संगत और कुसंगत
संगत और कुसंगत सुसंगत से बदलता मनुष्य का व्यवहारकुसंगत कर देती मनुष्य का बंटाधार कुसंगत में रहते हुये भी राम प्रेम में लीनविभीषण का राम प्रेम से हुआ बेड़ा पार वाल्मिकी डाकू से बन गया संत महानसुसंगत से जब हुआ अन्तर्मन पे प्रहार तुलसी पत्नी प्रेम में जा पहुँचा ससुरालरामायण लिख डाली जब पड़ी फटकार […]



