2026-05

राम ही सर्वत्र है

“राम ही सर्वत्र है”==============राम की है नगरी सारी,राम से ही काम है।राम मेरे दिल में विराजे,राम शक्तिमान हैं।। राम जी के नाम से,गूँजती हर एक दिशा।राम से आरंभ है,और राम में हर अन्त है।। राम से धरती गगन,जल हवा सब राम से।राम है कण-कण समाए,राम ही विश्वास है।। राम अपने हैं सखा एक,राम पालनहार हैं।राम […]

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माता सीता केप्राकट्य दिवस पर:-

माता सीता केप्राकट्य दिवस पर:- धरती की कोख से प्रकट हुई, पावन ज्योति सी आई,जनक के आंगन में जैसे, खुद खुशियाँ मुस्काई।सादगी में छिपा था वैभव, आंखों में था धाम,सीता नाम अमर हुआ, संग जुड़ गया श्रीराम। राजमहल की रानी बनकर, सुख सब उनके पास,पर धर्म की राह चुनी, छोड़ दिया राज पाट वन की

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