राम ही सर्वत्र है
“राम ही सर्वत्र है”==============राम की है नगरी सारी,राम से ही काम है।राम मेरे दिल में विराजे,राम शक्तिमान हैं।। राम जी के नाम से,गूँजती हर एक दिशा।राम से आरंभ है,और राम में हर अन्त है।। राम से धरती गगन,जल हवा सब राम से।राम है कण-कण समाए,राम ही विश्वास है।। राम अपने हैं सखा एक,राम पालनहार हैं।राम […]

