! तुम्हारा वंदन है

हे राम! तुम्हारा वंदन है धूप दीप से थाल सजाया जिसमें रोली कुंकुम चंदन है।देवों की इस पुण्य धरा पर फिर से राम तुम्हारा वंदन है।हे राम! पुनः तुम आकर देखोस्नेह लक्ष्मण- सा नहीं दिखताचरण पादुका सिर रखने वालाभाई भरत- सा नहीं दिखतापवित्रता कहाँ अब सीता जैसी शबरी – सा प्रेम नहीं दिखतामित्रता कहाँ सुग्रीव

हे राम! तुम्हारा वंदन है Read More »

भक्ति गीत

भक्ति गीत जन-जन मन में दीप जला कर,राम नाम उजास भरो।भाव-भरी जीवन नौका को,हे रघुनंदन पार करो।। मोह माया काँटे पथ बिखरे,मन भरमा जाता है।राग द्वेष से भरा हृदय मम, लोभी हो जाता है। सत्य-धर्म की राह दिखाकर,संशय मेरे सभी हरो। भाव-भरी जीवन नौका को,हे रघुनंदन पार करो।। दुख की रेखा, संशय-छाया,सब तुम ही हरते

भक्ति गीत Read More »

प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।

सादर समीक्षार्थ,पञ्चचामर छंद (श्रीराम)(121 212 121 212 121 2) प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।सुधा मयूख-रेख में सजी सुरम्य शान है॥प्रसून-वृष्टि-व्योम से सुमोद का वितान है।निनाद-नाद-बाल-रूप में प्रफुल्ल मान है॥ पिनाक-भंग-नाद से दिगंत गूँजमान है।सिया विवाह राम संग शुभ्रता-विधान है॥विदेह-धाम-मध्य में प्रमोद-पूर्ण स्थान है।विवाह सर्व भ्रात से छटा अनूप शान है॥ निषाद-राज राम संग मित्रता प्रधान

प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है। Read More »

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख।

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख।अलौकिक मंदिर बना वहाँ सुंदर देख। पर मर्यादा पुरुषोत्तम सिर्फ़ वहाँ नहीं हैं,कभी कभी ख़ुद दिल के भी अंदर देख। हर ज़र्रा तीरथ है यहाँ हर कतरा है राम,हर पत्ते में करुणा निधान का मंजर देख। सदियों से विश्व में आगे रहा है ये भारत,यहीं पे पराजित हुआ था

अवध में उमड़ा हुआ जन समंदर देख। Read More »